उत्तराखंड में ‘स्वाइन फ्लू’ ने बोला हमला, दो महिला मरीज आईं सामने…

उत्तराखंड में ‘स्वाइन फ्लू’ ने बोला हमला, दो महिला मरीज आईं सामने…

डेंगू और चिकनगुनिया जैसी बीमारियों के साथ ही अब ‘स्वाइन फ्लू’ ने भी हमला बोल दिया है। स्वाइन फ्लू के दो महिला मरीज सामने आए हैं।

दोनों महिला मरीजों को जौलीग्रांट स्थित हिमालयन अस्पताल के आईसीयू में भर्ती कराया गया है। स्वाइन फ्लू मरीजाें की जानकारी मिलने पर एसीएमओ डॉ. दयाल शरण की अगुवाई मेें स्वास्थ्य विभाग की टीम ने हिमालयन अस्पताल पहुंचकर मरीजों की जानकारी ली है। दूसरी ओर स्वास्थ्य सचिव नीतेश कुमार झा ने सभी सीएमओ को निर्देशित किया है कि वे डेंगू, चिकनगुनिया और स्वाइन फ्लू बीमारी रोकने को लेकर हर संभव कदम उठाएं।

स्वास्थ्य विभाग के एसीएमओ डॉ. दयाल शरण ने बताया कि स्वाइन फ्लू के मरीजों में एक महिला मरीज देहरादून और दूसरी महिला हरिद्वार की रहने वाली है। दोनों महिला मरीजों को पहले स्थानीय अस्पतालों में भर्ती कराया गया था। लेकिन, हालत बिगड़ने पर जौलीग्रांट स्थित हिमालयन अस्पताल में रेफर कर दिया गया। जहां दोनों को आईसीयू में रखा गया है और विशेषज्ञों की टीम उनका इलाज कर रही है। एसीएमओ ने बताया कि स्वाइन फ्लू  की आशंका पर दोनों महिला मरीजों के खून के नमूने जांच के लिए दिल्ली स्थित नेशनल सेंटर फ ॉर डिजीज कंट्रोल (एनसीडीसी) भेजे गए थे। जहां जांच में स्वाइन फ्लू की पुष्टि हुई। 

दो मरीजों में स्वाइन फ्लू की पुष्टि होने के बाद स्वास्थ्य महकमे में हड़कंप मच गया है। सचिव चिकित्सा और स्वास्थ्य महानिदेशक ने सभी सीएमओ को निर्देशित किया है कि स्वाइन फ्लू बीमारी से निपटने को लेकर हर संभव कदम उठाए जाएं। सचिव चिकित्सा ने अधिकारियों को निर्देशित किया गया कि वे अपने अपने इलाकों में सघन जागरुकता और जांच अभियान चलाएं।

दून और कोरोनेशन में खोले गए ‘आईसोलेशन वार्ड’

दून अस्पताल – फोटो : file photo
स्वाइन फ्लू की दस्तक के साथ आला अधिकारियों के निर्देश पर दून और कोरोनेशन अस्पतालोें में आईसोलेशन वार्ड खोल दिए गए हैें। वार्डों में स्वाइन फ़्लू की दवा ‘टेमी फ्लू’ के अलावा पर्याप्त मात्रा में मास्क, आक्सीजन सिलिंडर, टेस्टिंग किट रखवा दी गईं हैं। अस्पतालों में दवाइयों की कमी नहीं हो इसके लिए अतिरिक्त दवाइयां, मास्क और टेस्टिंग किट मंगाए गए हैं। सीएमओ डॉ. एसके गुप्ता का कहना है कि जरूरत पड़ने पर स्थानीय स्तर पर भी दवाइयां और मास्क खरीदे जाएंगे।

राज्य मेें नहीं स्वाइन फ्लू जांच की व्यवस्था
चौंकाने वाली बात यह है कि स्वास्थ्य विभाग की ओर से सेवाओं को बेहतर करने के लिए बेशक हर साल करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हाें, लेकिन स्वाइन फ्लू की जांच को लेकर कोई व्यवस्था राज्य में नहीं है। एसीएमओ डॉ. दयाल शरण ने बताया कि जिन मरीज में स्वाइन फ्लू की आशंका होेती है, उसके खून के नमूने लेकर जांच के दिल्ली भेजे जाते हैं। जहां से चार से पांच दिन में रिपोर्ट आती है। यदि राज्य में ही जांच की व्यवस्था हो जाए तो जांच रिपोर्ट जल्दी आ रकेगी और उपचार भी जल्दी शुरू हो सकेगा।

अस्पतालों में स्टाफ की सुरक्षा के कोई इंतजाम नहीं
एक तरफ जहां स्वाइन फ्लू जैसी जानलेवा बीमारी ने दस्तक दे दी है, वहीं दून और कोरोनेशन जैसे सरकारी अस्पतालों में सुरक्षा के कोई इंतजाम नहीं हैं। अस्पताल में किसी भी डॉक्टर, पैरा मेडिकल और स्टाफ के पास न तो मास्क और न ही कोई अन्य उपकरण

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