थ्रीडी विविंग तकनीक के जरिये यूपीटीटीआइ तैयार कर रहा फर्नीचर, गिरने पर टूटेंगे भी नहीं

थ्रीडी विविंग तकनीक के जरिये यूपीटीटीआइ तैयार कर रहा फर्नीचर, गिरने पर टूटेंगे भी नहीं

घर में आग लगने के बाद सबसे ज्यादा नुकसान फर्नीचर के जलने से होता है लेकिन अब एक ऐसा फर्नीचर तैयार किया जा रहा है, जो आग में नहीं जलेगा। आने वाले समय में प्लास्टिक की जगह ऐसे टेक्सटाइल कंपोजिट मैटेरियल की कुर्सी, मेज व फ्रिज तैयार किए जाएंगे, जिनका आग कुछ नहीं बिगाड़ पाएगी। ये उपकरण गिरने पर क्षतिग्रस्त भी नहीं होंगे। इन्हें तैयार करने के लिए उत्तर प्रदेश वस्त्र एवं प्रौद्योगिकी संस्थान (यूपीटीटीआइ) थ्रीडी विविंग तकनीक के जरिये शोध कर रहा है।

यूपीटीटीआई के निदेशक प्रो. मुकेश कुमार सिंह व डा. सुभांकर मेहती के मुताबिक इस प्रोजेक्ट के लिए डा. एपीजे अब्दुल कलाम प्राविधिक विश्वविद्यालय (एकेटीयू)व टेक्निकल एजुकेशन क्वालिटी इंप्रूवमेंट प्रोग्राम (टेक्यूप) ने दस-दस करोड़ रुपये का अनुदान दिया है। एकेटीयू का 6.74 करोड़ अनुदान इमारत व आधुनिक प्रयोगशाला के निर्माण में खर्च हुआ जबकि 3.26 करोड़ इस प्रोजेक्ट के लिए रखे गए हैं, जबकि टेक्यूप का दस करोड़ रुपये अभी खर्च होना बाकी है। प्रो. मुकेश कुमार ने बताया कि इस अनुसंधान को पूरा करने के लिए बजट पर्याप्त है। संस्थान से प्रोजेक्ट पास होने के बाद अब इसे विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग भेजे जाने की तैयारी है।

हाई प्रोफाइल फाइबर का होगा इस्तेमाल

प्रो. मुकेश सिंह ने बताया कि टेक्सटाइल कंपोजिट बनाने के लिए नोमैक्स, केवलर, स्पोंडेक्स, डायनमा व स्पैक्ट्रा जैसे हाईपावर फाइबर का इस्तेमाल किया जाएगा। यह ऐसे हाईपावर फाइबर होते हैं जिनसे ऐसी वस्तु तैयार की जा सकती है जो 600 से 700 डिग्री सेल्सियस तापमान झेल सके। कुर्सी, मेज, फ्रिज व कूलर समेत अन्य घरेलू वस्तुओं के पार्ट बनाने के साथ बस व ट्रेन में इस्तेमाल की जाने वाली प्लास्टिक के रूप में भी इसका प्रयोग किया जा सकता है।

पर्यावरण के भी मित्र

प्रो. मुकेश के मुताबिक यह टेक्सटाइल कंपोजिट पर्यावरण के लिए भी मित्र होगी। प्लास्टिक मुख्य रूप से पेट्रोलियम पदार्थों से उत्सर्जित सिंथेटिक रेजिन से बना होता है। रेजिन को प्लास्टिक मोनोमर्स अमोनिया और बेंजीन का संयोजन करके बनाया जाता है। इसमें क्लोरीन, फ्लोरीन, कार्बन, हाइड्रोजन, नाइट्रोजन, ऑक्सीजन और सल्फर के अणु शामिल होते हैं। प्लास्टिक जलने व इधर उधर फेंके जाने से नुकसान पहुंचाती है जबकि ये कंपोजिट पूरी तरह सुरक्षित होता है।

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