दिल्ली: एनसीआर में पब्लिक ट्रांसपॉर्ट की लाइफलाइन माने जाने वाले ऑटो को अपराधी वारदातों को अंजाम देने का जरिया बना रहे हैं।

दिल्ली: एनसीआर में पब्लिक ट्रांसपॉर्ट की लाइफलाइन माने जाने वाले ऑटो को अपराधी वारदातों को अंजाम देने का जरिया बना रहे हैं।

 एनसीआर में पब्लिक ट्रांसपॉर्ट की लाइफलाइन माने जाने वाले ऑटो को अपराधी वारदातों को अंजाम देने का जरिया बना रहे हैं। बता दें कि शहर में कई ऐसे ऑटो लिफ्टर गैंग सक्रिय हो गए हैं जो सवारियों को बैठाकर लूट-पाट जैसी घटनाओं को अंजाम दे रहे हैं। वहीं, कुछ मामलों में बदमाश सवारी बनकर बैठने के बाद ऑटो ही लूटकर फरार हो जा रहे हैं। अकेली महिला सवारी से झपटमारी, अभद्रता व छेड़खानी की कई घटनाएं सामने आ चुकी हैं।दिल्ली: एनसीआर में पब्लिक ट्रांसपॉर्ट की लाइफलाइन माने जाने वाले ऑटो को अपराधी वारदातों को अंजाम देने का जरिया बना रहे हैं। वहीं हैरानी की बात ये है कि इतनी वारदातें होने के बावजूद भी फरीदाबाद पुलिस ऑटो के सफर को सुरक्षित और सुगम नहीं बना पा रही है। लगातार हो रही इस तरीके की वारदातों की वजह से लोग सहमें हुए हैं और आॅटो से सफर करने में डर रहे हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक पिछले 3 महीनों में ऐसे 36 घटनाएं सामने आ चुकी हैं। क्राइम ब्रांच इनमें से सिर्फ दो केस का ही खुलासा कर पाई है। बाकी घटनाएं अनसुलझी हैं, ऑटो गैंग बेखौफ शहर में फर्राटा भर रहे हैं।

बता दें कि जून में पुलिस ने ऑटो रजिस्ट्रेशन की कवायद शुरू की थी। इसमें ऑटो चालक को ऑटो लेकर ट्रैफिक थाने में जाकर रजिस्ट्रेशन करवाना होता है। इसके बाद उस ऑटो के नंबर के साथ चालक की फोटो लेकर पुलिस ऑटो को एक पोस्टर देती है। ऑटो में यह पोस्टर व यूनीक आईडी चिपकाने से सवारी को चालक की जानकारी मिल सकती है। साथ ही कोई घटना होने पर पुलिस को भी सूचना दे पाएगी।

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