महागठबंधन में हफ्ते भर में तैयार हो जाएगा सीट बंटवारे का फार्मूला

महागठबंधन में हफ्ते भर में तैयार हो जाएगा सीट बंटवारे का फार्मूला

पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों के नतीजों से पर्दा उठने के साथ ही महागठबंधन में सीट बंटवारे की कवायद तेज हो गई है। रालोसपा प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा के राजग और सत्ता से मोहभंग होने के बाद महागठबंधन की धुंध लगभग छंट चुकी है।

 

मुकेश अंबानी की बेटी की शादी से लौटते ही नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव की नई दिल्ली में वरिष्ठ कांग्र्रेसी नेता अहमद पटेल से मुलाकात संभव है। इधर, समन्वय समिति के गठन की रूपरेखा तय कर ली गई है। सबकुछ पटरी पर रहा तो हफ्ते भर के भीतर महागठबंधन में सीट बंटवारे की गुत्थी सुलझा ली जाएगी। 

राजद-कांग्रेस को लंबे समय से कुशवाहा के अगले कदम का इंतजार था। शरद यादव के रांची में राजद प्रमुख लालू प्रसाद से मुलाकात के बाद से माना जा रहा था कि अगले कुछ दिनों में कुशवाहा को लेकर महागठबंधन में नए अध्याय की शुरुआत हो जाएगी। इसके अतिरिक्त समन्वय समिति के गठन की प्रक्रिया और सीट बंटवारे के सर्वसम्मत फार्मूले की भी तलाश थी, लेकिन सबकुछ पांच राज्यों में चुनाव की व्यस्तता के कारण टलता रहा था। 

चुनाव परिणाम के साथ ही महागठबंधन के प्रमुख दलों ने एक-एक कर सभी मसले के सर्वसम्मत समाधान की तलाश तेज कर दी है। सूचना है कि समन्वय समिति का गठन कर लिया गया है। हम के राष्ट्रीय प्रवक्ता दानिश रिजवान ने इसकी पुष्टि की है। बस घोषणा का इंतजार है। 

उधर, नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने दिल्ली में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी से भी सीटों पर तालमेल की पहल शीघ्र करने का आग्र्रह किया है। राजद चाहता है कि महागठबंधन के सहयोगी दलों की हवा में दावेदारी नहीं हो। पहले एक-एक सीट का आकलन कर लिया जाए। उसके बाद वहां हैसियत और हक के आधार पर बंटवारा हो।

राष्ट्रीय स्तर पर बड़ी पार्टी के रूप में कांग्रेस की महत्ता को राजद स्वीकार करता है। किंतु मजबूत क्षेत्रीय दल होने के नाते अपनी ड्राइविंग सीट से भी समझौता करने के पक्ष में नहीं है। राज्य में अन्य दलों को शामिल करने, मुद्दे और निर्णय में अपनी अहम भूमिका को बरकरार रखेगा। 

राजद के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष शिवानंद तिवारी के मुताबिक एक-एक सीट की समीक्षा की जा रही है। हमारा लक्ष्य महज चुनाव लडऩा नहीं है, जीतना भी है। इसलिए हम संख्या में ही नहीं उलझे हैं, संभावनाएं भी टटोल रहे हैं। पांच राज्यों के नतीजों ने हमारी संभावनाओं को व्यापक कर दिया है। 

मांझी की मंशा पर कुशवाहा का पेंच 

महगठबंधन में राजद-कांग्र्रेस दो बड़े खिलाड़ी हैं। कुशवाहा के आगमन पर दोनों के हिस्से की सीटों में कमी आ सकती है। कुशवाहा पांच सीटें चाह रहे। जीतनराम मांझी को भी दो से कम नहीं चाहिए। कुशवाहा को पांच मिलेंगी तो मांझी भी मचल सकते हैं। आखिर वह भी खुद को अहम सहयोगी मानते हैं।

शरद यादव की अपेक्षा भी इतनी ही है। उनके साथ भी कुछ अहम सहयोगी हैं। भाकपा, माकपा और माले को भी कम से कम एक-एक सीट चाहिए। सबको ले-देकर राजद-कांग्र्रेस के लिए 28 सीटें ही बचेंगी, जिनके बीच 18-10 के फार्मूले पर बात हो सकती है। 

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