इन बेटियों को सलाम, स्वाद और क्रिएटिविटी से बनार्इ अलग पहचान

इन बेटियों को सलाम, स्वाद और क्रिएटिविटी से बनार्इ अलग पहचान

यूं तो घर पर आमतौर पर लड़कियों को पाक कला के गुण सीखने के लिए कहा जाता है। लेकिन, जब वह घर से बाहर निकलकर इसे आर्थिकी का साधन बनाने की ख्वाहिश रखें तो उन्हें तमाम चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। दून की दो दोस्त अर्चना ग्वाड़ी और स्वाति डोभाल की भी कुछ यही कहानी है। उन्होंने स्वाद को साधन बनाकर और अपनी क्रिएटिविटी दिखाकर काफी नाम कमाया है। दोनों के पिता शिव प्रसाद ग्वाड़ी और शंकर दत्त डोभाल को अपनी बेटियों पर गर्व है। उनका कहना है कि हमारी बेटियां, बेटों से कम नहीं हैं

ये दोनों दोस्त मसूरी रोड पर रिसाइकिल नाम से एक कैफे चला रही हैं। जिसमें पुरानी और बेकार हो चुकी चीजों को प्रयोग में लाकर बड़े ही खूबसूरत अंदाज में सजाया गया है। कैफे में टायरों को पेंट कर कुर्सी, पुराने संदूक और साइकिल की खराब रिम से मेज बनाई गई है। पंडितवाड़ी निवासी अर्चना और डिफेंस कॉलोनी की स्वाति की मुलाकात दिसंबर 2012 में निर्भया प्रकरण के दौरान हुए एक मार्च के दौरान हुई थी। 

दोनों के मिलते जुलते ख्यालातों के चलते उनकी दोस्ती गहरी हो गई। अर्चना पेशे से इंटीरियर डिजाइनर थीं तो स्वाति एमबीए कर बड़ी कंपनी में जॉब कर रहीं थीं। वर्ष 2014 में जॉब छोड़कर उन्होंने ‘सांझा चूल्हा’ नाम से टिफिन सेवा की शुरुआत की। शुरुआत में तमाम चुनौतियां आईं, लेकिन उनका काम देख सभी लोगों ने उनकी तारीफ की। 

दो साल तक उन्होंने टिफिन सर्विस का काम किया। इसके बाद उन्होंने कैफे खोलने की सोची। बताया कि आमतौर पर लोग पुराने सामान को फेंक देते हैं, इससे पर्यावरण को भी नुकसान पहुंचता है। उन्होंने क्रिएटिविटी दिखाते हुए इनका अपने कैफे में इस्तेमाल किया। 

पहाड़ी खान-पान को दे रहीं बढ़ावा 

एक वर्ष पूर्व उन्होंने ‘रस्यांण’ नाम से अपनी फूड कॉपरेटिव रजिस्टर्ड कराई है। दोनों इसके जरिये केटरिंग का काम कर रही हैं। वह मेले और प्रदर्शनियों में भी इसके जरिये पहाड़ी खान-पान को बढ़ावा देने का काम कर रही हैं। उनका अगला कदम पहाड़ी थीम पर आधारित रेस्टोरेंट खोलने का है। जिससे पहाड़ी खान-पान को भी लोकप्रियता मिल सके।

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