सैलानियों के लिये खुला राजाजी टाइगर रिजर्व का चीला रेंज

सैलानियों के लिये खुला राजाजी टाइगर रिजर्व का चीला रेंज

राजाजी टाइगर रिजर्व की चीला रेंज को पर्यटकों के लिए खोल दिया गया है। वाइल्ड लाइफ चीफ मोहनीश मलिक के विधिवत पूजा अर्चना कर फीता खोल सैलानियों को जंगल सफारी के लिए भेजा। पहले दिन देशी ओर विदेशी पर्यटकों ने जंगल सफारी का लुत्फ उठाया।

राजाजी टाइगर रिजर्व की चीला रेंज जून माह में पर्यटकों के लिए बंद कर दी जाती है। वहीं 15 नवंबर को प्रतिवर्ष सैलानियों के लिए गेट खोल दिया जाता है। गुरुवार को वाइल्ड कैफ चीफ मोनीष मालिक और पार्क के डायरेक्टर सनातन ने फीता खोल सैलानियों को जंगल सफारी के लिए भेजा। इस दौरान वाइल्ड लाइफ चीफ मोनीष ने कहा कि उनका मकसद पर्यटकों को ज्यादा से ज्यादा जंगल की ओर आकर्षित करना है।

कहा कि बड़ी खुशी की बात है कि अब यहां हाथी, लेपर्ड सहित अन्य जंगली जानवरों की संख्या में बढ़ोत्तरी हो रही है। कहा कि इस बार न्यायालय ने कुछ शर्तों के साथ पार्क क्षेत्र में पर्यटन करने जा आदेश दिया है, उसका अनुपालन करते हुए जंगल सफारी कराई जा रही है। राजाजी टाइगर रिजर्व के डायरेक्टर सनातन ने कहा कि हाथियों के संरक्षण और संवर्द्धन के लिए पार्क प्रसाशन निरंतर प्रयासरत है। इस अवसर पर वार्डन अजय शर्मा, वन छेत्राधिकारी अनिल पैन्यूली मौजूद रहे।

चक्रवर्ती राजगोपालाचारी के नाम पर पड़ा इसका नाम 

राजाजी राष्ट्रीय उद्यान उत्तराखंड के देहरादून से 23 किमी की दूरी पर स्थित है। यह देहरादून (उत्तराखंड) के प्रमुख पर्यटन स्थलों में से है। 1983 से पहले इस क्षेत्र में फैले जंगलों में तीन अभयारण्य थे- राजाजी, मोतीचूर और चिला। 1983 में इन तीनों को मिला दिया गया। महान स्वतंत्रता सेनानी चक्रवर्ती राजगोपालाचारी के नाम पर इसका नाम राजाजी राष्ट्रीय उद्यान रखा गया। 830 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में फैला राजाजी राष्ट्रीय उद्यान अपने यहां पाए जाने वाले हाथियों की संख्या के लिए जाना जाता है।इसके अलावा राजाजी राष्ट्रीय उद्यान में हिरन, चीते, सांभर और मोर भी पाए जाते हैं। राजाजी राष्ट्रीय उद्यान में पक्षियों की 315 प्रजातियां पाई जाती हैं।

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