लखनऊ यूनिवर्सिटी का बर्खास्त बाबू चला रहा था फर्जी मार्कशीट रैकेट, पुलिस ने दबोच किया खुलासा

लखनऊ यूनिवर्सिटी का बर्खास्त बाबू चला रहा था फर्जी मार्कशीट रैकेट, पुलिस ने दबोच किया खुलासा

लखनऊ समेत अन्य विश्वविद्यालयों की फर्जी मार्कशीट बनाने वाले गिरोह का खुलासा करते हुए हसनगंज पुलिस ने छह आरोपियों को गिरफ्तार किया है। हत्थे चढ़े आरोपियों में लखनऊ यूविवर्सिटी का बर्खास्त बाबू भी शामिल है। पुलिस के अनुसार बाबू ही गिरोह का सरगना है। आरोपी अलग-अलग विश्वविद्यालयों में प्रवेश का झांसा देकर कई लोगों को चपत लगा चुके हैं। आरोपियों के पास से कई विश्वविद्यालयों की फर्जी मार्कशीट, स्कैनर, लैपटॉप व अन्य सामान बरामद हुआ है। गिरोह के तार लखनऊ विश्वविद्यालय समेत कई विश्विद्यालय के कर्मचारियों से जुड़े होने की भी आशंका है।

जानकीपुरम के सेक्टर-एफ निवासी सौरभ ने वर्ष 2018 में लखनऊ विश्वविद्यालय से एलएलबी का फॉर्म भरा था। हालांकि ऐडमिशन नहीं हो सका। इस दौरान परिचित के घर ट्यूशन पढ़ाने वाले इंदिरानगर निवासी दीवान सिंह ने मैनेजमेंट कोटे से प्रवेश दिलवाने का झांसा दिया। इसके बदले 50 हजार रुपये ऐंठ लिए। इतना ही नहीं परीक्षा में किसी और को बैठाकर पास करवाने का झांसा दिया। फर्स्ट सेमेस्टर का परीक्षा परिणाम आने पर पास होने की मार्कशीट भी दिखाई थी। इसके बाद सौरभ सोमवार को फीस जमा करने लखनऊ विश्वविद्यालय पहुंचा। पता चला कि प्रवेश ही नहीं हुआ है और मार्कशीट फर्जी है। इसके बाद पीड़ित ने हसनगंज कोतवाली में रिपोर्ट दर्ज करवाई थी। पूरे फर्जीवाड़े में लखनऊ विश्वविद्यालय के कुछ कर्मचारियों के शामिल होने का आरोप भी लगाया था।

सीओ महानगर संतोष सिंह के मुताबिक छानबीन के बाद फर्जी मार्कशीट बनाने के आरोप में इंदिरानगर निवासी दीवान सिंह, गुडम्बा निवासी खिरोधन उर्फ गंगेश, बाराबंकी निवासी रविन्द्र प्रताप सिंह, मड़ियांव निवासी दीपक तिवारी, ठाकुरगंज निवासी नायब हुसैन और हसनगंज निवासी मधुरेन्द्र पांडेय को गिरफ्तार कर लिया गया। पकड़े गए आरोपियों के पास से अलग-अलग विश्वविद्यालयों की 14 फर्जी मार्कशीट, 6 ब्ल्यू ट्यूबलेशन चार्ट, कंट्रोलर ऑफ एग्जामिनेशन के नाम के लिफाफे, परीक्षा नियंत्रक का लेटर पैड, लखनऊ विश्वविद्यालय के मोनोग्राम वाली सादी मार्कशीट, लैपटॉप और स्कैनर बरामद हुआ है। पुलिस के मुताबिक, गंगेश ही गिरोह का सरगना है। सीओ के अनुसार फर्जी मार्कशीट बनाने के मामले में ही गंगेश को 2009 में लखनऊ विश्वविद्यालय से बर्खास्त किया गया था। विकासनगर थाने में गंगेश के खिलाफ धोखाधड़ी समेत अन्य धाराओं में रिपोर्ट दर्ज करवाई गई थी और गैंगस्टर ऐक्ट की कार्रवाई भी हुई थी।

नंबर बढ़वाने का भी चल रहा खेल
इंस्पेक्टर हसनगंज धीरज कुमार शुक्ला के अनुसार गंगेश का संपर्क लखनऊ विश्वविद्यालय, कानपुर विवि, दिल्ली विवि, अवध विवि समेत कई विवि के कर्मचारियों से हैं। पूरे गोरखधंधे में लखनऊ विश्वविद्यालय के कुछ कर्मचारियों की भूमिका भी शक के दायरे में है। लखनऊ विश्वविद्यालय के सूत्रों के अनुसार, गंगेश अक्सर लखनऊ यूनिवर्सिटी में ही रहता है और कई कर्मचारियों के साथ उठना-बैठना है। बर्खास्तगी के बाद भी उसके लविविलखनऊ यूनिवर्सिटी में रहने के पीछे भी मार्कशीट और ऐडमिशन के नाम पर होने वाला खेल माना जा रहा है। पुलिस के अनुसार गंगेश किसी भी विवि के स्टूडेंट के नंबर बढ़वाने का भी दावा करता था।

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