अंडमान निकोबार द्वीप समूह में सेंटेनलीज जनजाति के लोगों ने कथित तौर पर तीर मारकर हत्‍या कर दी

अंडमान निकोबार द्वीप समूह में सेंटेनलीज जनजाति के लोगों ने कथित तौर पर तीर मारकर हत्‍या कर दी

मिशनरीज के काम में लगे अमेरिकी नागरिक जॉन एलेन चाऊ की अंडमान निकोबार द्वीप समूह में सेंटेनलीज जनजाति के लोगों ने कथित तौर पर तीर मारकर हत्‍या कर दी. मरने से पहले जॉन एलेन चाऊ एक आखिरी जर्नल भी लिखा था. इस संदेश में लिखा था, भगवान मैं मरना नहीं चाहता. इस जर्नल में उन्‍होंने अपनी जिंदगी के आखिरी दिनों के बारे में बताया है. 

पुलिस के मुताबिक अमेरिकी पर्यटक जॉन एलेन चाऊ (27) की तीर मारकर हत्‍या उस वक्‍त कर दी गई, जब वह 16 नवंबर को सेंटेनलीज आदिवासी समूह के इलाके में घुसने की कोशिश कर रहे थे. दिन गुजरने के साथ जब वह नहीं लौटे तो उनके एक दोस्‍त ने उसकी गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई. चाऊ को उस इलाके तक पहुंचाने वाले सात मछुआरों को पकड़ा गया. अब उसकी बॉडी को वहां से निकालना बड़ी चुनौती है.

अंग्रेजी अखबार द इंडियन एक्‍सप्रेस के मुताबिक, 16 नवंबर की शाम को एलेन जान चाऊ ने मछुआरों को एक 13-पेज का जर्नल सौंपा था. चाऊ की मां ने वाशिंगटन पोस्ट के साथ इस जर्नल को साझा किया. चाऊ ने उसमें बताया था कि एक छोटी सी नाव के जरिए उस जगह पर पहुंचा, जहां पर सेंटेनलीज जनजाति के लोग रहे हैं. वहां उसे पांच फीट और पांच इंच के कद वाले कुछ लोग नजर आए, उन्‍होंने मुंह पर पीले रंग का पेस्‍ट लगाया हुआ है. चाऊ ने अपने जर्नल में लिखा है कि उन्‍हें देखकर वह लोग काफी गुस्‍सा हो गए.

अपने आखिरी जर्नल में उन्होंने कहा कि जब मेरा उनके साथ आमना-सामना हुआ, तो मैने उन्हें अपने बारे में बताया. मैंने उनसे कहा, ‘मेरा नाम जॉन है और मैं आपसे प्‍यार करता हूं और जीसस आपसे प्‍यार करते हैं.’ इसी समय एक किशोर ने उन पर तीर से हमला किया. जो उनके पास मौजूद बाइबिल को फाड़ता हुआ चला गया. 

उन्होंने लिखा है कि आप लोग सोच रहे होंगे कि मैं पागल हूं, लेकिन मुझे लगता है कि इन लोगों को प्रभु यीशु के बारे में बताना बेहद जरूरी है. चाऊ ने इसके साथ ही लिखा है कि भगवान मैं मरना नहीं चाहता. इस खूबसूरत जगह पर इतनी मौत क्यों होती हैं? उन्होंने लिखा है, ‘मैं ये मानता हूं कि ये मेरा आखिरी संदेश नहीं है, बाकी ईश्‍वर की मर्जी’. 

चाऊ इंस्‍टाग्राम पर काफी एक्टिव थे. इससे पहले वो चार बार अंडमान निकोबार आ चुके थे. साल 2015 में वो पहली बार यहां आए थे. दो नवंबर को उन्होंने अपने इंस्‍टाग्राम पोस्ट पर उत्तर अंडमान में दिगलीपुर की यात्रा के बारे में लिखा था. उन्होंने एक ट्रॉपिकल झरने की एक तस्वीर पोस्ट करते हुए लिखा था कि ये लीच (जोंक) से भरा है. उनका एक ब्‍लॉग भी है, जिसका नाम ‘theruggedtrail’ है. इसमें उन्होंने अफ्रीका समेत अनेक साहसिक यात्राओं के बारे में लिखा था.

उनके लिंक्डइन खाते के मुताबिक, ओकलाहोमा के तुलसा में ओरल रॉबर्ट्स विश्वविद्यालय से स्वास्थ्य और शारीरिक शिक्षा में डिग्री के साथ चाऊ ने दक्षिण अफ्रीका में काम किया था और उसके बाद उत्तरी इराक (कुर्दिस्तान) में एक शरणार्थी शिविर में काम किया था.

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