बैंकों की हड़ताल से बढ़ी लोगों की मुसीबतें

बैंकों की हड़ताल से बढ़ी लोगों की मुसीबतें

बैंकों की हड़ताल से आम जन को कर्इ तरह की दिक्कतें पेश आई। लेन-देन भी बुरी तरह से प्रभावित हो रहा है। दरअसल, यूनाइटेड यूनियन ऑफ बैंक इंप्लायज के बैनर तले सभी राष्ट्रीयकृत बैंकों के अधिकारी और कर्मचारी देशव्यापी हड़ताल पर रहे। एसबीआइ, पीएनबी, केनरा समेत अन्य सभी बैंक बंद हैं। कर्नाटक, नैनीताल समेत कई अन्य निजी बैंको ने भी हड़ताल को समर्थन दिया। इस दौरान अधिकारी कर्मचारियों ने जमकर प्रदर्शन भी किया।

यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियन के बैनर तले सभी अधिकारी और कर्मचारी संगठन अपनी मांगों को लेकर बुधवार को हड़ताल पर हैं। यूनियन की ओर से बैंक ऑफ बड़ौदा में देना बैंक और विजया बैंक के विलय का विरोध किया जा रहा है। यूनाइटेड यूनियन के सदस्य जगमोहन मेंदीरत्ता ने बताया कि सिर्फ कॉर्पोरेटिव बैंक हड़ताल से बाहर रहेंगे। उन्होंने कहा कि यूनियन केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ है। इससे बैंक की आर्थिक स्वायत्तता एवं मजबूती प्रभावित होगी।

करोड़ों का कारोबार प्रभावित 

देहरादून में यूनाइटेड यूनियन ऑफ बैंक इंप्लायज के बैनर तले बैंकों के अधिकारियों और कर्मचारियों ने जुलूस निकाला और परेड ग्राउंड में केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया। वहीं, ऋषिकेश में भी सभी बैंकों में हड़ताल रही। बैंकों की हड़ताल के चलते  यहां करीब 150 करोड़ रुपये का कारोबार प्रभावित हुआ।

गौरतलब है कि इसी मुद्दे को लेकर 21 दिसंबर को भी बैंकों में हड़ताल रही थी। बैंक अधिकारी और कर्मचारियों ने हड़ताल कर रेलवे रोड स्थित भारतीय स्टेट बैंक के सामने सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। हड़ताल से जुड़े सभी अधिकारी और कर्मचारियों ने सरकार के रवैये पर कड़ी नाराजगी जताई। अखिल भारतीय बैंक अधिकारी संघ के ऋषिकेश केंद्र के प्रतिनिधि महेश चितकारिया ने बताया कि न्यूतम वेतन, एनपीए वसूली, नई पेंशन योजना को समाप्त करना, पारिवारिक पेंशन में सुधार और बैंकों में नई भर्ती हेतु, स्टाफ की अत्यधिक कमी के मुद्दे जैसी मांगों पर हड़ताल पर रहे।

सरकार ने नहीं उठाया कदम तो आंदोलन होगा तेज 

वेतन विसंगति और बैंकों के विलय के विरोध में की गर्इ एक दिवसीय हड़ताल के चलते रुड़की शहर के अधिकांश बैंक बंद रहे। सिर्फ निजी बैंकों में कामकाज हुआ। हड़ताली कर्मचारियों ने सिविल लाइन स्थित भारतीय स्टेट बैंक की मुख्य शाखा पर एकत्र होकर प्रदर्शन किया और केंद्र सरकार पर बैंकों की स्वायत्तता को समाप्त करने का आरोप लगाया। हड़ताली कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि सरकार बैंक कर्मचारियों की लगातार उपेक्षा कर रही है। जिसकी वजह से उन्हें मजबूरी में हड़ताल करनी पड़ रही है। अगर सरकार ने जल्द कोई कदम नहीं उठाया तो आंदोलन को तेज किया जाएगा।

 

कुमाऊं में भी बैंकों की हड़ताल के चलते आम जन बेहद परेशान रहा। नैनीताल में भी बैंकों में ताले लटके नजर आए। शहर के राष्ट्रीकृत और अन्य बैंकों की 30 से अधिक शाखाओं के अधिकारी कर्मचारी हड़ताल पर रहे। एक अनुमान के अनुसार नैनीताल में बैंक हड़ताल से करीब 50 करोड़ का कारोबार प्रभावित होना तय है।

You Might Also Like