China के सबसे ‘शक्तिशाली’ व्‍यक्ति की चेतावनी, ट्रेड वार से होगी सबसे ज्‍यादा बर्बादी

China के सबसे ‘शक्तिशाली’ व्‍यक्ति की चेतावनी, ट्रेड वार से होगी सबसे ज्‍यादा बर्बादी

चीन के सबसे अमीर और शक्तिशाली व्‍यक्ति जैक मा ने कहा है कि चीन और अमेरिका के बीच जारी ट्रेड वार का दीर्घकालिक असर होगा. उन्‍होंने कहा कि जितना सोचा जाएगा उसे कहीं ज्‍यादा बर्बादी होगी. यह लड़ाई 20 साल तक खिंच सकती है यानी राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप का कार्यकाल खत्‍म होने के बाद भी जारी रह सकती है. क्‍योंकि दोनों ही देश दुनिया की दो सबसे ताकतवर आर्थिक शक्तियां हैं. जैक मा की राय में चीन को अमेरिका से भिड़ने की बजाय अपना कारोबारी बेस बढ़ाना चाहिए. उसे दक्षिण पूर्व एशिया और अफ्रीका में कारोबार फैलाने के लिए सोचना चाहिए. 

बातचीत से सुलझ सकता है व्‍यापार युद्ध : चीन
हिन्‍दुस्‍तान टाइम्‍स की खबर के मुताबिक इससे पहले चीन के प्रधानमंत्री ली क्विंग ने अमेरिका के साथ जारी व्यापार युद्ध के बीच मुक्त व्यापार के लिए वैश्विक समर्थन की अपील करते हुए कहा कि एकतरफावाद से उन व्यापारिक विवादों का हल नहीं निकलेगा, जिन्हें बातचीत से सुलझाया जा सकता है. ली ने विश्व आर्थिक मंच के ग्रीष्म सत्र को तियान्जिन में संबोधित करते हुए उन आशंकाओं को भी खारिज कर दिया कि चीन निर्यात को बढ़ावा देने के लिए अपनी मुद्रा को कमजोर कर रहा है.

चीन की मुद्रा को कमजोर करने की योजना नहीं
उन्होंने कहा, ‘यह आवश्यक है कि हम बहुलवाद और मुक्त व्यापार के आधारभूत सिद्धांतों पर टिके रहें.’ ली ने जारी व्यापार युद्ध का जिक्र किए बिना कहा कि समाधान के लिए विचार विमर्श के जरिये प्रयास किये जाने की जरूरत है. उन्होंने कहा, ‘एकतरफावाद से ऐसा हल नहीं मिलेगा जो वहनीय हो.’ उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अपने निर्यातकों की मदद के लिए मुद्रा को कमजोर करने की चीन की कोई योजना नहीं है. उन्होंने कहा कि चीन विनिमय दर के प्रतिस्पर्धी अवमूल्यन में किसी तरह से शामिल नहीं होगा. इस साल मार्च के बाद अब तक युआन डॉलर के मुकाबले करीब आठ प्रतिशत गिर चुका है.

चीन और अमेरिका ने फिर थोपा शुल्‍क
ली ने ट्रंप द्वारा चीन पर मुद्रा के साथ छेड़छाड़ करने के आरोपों की अप्रत्यक्ष प्रतिक्रिया देते हुए कहा, ‘कुछ लोगों का मानना है कि चीन ने जानबूझकर अपनी मुद्रा का अवमूल्यन किया है. यह आधारहीन है. एक तरफा अवमूल्यन चीन के लिए अच्छा करने से अधिक बुरा करेगा.’ उल्लेखनीय है कि विश्व की दोनों शीर्ष अर्थव्यवस्थाओं के बीच छिड़ा व्यापार युद्ध मंगलवार को नये शिखर पर पहुंच गया है. अमेरिका ने चीन के अतिरिक्त 200 अरब डॉलर के आयात पर नये शुल्क लगाने की घोषणा की जिसके बाद चीन ने भी अमेरिका के 60 अरब डॉलर के अतिरिक्त आयात पर शुल्क लगा दिया. इससे पहले दोनों देश एक-दूसरे के 50-50 अरब डॉलर के आयात पर शुल्क लगा चुके हैं.

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