सूत्रों के मुताबिक: आरएसएस ने संघ को समझने के लिए राहुल गांधी को किया आमंत्रित

सूत्रों के मुताबिक: आरएसएस ने संघ को समझने के लिए राहुल गांधी को किया आमंत्रित

पिछले दिनों अपने यूरोपीय दौरे के दौरान कांग्रेस अध्‍यक्ष राहुल गांधी ने आरएसएस पर तीखा हमला बोलते हुए उसकी तुलना अरब जगत के संगठन मुस्लिम ब्रदरहुड से की थी. उससे पहले भी राहुल गांधी लगातार आरएसएस पर हमले करते रहे हैं. इसी कड़ी में राहुल गांधी के संघ विरोधी बयानों के बाद सूत्रों के मुताबिक आरएसएस ने संघ को समझने के लिए राहुल गांधी को आमंत्रित करने का फैसला किया है. 17-19 सितंबर के बीच संघ के कार्यक्रम में हिस्‍सा लेने के लिए इनमें से किसी भी दिन राहुल गांधी को आमंत्रित किया जा सकता है. वैसे 17 सितंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जन्‍मदिन है. इसलिए सूत्रों के मुताबिक इस बात की प्रबल संभावना है कि उनको उसी दिन बुलावे का आमंत्रण भेजा जा सकता है.

इसके साथ ही राहुल समेत कई दलों के प्रमुखों को बुलावा भेजा जाएगा. यह भी कहा जा रहा है कि सीताराम येचुरी जैसे लेफ्ट नेता को भी आमंत्रित किया जा सकता है. सूत्रों के मुताबिक राहुल गांधी को आरएसएस चीफ मोहन भागवत से सवाल पूछने के लिए भी आमंत्रित किया जाएगा. उल्‍लेखनीय है कि इससे पहले जून में संघ ने पूर्व राष्‍ट्रपति प्रणब मुखर्जी को भी आमंत्रित किया था. वह नागपुर स्थित संघ के हेडक्‍वार्टर गए थे और भारतीयता के विषय पर अपने विचार भी रखे थे.

सूत्रों के मुताबिक राहुल गांधी के निमंत्रण भेजे जाने की बात को संघ का मास्‍टरस्‍ट्रोक माना जा रहा है. ऐसा इसलिए क्‍योंकि संघ का आमंत्रण स्‍वीकार अथवा अस्‍वीकार करना राहुल गांधी के लिए आसान नहीं होगा क्‍योंकि प्रणब मुखर्जी समेत कई सियासी दिग्‍गज अतीत में संघ के कार्यक्रमों में शिरकत कर चुके हैं. हालांकि जी न्‍यूज से बातचीत करते हुए कांग्रेस नेता राशिद अल्‍वी ने कहा कि अभी तक कांग्रेस को इस तरह का कोई निमंत्रण पत्र नहीं मिला है. लिहाजा फिलहाल इस विषय पर किसी भी प्रकार की टिप्‍पणी करना उचित नहीं होगा.

इस संबंध में आरएसएस के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख अरुण कुमार ने कहा कि मोहन भागवत देश के प्रबुद्ध नागरिकों से ‘भविष्य का भारत-आरएसएस का दृष्टिकोण’ विषय पर 17 से 19 सितंबर तक दिल्ली के विज्ञान भवन में संवाद करेंगे. प्रबुद्ध वर्ग राष्ट्रीय महत्व के विषयों पर संघ का दृष्टिकोण जानने को उत्सुक हैं. इसलिए समसामयिक मुद्दों पर संघ के विचार मोहन भागवत सबके सामने रखेंगे.

राहुल गांधी के मुस्लिम ब्रदरहुड संबंधी बयान पर कहा कि सारी दुनिया मुस्लिम आतंकवाद, मुस्लिम ब्रदरहुड से कितना पीड़ित है, अगर वह ये समझते तो ये नहीं कहते. वैसे भी वो कहते हैं कि अभी पूरे भारत को नहीं समझा है. ऐसे में जब भारत को नहीं समझा है तो संघ को क्या समझेंगे. संघ को समझने के लिए पहले उनके लिए भारत को समझना जरूरी है.

