जानें कब है सावन शिवरात्रि, क्या है पूजा विधि, महत्व और शुभ मुहूर्त

श्रावण मास का हिंदू धर्म में विशेष महत्व माना जाता है. दरअसल श्रावण मास में शुभ सोमवार और सावन शिवरात्रि दोनों का संयोग रहता है. इस बार सावन शिवरात्रि 30 जुलाई को मंगलवार को आ रही है. ऐसे में जानिए किस विधि से भागवान शिव पूजा करने से आपकी मनचाही इच्छा पूरी हो सकती है. साथ ही सावन शिवरात्रि का महत्व और शुभ मुहूर्त क्या है.

नई दिल्ली. : हिंदू धर्म में श्रावण मास साल के सभी मास में से अधिक महत्वपूर्ण और पावन माना जाना जाता है. सावन मास में चारों ओर भगवान शिव की आराधना का संगम बहता रहता है. दरअसल श्रावण मास में शुभ सोमवार और सावन शिवरात्रि आती है, जिसका हिंदू धर्म में विशेष महत्व है. माना जाता है कि श्रावण मास में भगवान शिव शंकर की विधि विधान से पूजा करने से सभी कष्ट दूर होकर जीवन में खुशियों का आगमन होता है और हर इच्छा पूरी होती है. ऐसे में हम आपको बताने जा रहे हैं कि इस बार श्रावण मास में सावन शिवरात्रि कब है. साथ ही सावन शिवरात्रि का महत्व, पूजा-विधि और किस शुभ मुहूर्त में शिव की उपासना करें.

जानें कब है सावन शिवरात्रि और शुभ मुहूर्त-

श्रावण मास में पड़ने वाली शिवरात्रि को सावन शिवरात्रि कहा जाता है. इस बार सावन शिवरात्रि 30 जुलाई को मंगलवार को है. शास्त्रों के अनुसार सावन शिवरात्रि पर भगवान शंकर को जल चढ़ाने से वे काफी खुश होते हैं और अपने भक्त की इच्छा का पूरा करते हैं. सावन शिवरात्रि के दिन शुभ मुहूर्त सुबह 9:10 बजे से लेकर दोपहर 2:00 बजे तक रहेगा. इस समय में आप भगवान शिव की पूजा और शिवलिंग का जलाभिषेक करें. हालांकि श्रावण मास की तरह सावन शिवरात्रि का पूरा दिन शुभ होता है, ऐसे में आप किसी भी समय भोले भंडारी की आराधना कर सकते हैं.

जानिए सावन शिवरात्रि का महत्व-

 

हिंदू धर्म में लोग श्रावण मास का बड़ी ही बेसब्री से इंतजार करते हैं. गौरतलब है कि साल में 12 शिवरात्रियां, हर माह त्रयोदशी की दिन पड़ती हैं. इन 12 शिवरात्रियों में से फाल्गुन शिवरात्रि और सावन शिवरात्रि का महत्व सबसे अधिक है. बता दें कि फाल्गुन शिवरात्रि को महाशिवरात्रि भी कहा जाता है. पुराणोंरे अनुसार सावन शिवरात्रि पर विधि पूर्वक भगवान शिव के लिए व्रत रख, पूजा करने से जीवन के सभी संकट दूर होते हैं और भगवान शंकर की असीम कृपा आप पर बरसती रहती है. हर क्षेत्र में कामयाबी की प्राप्ती होती है.

 

सावन शिवरात्रि पर किस विधि से करें भगवान शिव की पूजा-

 

तीनों लोक के स्वामी कहे जाने वाले भगवान शिव की पूजा करने के लिए विधि की क्रिया बेहद आसान मानी जानी हैं. ऐसी मान्यता है कि भोले भंडारी का बस सच्चे मन से व्रत रखने और पूजा करने से ही वह प्रसन्न हो जाते हैं. हालांकि भगवान शिव की उपासना के लिए सावन शिवरात्रि पर इस पूजा विधि से आप भगवान शिव को खुश कर सकते हैं.

सावन शिवरात्रि पर सुबह जल्द उठकर नित क्रिया स्नान करने के बाद भगवान शिव के मंदिर जाएं.

मंदिर जाकर बेलपत्र, धतूरा, कच्चे चावल, घी और शहद भगवान शिव को चढ़ाएं.

भोलेनाथ की शिवलिंग के साथ, माता पार्वती, नंदी महाराज का विधि विधान ले जलाभिषेक करें.

इसके बाद धूप-दीप जलाकर भगवान शिव की आराधना करें.

ध्यान रहे सावन शिवरात्रि के दिन काले वस्त्र धारण न करें और न ही खट्टी चीजों का सेवन करें.

शाम को भगवान शंकर की पूजा करने के साथ आरती गाए और दीप जलाने के

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