बाबरी विध्वंस मामला: CBI जज की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने यूपी सरकार को भेजा नोटिस

बाबरी विध्वंस मामला: CBI जज की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने यूपी सरकार को भेजा नोटिस

बाबरी विध्वंस मामले की सुनवाई कर रहे विशेष सीबीआई जज एसके यादव की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने यूपी सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है. वहीं सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई जज से पूछा कि वह सीलबंद रिपोर्ट फ़ाइल करके बताए कि उनके द्वारा 2 वर्ष में मामला निपटाने के आदेश को एक साल बीत चुके हैं. अब सिर्फ एक साल ही बचे है, आप यह मामला एक साल में कैसे खत्म करेंगे. दरअसल, यादव ने अपनी याचिका में कहा है कि SC ने अयोध्या मामले की सुनवाई पूरी होने तक उनके ट्रांसफर पर रोक लगा दी है. इस आदेश की वजह से इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उनकी पदोन्नति पर रोक लगा दी है. लिहाजा उन्हें ट्रांसफर के साथ या ट्रांसफर के बिना पदोन्नति दी जाए. आपको बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने बीजेपी के बड़े नेताओं के खिलाफ आपराधिक षड़यंत्र के आरोप बहाल रखे थे. सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश के बाद अब बीजेपी के बड़े नेता लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, कल्याण सिंह समेत कई नेताओं पर साज़िश की धारा में मुकदमा चलने का रास्ता साफ हो गया था.

सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया था कि बाबरी मस्जिद मामले की सुनवाई कर रही निचली अदालत के जजों को निर्णय दिए जाने तक स्थानांतरित नहीं किया जाएगा. सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई कर रही लखनऊ की अदालत को चार सप्ताह में कार्यवाही शुरू करने और यह स्पष्ट करने का निर्देश दिया था कि इस मामले की नए सिरे से कोई सुनवाई नहीं होगी.वहीं, सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले की सुनवाई दो साल में पूरी करने का आदेश दिया था. बता दें कि बाबरी मस्जिद गिराए जाने के बाद दो एफआईआर दर्ज हुई थी. एक एफआईआर लखनऊ में तो दूसरी एफआईआर फैज़ाबाद में दर्ज की गई थी.

ताल ठोक के: बाबरी विध्वंस ‘साजिश’ या हिंदू ‘आक्रोश’?

सुप्रीम कोर्ट ने लखनऊ में बीजेपी के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, उमा भारती और अज्ञात ‘कारसेवकों’ के खिलाफ दो अलग-अलग मामलों की संयुक्त सुनवाई का आदेश दिया था. हालांकि राजस्थान के राज्यपाल होने के कारण कल्याण सिंह को संवैधानिक छूट मिल गई थी. सुप्रीम कोर्ट ने लखनऊ की अदालत को इन मामलों पर स्थगन की मंजूरी दिए बिना दैनिक आधार पर सुनवाई करने का आदेश दिया था. सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया था कि अभियोजन के कुछ गवाहों को बयान दर्ज कराने के लिए निचली अदालत में पेश होना होगा.

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