राहुल गांधी
दरअसल कांग्रेस अध्‍यक्ष राहुल गांधी ने पिछले दिनों अपने यूरोपीय दौरे के दौरान आरएसएस की आलोचना करते हुए इसकी तुलना अरब जगत से ताल्‍लुक रखने वाले मुस्लिम संगठन मुस्लिम ब्रदरहुड से की. राहुल गांधी ने लंदन में इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट आफ स्ट्रेटजिक स्टडीज (आईआईएसएस) के कार्यक्रम में कहा, “हम एक संगठन से संघर्ष कर रहे हैं, जिसका नाम RSS है जो भारत के मूल स्वरूप (नेचर आफ इंडिया) को बदलना चाहता है. भारत में ऐसा कोई दूसरा संगठन नहीं है जो देश के संस्थानों पर कब्जा जमाना चाहता हो.”

कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा, “हम जिससे जूझ रहे हैं वह एकदम नया विचार है. यह ऐसा विचार है, जो अरब जगत में मुस्लिम ब्रदरहुड के रूप में पाया जाता है और, यह विचार यह है कि एक खास विचार को हर संस्थान को संचालित करना चाहिए, एक विचार को बाकी सभी विचारों को कुचल देना चाहिए.” राहुल गांधी के इस बयान के बाद भाजपा ने इस पर कड़ी आपत्ति जताते हुए उन्हें अपने बयान पर माफी मांगने के लिए कहा है.

जब कांग्रेस के शासनकाल में मुस्लिम ब्रदरहुड के नेता भारत आए
2013 में जब कांग्रेस के नेतृत्‍व वाली यूपीए-2 सरकार सत्‍ता में थी, तो उस दौरान इस संगठन से जुड़े प्रमुख नेता मोहम्‍मद मोर्सी भारत दौरे पर आए थे. वह उस दौरान मिस्र के राष्‍ट्रपति थे. उल्‍लेखनीय है कि 2011 में अरब जगत के कई देशों में क्रांति की बयार देखने को मिली. ट्यूनीशिया में लोकतंत्र के समर्थन में उठी क्रांति की गूंज मिस्र से लेकर सीरिया तक सुनाई पड़ी. नतीजतन मिस्र की राजधानी काहिरा के तहरीर स्‍क्‍वायर में इस क्रांति की अनुगूंज सबसे ज्‍यादा सुनाई पड़ी. देखते ही देखते तीन दशक से सत्‍ता में काबिज होस्‍नी मुबारक की सत्‍ता ताश के पत्‍तों की तरह बिखर गई. उसके बाद मुस्लिम ब्रदरहुड से ताल्‍लुक रखने वाले प्रमुख नेता मोहम्‍मद मोर्सी मिस्र के राष्‍ट्रपति बने.

राष्‍ट्रपति बनने के बाद मार्च 2013 में इब्राहीम मोर्सी भारत के दौरे पर आए थे. उनके दौर में भारत-मिस्र संबंधों में नई शुरुआत हुई जोकि होस्‍नी मुबारक के तीन दशकों के शासनकाल में ठंडे पड़े हुए थे. मोहम्‍मद मोर्सी के उस दौरे के दौरान दोनों देशों के बीच रक्षा समेत सात क्षेत्रों में समझौते हुए थे. हालांकि इस यात्रा के चंद महीनों के बाद ही मिस्र में आंतरिक अशांति के चलते मोर्सी की सत्‍ता का पतन हो गया और उनकी जगह रक्षा मंत्री अब्‍दुल फतेह अल-सीसी ने ले ली. सत्‍ता में आने के बाद से अल-सीसी 2015 से लेकर अब तक दो बार भारत की यात्रा कर चुके हैं. मोहम्‍मद मोर्सी फिलहाल जेल की सजा भुगत रहे हैं.

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