मौनी अमावस्या पर दूसरा शाही स्नान कल, प्रयागराज में आस्था का रेला

मौनी अमावस्या पर दूसरा शाही स्नान कल, प्रयागराज में आस्था का रेला

संगमनगरी प्रयागराज में कुंभ का दूसरा शाही स्नान कल है। मौनी अमावस्या को लेकर कुंभ नगर में संगम क्षेत्र में आज से ही तिल रखने की जगह नहीं है। भारत के कोने-कोने के साथ ही विश्व के सैकड़ों देशों के लोग यहां पर कल डुबकी लगाने की तैयारी में आए हैं।

आस्था, विश्वास व संस्कृतियों के संगम में तीर्थराज प्रयाग के कुंभ में दूसरे शाही स्नान के मौनी अमावस्या पर्व पर आस्था की डुबकी लगाने वाले श्रद्धालुओं से संगम क्षेत्र ठसाठस भर गया है। न कोई आमंत्रण और न ही किसी तरह का निमंत्रण श्रद्धा से भरपूर श्रद्धालुओं की भीड़ सिर पर गठरी और कंधे पर कमरी रखे धर्म की नगरी में उमड़ पड़ी है। इलाहाबाद जंक्शन के साथ ही अन्य सभी रेलवे स्टेशन पर के साथ ही बस अड्डों से भीड़ कुंभ मेला क्षेत्र की ओर लगातार बढ़ती जा रही है।

इलाहाबाद जंक्शन स्टेशन, सिटी स्टेशन, प्रयाग और प्रयाग घाट स्टेशनों से निकल रही भीड़ का रुख संगम ही है। नैनी और छिवकी एवं झूंसी स्टेशन हो या सिविल लाइंस बस अड्डा हो अथवा नैनी और झूंसी में बनाए गए अस्थायी बस अड्डों पर भी यही दृश्य बने हैं। शहर से लेकर कुंभ मेला के प्रवेश मार्गों तक और फिर मेला क्षेत्र के अंदर तक सिर पर गठरी ही गठरी ही दिखाई दे रही है।

संगम क्षेत्र में आस्था की डुबकी लगाने वाले श्रद्धालुओं में केवल भारतीय ही नहीं बड़ी संख्या में विदेशियों का समूह भी संगम तीरे आध्यात्म का आनंद ले रहा है। कुछ विदेशी त्रिवेणी मार्ग पर पहुंचकर सुरक्षा में लगे पुलिस और अन्य एजेंसियों के जवानों से संगम जाने के लिए रास्ता पूछ रहे हैं। श्रद्धालु अपनों का हाथ पकड़े संगम की तरफ कदम बढ़ाते जा रहे हैं। उनको किसी दीन-दुनिया से लेना देना नहीं बल्कि वह संगम तीरे पहुंचने का रास्ता पूछते आगे बढते जा रहे हैं। यहां तो संगम क्षेत्र में पुलिया, पेड़ और खुले अम्बर के नीचे आशियाना बनाये हुए हैं। उनका लक्ष्य पतित पावनी गंगा, श्यामल यमुना और अदृश्य सरस्वती में आस्था की डुबकी लगाकर पुण्य प्राप्त करना है।

इस बार प्रयागराज कुंभ में आस्था और अध्यात्म के साथ आधुनिकता का भी संगम हो रहा है। भव्य और दिव्य कुंभ में काफी कुछ बदला है। नहीं बदली तो वह गठरी, जो मेले की रौनक है। श्रद्धालुओं का रेला त्रिवेणी में गोता लगाने के लिए पांच से सात किलोमीटर की दूरी पैदल कर संगम पहुंच रहा है। यहां चारों ओर आस्था का रेला नजर आ रहा है। परेड में काली सड़क हो या फिर लाल सड़क। शहर की सड़कों से लेकर मेला तक में मौनी अमावस्या पर आस्था का ऐसा जमघट लगने लगा है कि कुंभ की और दिव्यता चारों ओर निखरने लगी। गठरी लिए इन श्रद्धालुओं को न तो किसी व्यवस्था से मतलब होता है और न ही रोशनी से। अगाध आस्था में डूबे गठरी वाले श्रद्धालु पावन संगम पहुंच रहे हैं।

फाफामऊ से अरैल के बीच 3200 हैक्टेअर में बसे मेले में आवागमन के लिए बनाए गए सभी 22 पांटून पुलों पर लंबी कतारें सुबह से ही देखने को मिल रही है। शिविरों से लेकर संगम की रेती तक हरतरफ श्रद्धालुओं का तांता नजर आने लगा है। कल तड़के मौनी अमावस्या पर देश-दुनिया के श्रद्धालु पुण्य की डुबकी लगाएंगे। इसको लेकर संगमनगरी प्रयागराज का कुंभ नगर तैयार है।

प्रयाग रेलवे स्टेशन फुल

प्रयागराज कुंभ में मौनी अमावस्या पर स्नान के लिए प्रयाग रेलवे स्टेशन पर श्रद्धालुओं की भीड़ से स्टेशन फुल हो गया। मेला में भी भीड़ उमड़ पड़ी है। पांटून पुल पर लोग रेंगते हुए चल रहे हैं। ओवर क्राउड होने से डीएम एसएसपी माइक लेकर व्यवस्था बनाने के लिए स्वयं अनाउंसमेंट कर रहे हैं। संगम के निकट के पांटून पुल पर आवागमन बन्द कर दिया गया है, ताकि भीड़ मुड़कर दूरी ओर जाय। सोमवार को मौनी अमावस्या स्नान है। अखाड़ों का दूसरा शाही स्नान भी होगा।

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