विधानसभा के बाद लोकसभा में भी परिवारवाद की राह चुन सकती है कांग्रेस

विधानसभा के बाद लोकसभा में भी परिवारवाद की राह चुन सकती है कांग्रेस

लोकसभा चुनाव में राजस्थान की 25 सीटों के लिए अभी कांग्रेस ने नाम तय नहीं किए हैं लेकिन विधानसभा चुनाव की तर्ज पर पैनल में परिवारवाद का असर देखा जा सकता है. लोकसभा चुनाव में करीब एक दर्जन ऐसे नेताओं के नाम पैनल में है जिनके परिजन और रिश्तेदार राजनीति में सक्रिय तौर पर काम कर रहे हैं. 

हाल ही में कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी की बहन प्रियंका गांधी वाड्रा को पार्टी में महासचिव की बड़ी और महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी गई. साथ ही यूपी का प्रभार भी दिया गया. इस नियुक्ति के साथ कांग्रेस पर एक बार फिर से परिवारवाद का आरोप लगा. बीजेपी नेताओं की तरफ से बयान बाजी हुई कि कांग्रेस केवल एक ही परिवार की पार्टी है. ऐसा नहीं है कि कांग्रेस में केवल उच्च स्तर पर ही परिवारवाद है बल्कि प्रदेश संभाग और जिला स्तर पर भी परिवारवाद बेहद हावी है.

विधानसभा चुनाव में टिकट वितरण में दोनों ही दलों में परिवारवाद का असर देखा गया और लोकसभा चुनाव में एक बार फिर से कांग्रेस में एक दर्जन ऐसा नेता हैं जो अपने पुत्र पुत्री और सरदार को टिकट दिलाने की लॉबिंग में लगे हैं. इनमें मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के पुत्र से लेकर मंत्रियों और विधायकों के परिजनों के नाम शामिल है. जिला प्रभारियों की रिपोर्ट और फीडबैक कार्यक्रम में मंत्रियों और विधायकों के बेटे-बेटियों और रिश्तेदारों के नाम दावेदारी में सामने आए हैं. सियासत में कोई सा भी राजनीतिक दल हो, सभी में परिवारवाद का बोलबाला है.

विधानसभा चुनाव में कांग्रेस पार्टी में डेढ़ दर्जन से ज्यादा नेताओं ने अपने पुत्र-पुत्रियों और निकटतम रिश्तेदारों को टिकट दिलाए थे. अब 2 माह बाद होने जा रहे लोकसभा चुनाव में भी परिवारवाद की छाया दिखाई देने लगी है. हैरत की बात तो ये है कि जिन नेताओं ने अपने बेटे-बेटियों की लोकसभा के टिकट के लिए दावेदारी की है. उन नेताओं में कई तो राज्य मंत्रिमंडल के सदस्य हैं और कई विधायक हैं. यहां तक कि मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के पुत्र वैभव गहलोत भी जालोर-सिरोही से लोकसभा का टिकट मांग रहे हैं. यहीं नहीं नेता अपने रिश्तेदारों को टिकट दिलाने के लिए दिल्ली तक दौड़ लगा रहे हैं. परिवारवाद के सवाल पर कांग्रेस के नेताओं का मानना है कि टिकट योग्यता और जनाधार के हिसाब से ही मिलती है ऐसे में ये आरोप निराधार है.

इन नेताओं के पुत्र-पुत्री और रिश्तेदार मांग रहे टिकट
– मुख्यमंत्री अशोक गहलोत साफ कर चुके हैं कि उनके पुत्र वैभव गहलोत अब राजनीति में आना चाहें तो आ सकते हैं. मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के पुत्र वैभव गहलोत पार्टी में महासचिव हैं और जालौर सिरोही और टोंक सवाई माधोपुर लोकसभा सीट से चुनाव लड़ सकते हैं.

– अशोक गहलोत के बेहद करीबी नेता और विधान सभा में मुख्य सचेतक महेश जोशी अपने पुत्र रोहित जोशी को भी राजनीति  में लाना चाहते हैं महेश जोशी रोहित जोशी के लिए जयपुर लोकसभा सीट से टिकट मांग रहे हैं जयपुर लोकसभा सीट पर महेश जोशी खुद सांसद भी रह चुके हैं.

– वर्तमान कांग्रेस सरकार में मंत्री परसादी लाल मीणा अपने पुत्र कमल मीना के लिए दौसा लोकसभा सीट से दूसरे मंत्री प्रमोद जैन भाया अपनी पत्नी उर्मिला जैन के लिए झालावाड़, 12 एक अन्य मंत्री शांति धारीवाल अपनी पुत्रवधू एकता धारीवाल के लिए कोटा परसादी लाल बूंदी लोकसभा सीट से टिकट की जुगत कर रहे हैं.

– विधायक मोरे लाल मीणा अपनी पत्नी सविता के लिए दोसा से टिकट मांग रहे हैं.

– शेखावाटी में कांग्रेस के क्षत्रप नेता शीशराम ओला के पुत्र विधायक बृजेंद्र ओला पत्नी राजबाला के लिए झुंझुनू लोकसभा सीट से टिकट की दावेदारी कर रहे हैं.

– नवलगढ़ से वर्तमान विधायक राजकुमार शर्मा के भाई राजपाल शर्मा जयपुर लोकसभा सीट से हरेंद्र मिर्धा के पुत्र राघवेंद्र मिर्धा  नागौर लोकसभा सीट से, खेमराज कटारा के पुत्र विवेक कटारा उदयपुर लोकसभा सीट से और जसवंत सिंह के पुत्र मानवेंद्र सिंह बाड़मेर से लोकसभा चुनाव लड़ना चाहते हैं.

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