घाटी में आईएसआईएस की बढ़ती घुसपैठ ने सुरक्षाबलों के साथ हुर्रियत की चिंता भी बढ़ाई

घाटी में आईएसआईएस की बढ़ती घुसपैठ ने सुरक्षाबलों के साथ हुर्रियत की चिंता भी बढ़ाई

2018 में सुरक्षाबलों ने कश्मीर में आतंकवाद की जड़ों को हिला दिया. करीब 276 आतंकी पिछले वर्ष में मारे गए. लेकिन इस बीच जो एक नई चुनौती सुरक्षा एजेंसियों के लिए खड़ी हुई है वह है आईएसआईएस की घाटी में तेजी बढ़ती मौजूदगी. इसकी जड़ें घाटी में मज़बूत करने की पूरी कोशिश की जा रही है. ऐसे में जम्मू और कश्मीर में सुरक्षाबल अब ‘कट्टरपंथी’ युवाओं और उनके आकाओं की गतिविधियों पर कड़ी नजर रख रहे हैं. ताकि उन्हें आतंकवाद की श्रेणी में शामिल होने से रोका जा सके. 

पुलिस भी यह मानती है की घाटी में ऐसी विचारधार को फैलाने के लिए कुछ तत्व कोशिश में लगे हैं. लेकिन पुलिस नहीं मान रही है कि इस विचारधार से जुड़े आतंकी संगठन आईएसआईएस की पकड़ कश्मीर में मज़बूत है. राज्य के डीजीपी दिलबाग सिंह के मुताबिक, “कश्मीर में आईएसआईएस की मौजूदगी ज्यादा नहीं है. हालांकि युवाओं के एक वर्ग को इस विचाधारा के साथ जोड़ने की पूरी कोशिश हो रही है.”

आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, “2018 में राज्य में 170 से अधिक स्थानीय युवा आतंकवाद में शामिल हो गए. इनमें ज्यादातर युवा पढ़े-लिखे थे जो इंटरनेट के जरिए इस्लामिक स्टेट के प्रचार से प्रभावित होकर इस रस्ते पर निकल पड़े. हालाँकि सुरक्षबलों ने कई आतंकी मॉड्यूल का भंडाफोड़ किया है और आतंकवादियों के सुरक्षित ठिकानों से भारी मात्रा में हथियार और गोला-बारूद के साथ साथ इस विचारधारा का लिटरेचर भी बरामद किया है. यही कारण है कि कश्मीर घाटी में स्थानीय आतंकवादियों के मारे जाने के बाद विरोध प्रदर्शन भड़क उठता है. यह भी सुरक्षा बलों के लिए ‘सिरदर्द’ बन गए हैं.”

यह विचारधार केवल सुरक्षाबलों के लिए ही चिंता नहीं है. अब इसे कश्मीर के अलगाववादी भी चिंतित दिख रहे हैं. पहले तो अलगाववादियों को आतंकी संगठन अंसार-उल-गज़्वातुल हिन्द ने खुलेआम धमकी दी थी. फिर श्रीनगर और पुलवामा में आईएसआईएस के झंडे खुलेआम प्रदर्शित होते दिखे. श्रीनगर की ऐतिहासिक जामिया मस्जिद के बहार हर जुमा की नमाज़ के बाद यह झंडे दिखने लगे. मगर कुछ दिन पहले कुछ नकाबपोश युवाओं ने जुमा के दिन मस्जिद के भीतर घुसकर उस जगह से यह झंडे लहराए जहाँ से हुर्रियत नेता मीरवाइज़ उमर फ़ारूक़ हर जुमा को खुत्बा देते हैं. इस घटना के बाद अलगाववादी नेतओं और उनके समर्थकों में हड़कम मच गया.

कश्मीर की सिविल सोसायटी और सभी अलगाववादी नेताओं ने इस घटना की निंदा की. यहां तक के पहली बार ऐसा देखने को मिला की अलगाववादियों ने आईएसआईएस का विरोध खुलकर किया. मीरवाइज़ ने श्रीनगर के डाउनटाउन में आईएसआईएस के खिलफ प्रदर्शन रैली भी निकाली. मीरवाइज़ ने कहा कि “जो हज़ारों कुर्बानियां दी गई हैं उन कुर्बानियों को डाइवर्ट करने के लिए कुछ लोग ग्लोबल एजेंडा लेकर जम्मू कश्मीर की तहरीक को हाईजेक करने की कोशिश कर रहे हैं और हम ऐसा नहीं होने देंगे.”

एक पुलिस अधिकारी के मुताबिक “चिंता का विषय यह भी है कि यह तत्व सुरक्षाबलों द्वारा मारे गए आतंकवादियों के अंतिम संस्कार के जुलूस में जमा भारी भीड़ में इस कट्टरपंथी विचारधारा को फैलाने का प्रयास करते रहते हैं. इन कट्टरपंथी युवाओं की गतिविधियों पर नज़र रखी जा रही है. बताया जा रहा है कि इन घटनाओं को अंजाम देने के लिए उनके हैंडलर्स द्वारा इन तत्वों को आदेश दिया जाता है. पुलिस के मुताबिक आतंकवाद और आतंकियों से लड़ने में हम पूरी तरह सक्षम हैं.

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