उत्तराखंड में दीवाली के बाद हो सकते हैं निकाय चुनाव

उत्तराखंड में दीवाली के बाद हो सकते हैं निकाय चुनाव

हाईकोर्ट की डबल बेंच के निर्णय के बाद प्रदेश के सभी नगर निगमों व निकायों में दीवाली के बाद नवंबर में चुनाव होना करीब करीब तय हो गया है।

निर्णय से निगमों व निकायों में आरक्षण व परिसीमन को लेकर बना संशय अब समाप्त हो गया है। 
पूर्व में चुनाव आयोग कह चुका था कि उसे चुनावी प्रक्रिया पूरी करने को न्यूनतम 29 दिन का वक्त चाहिए है। ऐसे में 15 अक्तूबर तक प्रक्रिया शुरू होने के बाद नवंबर में चुनाव संभव हैं। 

प्रदेश में निकाय चुनावों को लेकर सरकार की चूक कई बार उजागर हुई। स्वयं चुनाव आयोग को सरकार के खिलाफ हाईकोर्ट आना पड़ा था।

इसके बाद बगैर राज्यपाल के हस्ताक्षर अधिसूचना जारी कर देने, रुड़की नगर निगम को चुनावी प्रक्रिया से बाहर रखने, बाजपुर और श्रीनगर को आरक्षण से बाहर रखने और बाजपुर में अनुसूचित जाति की जनसंख्या किच्छा से कई गुना अधिक होने के बावजूद बाजपुर की रोस्टर से बाहर रखने और किच्छा को आरक्षित करने को लेकर सरकार पर सवाल उठे और इससे संबंधित याचिकाएं दायर हो जाने से चुनाव टलते भी गए।

ये भी जाने…
25 मई 2018 को रुड़की नगर निगम को आरक्षण से अलग रखने के  सरकार के फैसले को हाईकोर्ट ने गलत ठहराया था। 
28 मई को हाईकोर्ट ने नगर पालिकाओं में किए गए आरक्षण को भी निरस्त करते हुए सरकार को सभी 41 नगर पालिकाओं में नए सिरे से आरक्षण तय करने के आदेश दिए थे। हाईकोर्ट ने श्रीनगर और बाजपुर में अन्य नगर पालिकाओं के साथ आरक्षण न कराने जाने की स्थिति में यह आदेश जारी किया था। 
28 मई के आदेश के बाद प्रदेश में नगर निकाय चुनाव टल गए थे। इससे पूर्व सरकार ने 28 अप्रैल 2018 को आरक्षण की अंतिम अधिसूचना जारी कर प्रदेश की 41 नगर पालिकाओं में से  39 आरक्षण की स्थिति स्पष्ट की थी।
सरकार ने प्रदेश की दो नगर पालिकाओं श्रीनगर और बाजपुर को इस परिधि से बाहर कर दिया था क्योंकि वहां पर नए सिरे से सीमा विस्तार की प्रक्रिया शुरू की गई थी। इस बीच किच्छा निवासी मुश्ताक अहमद ने याचिका दायर कर इस मामले को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी।

कब कब क्या हुआ…

04 अप्रैल 2018-जल्द चुनाव कराने के लिए राज्य निर्वाचन आयोग ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की।
05 अप्रैल-सरकार ने हाईकोर्ट से कहा-12 मई तक कर देंगे सारी प्रक्रिया, 23 निकायों में सीमा विस्तार की अधिसूचना जारी की।
14 मई -हाईकोर्ट की सिंगल बेंच ने पांच अप्रैल को जारी 23 नगर निकायों की सीमा विस्तार की अधिसूचना को खारिज किया।
22 मई-पांच अप्रैल की अधिसूचना को खारिज करने के सिंगल बेंच के फैसले को डबल बेंच ने पलटा। नगर निकाय चुनाव का रास्ता खुला।
23 मई -चुनाव कराने के लिए सरकार और राज्य निर्वाचन आयोग के बीच हुई बैठक। 27 तक 84 नगर निकायों में चुनाव कराने के लिए सारी प्रक्रिया पूरी कर देने पर सहमति।
24 मई -सरकार ने हाईकोर्ट को दी रिपोर्ट में बताया कि 27 मई तक सारी प्रक्रिया पूरी कर दी जाएगी।
25 मई -हाईकोर्ट ने एक अन्य याचिका पर सुनवाई करते हुए रुड़की को आरक्षण प्रक्रिया से अलग रखने को गलत ठहराया। साथ ही अन्य नगर निगमों के साथ ही रुड़की में आरक्षण तय करने के आदेश जारी किए।
26 मई -सरकार ने रुड़की नगर निगम पर आए सिंगल बेंच के फैसले को डबल बेंच में चुनौती देने का निर्णय लिया।
28 मई -हाईकोर्ट ने श्रीनगर और बाजपुर नगर पालिका परिषद का आरक्षण अन्य के साथ न कराने को गलत ठहराया। साथ ही सभी 41 नगर पालिकाओं का आरक्षण एक साथ तय करने के आदेश जारी किए।
09 अक्टूबर-  प्रदेश के नगर निगमों सहित समस्त निकायों के लिए एक सप्ताह के भीतर चुनाव प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश।

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