जीतनराम मांझी का बयान, ‘मेरी इच्छा है कि कन्हैया महागठबंधन से लड़े चुनाव’

जीतनराम मांझी का बयान, ‘मेरी इच्छा है कि कन्हैया महागठबंधन से लड़े चुनाव’

बिहार में जेएनयू के पूर्व छात्र अध्यक्ष कन्हैया कुमार को लेकर अब राजनीति तेज हो गई है. लोकसभा चुनाव 2019 में बेगूसराय से उनके उम्मदीवार होने की खबर आने के बाद से सियासतों का बाजार गरम हो गया है. आगामी चुनाव को लेकर चेहरों को भंजाने की कवायद शुरू हो गई है. क्यों कि इस बार चुनाव में सभी पार्टियों का एक ही फॉर्मूला है कि जीतने वाले उम्मीदवार को ही टिकट दिया जाएगा.

वहीं, कन्हैया कुमार पर महागठबंधन दांव लगाने की कोशिश कर रहा है. कन्हैया कुमार को लेकर हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा के अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री जीतनराम मांझी ने बड़ा बयान दिया है. खबरों के मुताबिक जीतनराम मांझी ने कन्हैया को महागठबंधन में शामिल होने का ऑफर पेश किया है.

उन्होंने कहा है कि मेरी इच्छा है कि कन्हैया कुमार महागठबंधन की तरफ से चुनाव लड़ें. उन्होंने कहा कि उन्हें महागठबंधन की ओर से चुनाव लड़ना चाहिए. अगर ऐसा होता है तो मैं उनका महागठबंधन में तहे दिल से स्वागत करूंगा. उन्होंने कहा कि आरजेडी सुप्रीमो लालू यादव से इस मामले में उनकी बात हुई थी.

जीतनराम मांझी ने कहा कि महागठबंधन में सीटों को लेकर फैसला माह के अंत तक हो जाएगा. महागठबंधन में अगर कन्हैया शामिल होंगे तो निश्चित तौर पर उन्हें बेगूसराय से ही उम्मीदवार बनाया जा सकता है. इस पर जल्द ही फैसला लिया जाएगा.

गौरतलब है कि जीतनराम मांझी को भी सीट शेयरिंग के फैसले का इंतजार है. हाल ही में बिहार में महागठबंधन के सीट शेयरिंग को लेकर कहा गया था कि जीतनराम मांझी की पार्टी हम को 1 सीट दिए जाने की बात कही गई थी. पहेल इस पर जीतनराम मांझी ने कहा था कि अगर सम्मानजनक सीट नहीं मिली तो वह चुनाव नहीं भी लड़ेंगे.

हालांकि बाद में उन्होंने कहा कि महागठबंधन के हित के लिए वह चुनाव नहीं भी लड़ सकते हैं. उन्होंने कहा कि महागठबंधन को मजबूत करने के लिए और एनडीए को सत्ता से हटाने के लिए कुछ भी करने को तैयार हैं.

आपको बतादें कि इन दिनों जीतनराम मांझी महागठबंधन को मजबूत करने की कवायद कर रहे हैं. हाल ही में वह अहमदाबाद पहुंचे थे. जहां उन्होंने गुजरात के पाटीदार नेता हार्दिक पटेल से मिलने पहुंचे थे. हार्दिक पटेल इन दिनों आरक्षण को लेकर भूख हड़ताल पर है. इससे पहले उन्होंने पानी भी त्याग कर अनशन पर बैठे थे, लकिन बाद में उन्होंने पानी ग्रहण कर भूख हड़ताल जारी रखा. वहीं, जीतनराम मांझी ने उनसे मिलकर कहा कि उनके आंदोलन को वह राष्ट्रिय आंदोलन बनाने की कोशिश करेंगे

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