शत्रु संपत्तियों पर काबिज किरायेदारों को कराना होगा रजिस्टर्ड एंग्रीमेंट

शत्रु संपत्तियों पर काबिज किरायेदारों को कराना होगा रजिस्टर्ड एंग्रीमेंट

शत्रु संपत्तियों पर काबिज किरायेदारों को रजिस्टर्ड एग्रीमेंट कराना होगा। अब तक मामूली किरायेनामे के आधार पर ही अधिकांश किरायेदार काबिज हैं। इसके साथ ही प्रशासन निस्तारण होने से पहले कब्जेदारों से 2013 से बढ़ी दरों पर किराया वसूले की भी तैयारी कर रहा है।

गृह मंत्रालय के निर्देश पर सोमवार को शत्रु संपत्तियों को लेकर हुई बैठक में सभी अफसरों को निर्देश दिए गए हैं कि इनमें जितने भी किरायेदार हैं, उनका सत्यापन कर रजिस्टर्ड एग्रीमेंट कराया जाए। अब तक अधिकांश किरायेदार शत्रु अभिकरण अधिकारी से मामूली किरायेनामे के आधार पर काबिज हैं।

किराये में बढ़ोतरी का भी था प्रस्ताव

किरायेदारों को एक अप्रैल 2013 से बढ़ा हुआ किराया देना होगा। प्रशासन ने सर्किल रेट के हिसाब से किराया दर तय किया है। प्रशासन ने उस समय निर्धारित सर्किल रेट के हिसाब से किराया तय किया था। इसके बाद प्रत्येक वर्ष दस से 15 प्रतिशत की बढ़ोतरी प्रस्तावित थी।

मामूली किराया देकर कमा रहे लाखों रुपये

शुत्र संपत्तियों पर काबिज किरायेदार दशकों से नाममात्र का किराया दे रहे हैं और व्यावसायिक इस्तेमाल कर लाखों रुपये कमा रहे हैं। कई किरायेदारों ने तो बिना अनुमति के संपत्तियों के मूल स्वरूप से छेड़छाड़ भी की है। अधिकांश कब्जेदारों ने दूसरों को किराये पर भी ये संपत्तियां दे रखी हैं। 

120 से तो नहीं मिल रहा किराया

सौ से अधिक शत्रु संपत्तियों पर ऐसे किरायेदार काबिज हैं, जो मामूली किराया भी अदा नहीं कर रहे हैं। प्रशासन ने ऐसे किरायेदारों को नोटिस जारी कर पूरा किराया वसूल करने के निर्देश दिए हैं।

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