पाकिस्‍तान की नई चाल, हाफिज सईद के आतंकी संगठन के 2 नए फ्रंट बनाए

पाकिस्‍तान की नई चाल, हाफिज सईद के आतंकी संगठन के 2 नए फ्रंट बनाए

आतंकवाद फैलाने को लेकर वैश्विक दबाव झेल रहे पाकिस्‍तान ने एक बार फिर नई चाल चली है. भारतीय खुफिया एजेंसियों के मुताबिक पाकिस्‍तान ने आतंकी हाफिज सईद के आतंकी संगठन जमात-उद-दावा (जेयूडी) के दो नए फ्रंट बनाए हैं. एजेंसियों के अनुसार पाकिस्‍तान ने ऐसा दुनिया की नजरों से जमात-उद दावा को बचाने के लिए किया है. एजेंसियों के मुताबिक ऐसा पाकिस्‍तान की इंटेलीजेंस एजेंसी आईएसआई के इशारे पर किया गया है.

पाकिस्‍तान ने जमात-उद दावा के जो दो नए फ्रंट बनाए हैं, उनका नाम जम्‍मू-कश्‍मीर मूवमेंट और रेस्‍क्‍यू, रिलीफ एंड एजुकेशन फाउंडेशन है. पाकिस्‍तान की नई चाल के मुताबिक जम्‍मू-कश्‍मीर मूवमेंट को जेयूडी की जिम्मेदारी दी गई है. वहीं रेस्‍क्‍यू, रिलीफ एंड एजुकेशन फाउंडेशन को फलाह-ए इंसानियत फाउंडेशन यानि एफआईएफ से जुड़े काम को देखने को कहा गया है.

इन दोनों संगठनों के नाम इस तरीके से रखे गए हैं जिससे दुनिया को यह लगे कि यह कोई चैरिटी संस्था है. इन चैरिटी संस्‍थाओं के नाम पर पाकिस्तान दुनिया के कई देशों से इकट्ठे किए गए पैसे को भारत के खिलाफ आतंकी गतिविधियों में लगाया जाएगा.

बता दें कि पाकिस्तान ने 2008 मुंबई हमले के मास्टरमाइंड हाफिज सईद के नेतृत्व वाले जमात-उद-दावा और उसकी परमार्थ संस्था फलह-ए-इंसानियत फाउंडेशन पर गुरुवार को प्रतिबंध लगाने का दावा किया था. जम्मू-कश्मीर के पुलवामा जिले में हुए आतंकवादी हमले में सीआरपीएफ के 40 जवानों के शहीद होने के बाद पाकिस्तान पर कार्रवाई करने को लेकर लगातार अंतरराष्ट्रीय दबाव बन रहा है.

गृह मंत्रालय के एक प्रवक्ता ने बताया कि प्रधानमंत्री इमरान खान की अध्यक्षता में उनके कार्यालय में गुरुवार को हुई राष्ट्रीय सुरक्षा समिति की बैठक में इन संगठनों पर प्रतिबंध लगाने का फैसला लिया गया. प्रवक्ता ने एक बयान में कहा था, ‘‘गैरकानूनी करार दिए गए संगठनों के खिलाफ कार्रवाई तेज करने का फैसला बैठक में लिया गया.’’ उन्होंने कहा था, ‘‘यह तय किया गया कि गृह मंत्रालय द्वारा जमात-उद-दावा और फलह-ए-इंसानियत फाउंडेशन को गैरकानूनी घोषित किया जाए.’’ इससे पहले गृह मंत्रालय ने दोनों संगठनों को निगरानी सूची में रखा था.

अधिकारियों के अनुसार, जेयूडी के नेटवर्क में 300 मदरसे और स्कूल, अस्पताल, एक प्रकाशन और एम्बुलेंस सेवा शामिल हैं. दोनों समूहों के पास करीब 50,000 स्वयंसेवक और सैकड़ों की संख्या में वेतनभोगी कर्मचारी हैं.

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