चीन के राष्ट्रपति जिनपिंग से मिले मोदी, चार महीने में तीसरी मुलाकात

ब्रिक्स देशों के दसवें सम्मेलन में शिरकत करने के क्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बृहस्पतिवार को चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाकात की। दोनों नेताओं ने हाल की दो मुलाकातों के बाद बने अनुकूल माहौल को बनाए रखने पर जोर दिया। दोनों नेताओं की यह तकरीबन चार महीने के अंदर तीसरी मुलाकात है।

इससे पहले दोनों नेताओं के बीच अप्रैल में चीन के वुहान शहर में दो दिवसीय अनौपचारिक सम्मेलन हुआ था। फिर उनकी मुलाकात जून में चीन के ही किंगदाओ में आयोजित शंघाई सहयोग संगठन सम्मेलन से इतर हुई थी। शी के साथ अपनी हाल की मुलाकातों का जिक्र करते हुए मोदी ने कहा कि उन्होंने भारत-चीन संबंधों को एक नई ताकत दी है और दोनों देशों के बीच सहयोग के नए अवसर भी प्रदान किए हैं।

मोदी ने शी से मुलाकात के दौरान कहा कि इस गर्मजोशी को बनाए रखना जरूरी है और इसके लिए हमें अपने स्तर पर नियमित रूप से अपने संबंधों की समीक्षा करनी होगी और जरूरत पड़ने पर उचित निर्देश भी जारी करने होंगे। उन्होंने कहा कि आज की मुलाकात से दोनों देशों को अपनी घनिष्ठ विकास भागीदारी मजबूत करने का एक और अवसर मिल गया है।

प्रधानमंत्री कार्यालय ने ट्वीट कर लिखा है, भारत-चीन की मित्रता और आगे बढ़ी। पीएम मोदी और राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने दक्षिण अफ्रीका में ब्रिक्स सम्मेलन से इतर बातचीत की। समझा जाता है कि दोनों नेताओं ने अंतरराष्ट्रीय परिदृश्य, ब्रिक्स सहयोग तथा आपसी हित के अन्य मुद्दों पर अपने-अपने विचार रखे।

संरक्षणवाद को साफ खारिज करे दुनिया : शी

ब्रिक्स सम्मेलन में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने कहा कि पूरी दुनिया को साफ तौर पर संरक्षणवाद को खारिज करना चाहिए। सम्मेलन में विदेशी सामानों पर कर बढ़ाने के लिए अमेरिका की आलोचना भी की गई।

विश्व की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था चीन और अन्य कारोबारी सहयोगियों के साथ ट्रंप प्रशासन के ट्रेड वार का मुद्दा सम्मेलन में छाया रहा। शी ने संरक्षणवाद की आलोचना करते हुए कहा कि यह सीधे तौर पर उभरते बाजारों के विकास को प्रभावित कर रहा है।

हमें आर्थिक सहयोग की विशाल संभावनाओं के बंद ताले को खोलना होगा। संयुक्त राष्ट्र, जी-20 समूह या किसी भी अन्य तरह से बढ़ावा दिए जा रहे संरक्षणवाद के खिलाफ लड़ाई लड़नी होगी।

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