केदारनाथ धाम के कपाट शीतकाल के लिए नौ नवंबर को होंगे बंद

केदारनाथ धाम के कपाट शीतकाल के लिए नौ नवंबर को होंगे बंद

 विश्व प्रसिद्ध केदारनाथ धाम के कपाट भैयादूज पर्व पर नौ नवंबर को सुबह साढ़े आठ बजे शीतकाल के लिए बंद कर दिए जाएंगे। जबकि, द्वितीय केदार मध्यमेश्वर व तृतीय केदार तुंगनाथ धाम के कपाट बंद होने की तिथि 19 अक्टूबर को विजयदशमी पर्व पर तय की जाएगी। इसे लेकर श्री बदरी-केदार मंदिर समिति ने ऊखीमठ स्थित ओंकारेश्वर धाम में तैयारियां शुरू कर दी हैं।

केदारनाथ में नौ नवंबर को सुबह चार बजे भगवान को भोग लगाने के साथ समाधि पूजा होगी और ठीक साढ़े आठ बजे मुख्य कपाट बंद होने के बाद बाबा की उत्सव डोली अपने शीतकालीन प्रवास ओंकारेश्वर मंदिर के लिए प्रस्थान करेगी। वहीं, वेदपाठी, ब्राह्मण व पुजारी पंचगद्दीस्थल ओंकारेश्वर मंदिर ऊखीमठ में पंचाग गणना के अनुसार 19 अक्टूबर को द्वितीय व तृतीय केदार के कपाट बंद करने की तिथि तय करेंगे। मंदिर समिति के कार्याधिकारी एनपी जमलोकी ने बताया कि इसके लिए मंदिर समिति के कर्मचारी तैयारियों में जुट गए हैं।

हेमकुंड साहिब और लोकपाल लक्ष्मण के कपाट शीतकाल के लिए बंद

हिमालय के पांचवे धाम हेमकुंड साहिब और लोकपाल लक्ष्मण मंदिर के कपाट 10 अक्‍टूबर को दोपहर 1.30 बजे शीतकाल के लिए बंद कर दिए गए। कपाटबंदी के मौके पर सात हजार से अधिक श्रद्धालुओं ने हेमकुंड गुरुद्वारे में मत्था टेककर अंतिम अरदास में भाग लिया। लगभग इतने ही यात्रियों ने लोकपाल के भी दर्शन किए।

कपाट बंद होने से पूर्व हेमकुंड गुरुद्वारे में सुखमणि साहिब का पाठ हुआ। इसके बाद सबद-कीर्तन और अंतिम अरदास हुई। श्री हेमकुंड साहिब ट्रस्ट के मुख्य ग्रंथी मिलाप ङ्क्षसह व कुलवंत ङ्क्षसह ने अंतिम अरदास कराई। इसके साथ ही पंज प्यारों की अगुआई में गुरु ग्रंथ साहिब को सचखंड के लिए रवाना किया गया। अरदास से पहले श्रद्धालुओं ने सात पहाडिय़ों से घिरे पवित्र हेमकुंड सरोवर में डुबकी लगाई। इस दौरान श्रद्धालुओं को हलुवा व खिचड़ी प्रसाद के रूप में वितरित की गई।

उधर, श्री हेमकुंड साहिब गुरुद्वारे के निकट स्थित हिंदुओं की आस्था के केंद्र लोकपाल लक्ष्मण मंदिर के कपाट भी पारंपरिक विधि-विधान के साथ शीतकाल के लिए बंद कर दिए गए। हक-हकूकधारी भ्यूंडार के ग्रामीणों ने परंपरानुसार कपाटबंदी से पूर्व लोकपाल की पूजा-अर्चना की। इस मौके पर हेमकुंड साहिब पहुंचे हजारों सिख श्रद्धालुओं ने भी भगवान लोकपाल के दर्शनों का पुण्य अर्जित किया। मान्यता है कि भगवान लोकपाल ने पूर्व जन्म में शेषनाग के रूप में इस स्थान पर तपस्या की थी। 

इस साल 2.35 लाख ने टेका मत्था

इस वर्ष मौसम अनुकूल रहने के कारण रिकॉर्ड 2.35 लाख श्रद्धालुओं ने हेमकुंड साहिब गुररुद्वारे में मत्था टेका। लगभग इतने ही श्रद्धालुओं ने लोकपाल लक्ष्मण मंदिर में भी दर्शनों का पुण्य अर्जित किया। विदित हो कि इस वर्ष 25 मई को दोनों के कपाट खोले गए थे।

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