न्याय पाने की भारत की उम्मीद के साथ खड़ा है अमेरिका

न्याय पाने की भारत की उम्मीद के साथ खड़ा है अमेरिका

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को कहा कि मुंबई आतंकवादी हमले की 10 वीं बरसी पर अमेरिका इस मामले में न्याय पाने की भारत की इच्छा के साथ खड़ा है. ट्रंप ने ट्वीट किया, मुंबई आतंकवादी हमले की 10 वीं बरसी पर अमेरिका इस मामले में न्याय पाने की भारत की जनता की इच्छा के साथ खड़ा है.’’ उन्होंने कहा, ‘‘ इस हमले में छह अमेरिकियों सहित 166 निर्दोष लोग मारे गए थे. हम आतंकवादियों को कभी जीतने या जीत के करीब नहीं आने देंगे.’’ 

इन हमलों में अपने पति और 13 साल की बच्ची को गंवाने वाली महिला किआ चेर ने ट्वीट के लिए राष्ट्रपति का शुक्रिया अदा किया. उन्होंने कहा, ‘‘यह दिन हमें घृणा पर प्यार की जीत की याद दिलाता रहे. यह ऐसी ताकत है जिसे गोली मार नहीं सकती. यह हमारी असली ताकत है. शुक्रिया.’’ 

यहां पर भारतीय दूतावास में 26/11 मुंबई आतंकवादी हमले के पीड़ितों की याद में एक कार्यक्रम का आयोजन किया गया जिसमें अमेरिका के आतंकवाद विरोधी कार्यक्रम के एक शीर्ष अधिकारी ने पाकिस्तान से लश्कर-ए-तैयबा तथा अन्य आतंकवादियों को न्याय के दायरे में लाने की मांग की.

विदेश मंत्रालय के आतंकवाद निरोधक समन्वयक नाथन सेल्स ने अपने संक्षिप्त बयान में कहा, ‘‘हम सभी देशों खासतौर पर पाकिस्तान से मांग करते हैं कि वे दोषियों को सजा दिलाने की अपनी जिम्मेदारी निभाएं. सभी देश संयुक्त राष्ट्र द्वारा घोषित आतंकवादी संगठनों और इसके नेताओं के खिलाफ कार्रवाई करने के अंतरराष्ट्रीय दायित्वों को निभाएं.’’ 

विदेश मंत्रालय ने इस हमले को अंजाम देने वाले अथवा इसमें किसी प्रकार की सहायता करने वाले के बारे में कोई सुराग देने वाले व्यक्ति को 50 लाख डॉलर का इनाम देने की घोषणा का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा, ‘‘इसके साथ हम विश्व को यह याद दिलाते हैं कि हम 10 वर्ष पहले मारे गए लोगों को भूले नहीं हैं और हम तब तक आराम से नहीं बैठेंगे जब तक कि दोषियों को सजा नहीं मिल जाती.’’ 

अमेरिका में भारतीय राजदूत नवतेज सरना ने हमले में मारे गए लोगों को श्रद्धांजलि अर्पित की. इन हमलों में भारतीयों के अलावा 14 अन्य देशों के नागरिक भी मारे गए थे. उन्होंने आतंकवाद के सभी स्वरूपों की आलोचना की. साथ ही अंतरराष्ट्रीय समुदाय से इस हमले के दोषियों को न्याय के कठघरे में लाने की पाकिस्तान से मांग करने को कहा. सरना ने विदेश मंत्रालय को ‘‘रिवॉर्ड फॉर जस्टिस’’ जैसे कदम उठाने के लिए शुक्रिया अदा किया. 

इस कार्यक्रम में मारे गए लोगों की याद में दो मिनट का मौन भी रखा गया. साथ ही इस अवसर पर परमार्थ संस्था ‘वन लाइफ एलाइंस’ की सह संस्थापक चेर द्वारा लिखे गए एक लेख के कुछ अंश भी पढ़ कर सुनाए गए. कार्यक्रम के अंत में एचबीओ का वृत्तचित्र ‘टेरर इन मुंबई’ भी दिखाया गया. 

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