खबर 50

केरल से सबक लेते हुए भविष्य में आपदा से पहले ही तैयार रखने होंगे राहत के इंतजाम

युद्ध हो, भूकंप या बाढ़ या फिर किसी भी अन्य प्रकार की प्राकृतिक आपदा, भारत के नागरिकों की खासियत है कि ऐसे दुर्भाग्यपूर्ण अवसरों पर उनके हाथ पीड़ितों की मदद व सहयोग के लिए हर समय खुले रहते हैं। छोटे-छोटे गांव-कस्बे तक आम लोंगों से इमदाद जुटाने के कैंप लग जाते हैं, गली-गली लोग झोली फैला कर घूमते हैं, अखबारों में फोटो छपते हैं कि मदद के ट्रक रवाना किए गए। फिर कुछ दिनों बाद आपदा ग्रस्त इलाकों के स्थानीय व राज्य प्रशासन की लानत-मनानत करने वाली खबरें भी छपती हैं कि राहत सामग्री लावारिस पड़ी रही और जरूरतमंदों तक पहुंची ही नहीं। हो सकता है कि कुछ जगह ऐसी कोताही भी होती हो, लेकिन वास्तविकता तो यह है कि आम लोगों को यही पता ही नहीं होता है कि किस आपदा में किस समय किस तरह की मदद की जरूरत है।

Loading...
Loading...
loading...

Related Articles

Live TV
Close