भाजपा की साख कायम, कांग्रेस को थोड़े में संतोष

भाजपा की साख कायम, कांग्रेस को थोड़े में संतोष

भाजपा ने निकाय चुनाव में अब तक का सबसे बेहतरीन प्रदर्शन तो किया ही, साथ ही पिछले लोकसभा और विधानसभा चुनाव की तर्ज पर पार्टी का विजय रथ भी सरपट दौड़ा। मध्य रात्रि के बाद दो बजे समाचार लिखे जाने तक निकाय प्रमुख पदों, यानी महापौर व अध्यक्ष पदों पर भाजपा 32 में जीत दर्ज करने में कामयाब रही और रुझानों में दो निकायों में निर्णायक बढ़त के साथ आगे चल रही थी। हालांकि पार्षद व सभासद पदों पर इस बार भी निर्दलीयों ने ही परचम फहराया। भाजपा निकाय प्रमुख पदों पर जीत के मामले में सबसे आगे जरूर निकल गई, मगर उसे कांग्रेस व निर्दलीयों ने जोरदार टक्कर दी।

प्रदेश में व्यापक वजूद रखने वाली दोनों राष्ट्रीय पार्टियों, भाजपा और कांग्रेस के लिए निकाय चुनाव साख का सवाल थे। भाजपा पिछले पांच सालों के दौरान हुए चुनावों में एकतरफा तरीके से जीत दर्ज करती आ रही है। वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव में भाजपा ने राज्य की सभी पांचों सीटों पर जीत दर्ज कर कांग्रेस को चारों खाने चित कर दिया। उस वक्त सूबे में कांग्रेस सत्ता में थी लेकिन मोदी लहर के आगे कांग्रेस कहीं भी नहीं टिक पाई। मोदी मैजिक का असर वर्ष 2017 की शुरुआत में हुए विधानसभा चुनाव में भी साफ नजर आया। पहली बार 70 सदस्यीय विधानसभा में कोई पार्टी इतने भारी भरकम बहुमत के साथ सत्ता तक पहुंची। इस चुनाव में भाजपा ने 57 सीटें जीतीं तो कांग्रेस को महज 11 सीटों पर सिमट जाना पड़ा।

हालांकि निकाय चुनाव स्थानीय मुद्दों पर ही ज्यादातर केंद्रित होते हैं लेकिन इसके बावजूद भाजपा के रणनीतिकारों को पूरा भरोसा था कि इस चुनाव में भी पार्टी अपने प्रदर्शन को दोहराएगी। मंगलवार को जब निकाय चुनावों के नतीजे आने शुरू हुए तो धीरे-धीरे तस्वीर साफ होती गई कि भाजपा सबसे आगे तो रहेगी ही, साथ ही नतीजे दावों के मुताबिक उसके पक्ष में आ रहे हैं। कुल 84 निकायों में चुनाव हुए, जिनमें से एक निकाय नगर पंचायत पोखरी में अध्यक्ष पद पर मतगणना रोकी गई है। इनमें से मध्य रात्रि के बाद दो बजे तक भाजपा 32 निकाय प्रमुखों के पद जीत चुकी थी और दो पर निर्णायक बढ़त बनाए हुए थी। भाजपा की मुख्य प्रतिद्वंद्वी कांग्रेस ने निकाय प्रमुखों के 24 पदों पर जीत दर्ज कर ली थी, जबकि निर्दलीयों का जीत का आंकड़ा 23 का रहा। एक निकाय अध्यक्ष पद बसपा को मिला। 

साफ है कि भाजपा तो अपनी साख बचाने में कामयाब हो गई लेकिन कांग्रेस इस मौके को पूरी तरह भुना नहीं पाई। दरअसल, कांग्रेस पिछले लोकसभा व विधानसभा चुनाव में जिस तरह सिमट कर रह गई थी, उसे देखते हुए पार्टी नेता निकाय चुनाव को अपनी खोई सियासी जमीन वापस हासिल करने के अवसर के रूप में देख रहे थी, लेकिन ऐसा हो नहीं पाया। अगर नगर निगमों पर कब्जे के लिहाज से आकलन किया जाए तो भाजपा की स्थिति खासी बेहतर रही। ऋषिकेश, रुद्रपुर व काशीपुर में भाजपा ने जीत दर्ज कर ली है जबकि राज्य के सबसे बड़े नगर निगम देहरादून के साथ ही हल्द्वानी में पार्टी प्रत्याशी निर्णायक बढ़त के साथ आगे चल रहे थे। हरिद्वार में कांग्रेस मामूली बढ़त पर थी, जबकि कोटद्वार का महापौर पद कांग्रेस ने जीत लिया। गौरतलब है कि पिछले निकाय चुनाव में भाजपा ने छह निगमों में से देहरादून, हरिद्वार, रुद्रपुर व हल्द्वानी में जीत दर्ज की थी जबकि रुड़की व काशीपुर में निर्दलीय विजयी रहे थे। इस बार कांग्रेस ने निर्दलीयों को पीछे धकेलते हुए नगर निगमों में भी अपनी उपस्थिति दर्ज करा दी है।

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