तीन बार कॉलेज ड्रॉप आउट जैक डॉरसे आज हैं ट्विटर के सीईओ, जानें- उनका सफरनामा

तीन बार कॉलेज ड्रॉप आउट जैक डॉरसे आज हैं ट्विटर के सीईओ, जानें- उनका सफरनामा

ट्विटर के सीईओ जैक डॉरसे अपने भारत दौरे के दौरान सनसनीखेज खुलासा किया है। आइआइटी दिल्ली में छात्रों के बीच पहुंचे जैक ने खुलासा किया है कि वे कॉलेज ड्राप आउट रहे है और एक बार नहीं, बल्कि तीन-तीन बार। बता दें कि वह दिवाली के बाद भारत आए थे। उन्होंने धर्मगुरु दलाई लामा और कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी से मुलाकात की। राहुल गांधी से उन्होंने फर्जी खबरों के मुद्दे पर भी बातचीत की। इसके बाद सोमवार को आइआइटी दिल्ली के छात्रों से संवाद करने पहुंचे।

जैक जैसे ही मंच पर पहुंचे, संस्थान का टाउन हॉल हूटिंग से गूंज उठा। सभी ने तालियों से उनका अभिनंदन किया। इसके बाद ट्विटर के जरिये ही संवाद हुआ। इस बीच उन्होंने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की वजह से नौकरियों में संकट के मुद्दे पर भी बात की और अपनी जिंदगी से अनुभव भी साझा किए।

उन्होंने कहा कि वह कॉलेज ड्रॉपआउट रहे हैं। दरअसल, छात्र पुनीत पलियाल ने ट्विटर के माध्यम से उनसे सवाल किया था कि युवा के भीतर उद्यमी मानसिकता को बढ़ावा देने/रोकने में दुनिया की औपचारिक शिक्षा प्रणाली क्या भूमिका निभाती है? आपको कैसे लगता है कि हम सिस्टम को बेहतर बना सकते हैं, ताकि युवा वास्तविक समस्याओं को हल करने के लिए और विचारों के साथ आगे आ सकें?

जैक ने कहा, मैं कॉलेज का ड्रॉपआउट रहा हूं
पुनीत के सवाल पर जैक ने कहा कि मैं कॉलेज का ड्रॉपआउट रहा हूं। मैं कोई रोल मॉडल नहीं हूं। सिर्फ हमेशा अपने आइडिया को एक मूर्त रूप देना चाहता था। मुझे लगता था कि मैं जो स्कूल-कॉलेज में पढ़ रहा हूं, उससे ज्यादा मुझे बाहर से सीखने को मिल रहा है और बाहर से ही सीखते हुए अपने आइडिया को विकसित करता हूं। कॉलेज ड्रॉप करने के बाद मेरी मां हमेशा मुझे वापस कॉलेज भेजना चाहती थी, लेकिन मैं नहीं गया।

मुझे लगता है कि हमें आत्म जागरूक रहने की जरूरत है। अगर आप अपनी समस्या का समाधान निकाल पाते हैं तो यह बड़ी उपलब्धि है। कोई हालात क्यों न हो, आप अपनी समस्याओं को सुलझाने के लिए खुद सक्षम बनें।

जैक ने कहा कि शिक्षण संस्थान में छात्रों को पढ़ाने वाले प्रोफेसरों को यह समझना चाहिए कि हर किसी की सीखने की क्षमता अलग होती है। कोई किसी एक आइडिया को ज्यादा महत्व देता है तो कोई छात्र किताबों को ज्यादा महत्व देता है।

गौरतलब है कि जैक तीन बार ड्रॉपआउट रहे हैं। वह यूनिवर्सिटी ऑफ मिसोरी-रौला, न्यूयॉर्क यूनिवर्सिटी और एक फैशन स्कूल से ड्रॉपआउट रह चुके हैं।

ट्विटर पर इसलिए नहीं है एडिट बटन
जैक ने कहा कि ट्विटर के पास एडिट बटन नहीं है, क्योंकि लोग मूल ट्वीट संपादित करके अपनी राय बदल सकते हैं। उनकी तरफ से संभावना जताई गई है कि भविष्य में इस पर काम हो सकता है।

यहां पर बता दें कि सोशल मीडिया साइट ट्विटर के सीईओ जैक डॉरसे ने लगातार तीन साल से वेतन नहीं लिया है। जैक 2015 में ट्विटर के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) बने थे। इसके बाद उन्होंने माइक्रो-ब्लॉगिंग प्लेटफार्म को चलाने के लिए एक पैसा भी लेने से इनकार कर दिया।

तीन साल से सेलरी नहीं ली जैक ने

अमेरिकी सुरक्षा और विनिमय आयोग (एसईसी) में ट्विटर ने तब फाइलिंग में कहा था कि ट्विटर की लंबी अवधि की रेवेन्यू जेनरेशन की क्षमता के प्रति अपनी प्रतिबद्धता और भरोसे के कारण जैक डोर्सी ने 2017 में कोई भी सेलरी लेने से मना कर दिया है।

यहां पर बता दें कि पिछले हफ्ते अपने पहले भारत दौरे पर आए डॉरसे ने दलाई लामा से भी मुलाकात की थी और उन्हें ‘अद्भुत शिक्षक’ कहा था। दलाई लामा से मिलने के बाद उन्होंने ट्वीट किया था ‘मेरी नथ को वास्तव में नहीं खींचने के लिए शुक्रिया, हालांकि आपने कोशिश काफी की थी।’

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