फुजैरा के शासक परिवार ने माना भारत के योग और ध्यान का लोहा

फुजैरा के शासक परिवार ने माना भारत के योग और ध्यान का लोहा

संयुक्त अरब अमीरात के छोटे लेकिन खूबसूरत अमीरात फुजैरा में गुरुवार को ध्यान और योग के भारत के दर्शन को सार्वजनिक स्वीकृति मिली। मुस्लिम आबादी वाले इस अमीरात के फुटबॉल स्टेडियम में छह हजार से अधिक लोगों की उपस्थिति में आर्ट ऑफ लिविंग के संस्थापक और आध्यात्मिक गुरु श्री श्री रविशंकर ने ध्यान से आत्मशांति के साथ विश्वशांति का मंत्र दिया। खुद क्राउन प्रिंस और रॉयल फैमिली के सदस्यों ने ध्यान लगाकर पूरी दुनिया को संदेश दिया कि ध्यान और योग से आत्मशांति के साथ विश्व शांति लाने का भारत का प्रयास अनुकरणीय है।

फुजैरा की सरकार के सौजन्य से आर्ट ऑफ लिविंग द्वारा आयोजित समारोह में श्री श्री रविशंकर ने कहा कि शांति खोजने से नहीं बल्कि कोशिश से मिलती है। जब तक मन में शांति नहीं होगी तब तक बाहर शांति को ढूंढना असंभव है, पूरी दुनिया एक परिवार की तरह है। किसी एक देश में यदि अशांति है तो दूसरा देश भी उससे प्रभावित होता है। सीरिया, इराक सहित कई देशों का उदाहरण सामने है। संघर्ष का कारण तनावपूर्ण जीवनशैली है। उन्होंने योग और ध्यान को लेकर भारत की प्रतिबद्धता को सामने रखते हुए कहा कि ध्यान से दुनियाभर में शांति कायम हो सकती है। इराक, सीरिया सहित कई देशों के रिफ्यूजी कैम्पों में काम करते हुए आर्ट ऑफ लिविंग ने ऐसा महसूस किया है। आतंक से जुड़े अनेक युवा हमारे प्रयास से ध्यान और योग से जुड़कर मुख्य धारा में लौट चुके हैं।

समारोह में फुजैरा के क्राउन प्रिंस हमद बिन मुहम्मद बिन शर्की ने शांति और सद्भाव के लिए अपने अमीरात की प्रतिबद्धता दोहराते हुए कहा कि उनके परदादा ने फुजैरा की ओर से समूचे यूएई के लिए सहिष्णुता का द्वार खोला था। हमने बचपन में उनसे सीखा है कि शांति और विकास के लिए सहिष्णुता कितना जरूरी है। उनकी ही परम्परा को आगे बढ़ाते हुए फुजैरा की सरकार ने इस दिशा में नई शुरुआत की है। आज फुजैरा के साथ समूचा यूएई सहिष्णुता दिवस मना रहा है। प्रिंस ने आर्ट ऑफ लिविंग द्वारा पूरी दुनिया में शांति और विकास के लिए किए जा रहे प्रयासों की सराहना की।

शासक के परिवार ने भी किया ध्यान

स्टेडियम में श्री श्री के ध्यान शिविर में रॉयल फैमिली के साथ समूचा फुजैरा प्रशासन उपस्थित था। खुद क्राउन प्रिंस और उनके छोटे भाई ने भी श्री श्री के उद्घोष पर ध्यान लगाया।

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