रेणुका बहुउद्देशीय परियोजना पर छह राज्यों का केंद्र सरकार से करार

रेणुका बहुउद्देशीय परियोजना पर छह राज्यों का केंद्र सरकार से करार

केंद्रीय जल संसाधन मंत्री नितिन गडकरी की उपस्थिति में शुक्रवार को दिल्ली में उत्तराखंड समेत छह राज्यों के मुख्यमंत्रियों के बीच रेणुका बहुउद्देशीय परियोजना के निर्माण के लिए एमओयू पर हस्ताक्षर किए गए।

रेणुका परियोजना निर्माण के बाद हरियाणा, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, राजस्थान, हिमाचल प्रदेश और दिल्ली को समझौते के अनुसार निर्धारित मात्रा में पानी मिलेगा। इसमें उत्तराखंड राज्य को 19.72 एम.सी.एम (कुल जल का 3.81 प्रतिशत) जल सिंचाई, घरेलू व औद्योगिक उपयोग हेतु मिलेगा।

परियोजना से संग्रहित जल बंटवारे के अतिरिक्त अन्य लाभ हिमाचल प्रदेश को होगा। उत्तराखंड राज्य की ओर से जल घटक के सापेक्ष कुल 16.50 करोड़ की शेयर धनराशि दो किश्तों में देय होगी।

दिल्ली में एमओयू पर हस्ताक्षर करने के लिए शुक्रवार को उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ, हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर, राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल व हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर मौजूद थे।

रेणुका परियोजना (40 मेगावाट) हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जनपद के गिरी नदी में स्थित बहुउद्देशीय परियोजना है। इस परियोजना में 148 मीटर ऊंचा रॉक फिल बांध प्रस्तावित है। परियोजना की कुल लागत 4596.76 करोड़ रुपये है। इस परियोजना के जलाशय में 514.32 एम.सी.एम जल का संग्रहण किया जा सकेगा। परियोजना को वर्ष 2008 में राष्ट्रीय परियोजना घोषित किया गया था। ऐसे में परियोजना के जल घटक का 90 प्रतिशत अनुदान केंद्र सरकार के स्तर पर दिया जाना है। इस परियोजना का निर्माण, परिचालन और अनुरक्षण हिमाचल प्रदेश पावर कारपोरेशन लि. करेगा। 
वर्ष 1994 में परियोजना से मिलने वाले जल के बंटवारे हेतु हरियाणा, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, हिमाचल प्रदेश एवं दिल्ली के मध्य अनुबंध हस्ताक्षरित किया गया था। इसके बाद ऊपरी यमुना नदी में प्रस्तावित विभिन्न परियोजनाओं पर क्रियान्वयन की कार्रवाई सालों से लंबित थी। कतिपय संशोधन कर अपर यमुना रिवर बोर्ड के स्तर पर अप्रैल 2018 में रेणुका बहुउद्देशीय परियोजना के समझौता प्रपत्र सभी लाभान्वित राज्यों को अनुमोदन हेतु प्रेषित किया गया था। इस परियोजना हेतु उत्तराखंड शासन ने 15 अक्टूबर 18 को अपनी अनापत्ति अपर यमुना रिवर बोर्ड को प्रेषित की थी। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि एमओयू होने से रेणुका परियोजना की राह खुल गई है।

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