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जाली दस्तावेज से फाइनेंस कराते थे वाहन, 7 गिरफ्तार, बैंक व एजेंसी की भूमिका की जांच

लखनऊ में क्राइम ब्रांच व कृष्णानगर पुलिस ने रविवार को एक ऐसे गिरोह का पर्दाफाश किया जो जाली दस्तावेज से बैंक से वाहन फाइनेंस कराता था। दो मास्टरमाइंड समेत गिरोह के सात गुर्गे गिरफ्त में आए हैं। पुलिस ने जालसाजों के पास से पांच लग्जरी कार, दो बुलेट व पांच बाइक बरामद की हैं। जालसाज जाली नंबर प्लेट लगाकर वाहन इस्तेमाल करते थे। पुलिस गिरोह के कुछ अन्य सदस्यों की तलाश कर रही है। वहीं, बैंक व एजेंसी के कर्मचारियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है।

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एसएसपी कलानिधि नैथानी के मुताबिक, गिरोह का मास्टरमाइंड मानसरोवर योजना शहीद पथ निवासी अमित यादव और वजीरबाग मोमिन नगर निवासी रेहान खान है। गिरोह ने हजरतगंज के शाहनजफ रोड स्थित स्पीड मोटर्स से टीवीएस की अपाचे आरआर 310 बाइक फाइनेंस कराई थी।

जांच में फर्जीवाड़ा मिलने पर एजेंसी के मैनेजर ने हजरतगंज थाने में केस दर्ज कराया। दोनों मास्टरमाइंड के अलावा कृष्णानगर के आजादनगर का आनंद कुमार, एलडीए कॉलोनी निवासी मो. शमीम, अलीगढ़ सिविल लाइन का कलीमुद्दीन उर्फ ओसामा और सहारा सिटी होम्स निवासी विवेक द्विवेदी है। अमित मूलरूप से अलीगढ़ का रहने वाला है। अमित व रेहान मिलकर आनंद व अनिल की फोटो लगाकर फर्जी आधार कार्ड तैयार करते थे। इसके बाद खाता खुलवाकर एजेंसियों पर जाकर वाहन पसंद करते थे। फाइनेंस के बाद कुछ दिन तक वाहन खुद इस्तेमाल कर बेच देते थे।

गाड़ी लेने के बाद जमा नहीं करते थे किस्त
एएसपी क्राइम दिनेश पुरी के मुताबिक, जालसाज कोई किस्त नहीं जमा करते थे। कार लेकर बाहर निकल जाते थे। कुछ समय बाद लौटकर वाहन का सौदा करते थे। पुलिस के मुताबिक, आठ लाख की गाड़ी पांच हजार किलोमीटर तक चलाने के बाद आधे से भी कम दाम पर बेचते थे। वहीं, किस्त बाउंस होने के बाद बैंक प्रबंधन जब छानबीन करता तो बताए गए नाम व पते पर कोई व्यक्ति मिलता ही नहीं था। जांच के बाद बैंक भी उसे डिफॉल्टर घोषित कर फाइल बंद कर देती थी। वहीं, रिकवरी के लिए लगी बैंक की टीम भी गिरोह का पकड़ नहीं पाती। जालसाज जो नंबर प्लेट लगाते थे, उसका फर्जी रजिस्ट्रेशन पेपर भी तैयार करते थे।
ये सामान हुआ बरामद

दो एक्सयूवी 300, एक इको स्पोर्ट, एक टिएगो, एक आई-20। इसके अलावा 2.65 लाख की बाइक टीवीएस अपाचे आरआर 301, दो बुलेट, दो एक्टिवा, दो बाइक व एक पल्सर बाइक। तीन फर्जी आधार कार्ड व बैंकों के सील व मुहर।
क्राइम ब्रांच इंस्पेक्टर अंजनी कुमार पांडेय के मुताबिक ,गिरोह के दो गुर्गों आकाश गौरव द्विवेदी और पीयूष गुप्ता के नाम सामने आए हैं। पुलिस इनकी तलाश में है। पुलिस के मुताबिक, विवेक, पीयूष और आकाश वाहन बेचते थे। पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि एक स्विफ्ट डिजायर पीयूष गुप्ता के पास, एक आई-20 आकाश गौरव द्विवेदी के पिता रामू द्विवेदी के पास है। दो स्कूटी भी आकाश को बेचने के लिए दी हैं। विवेक ने भी दो आई-20 कार बिकवाई थीं। गिरोह राजधानी में तीन साल से सक्रिय है और अब तक 50 से अधिक गाड़ियां फाइनेंस कराकर बेच चुका है।

प्रॉपर्टी डीलर, फाइनेंसर और कबाड़ कारोबारी थे शामिल
प्रभारी निरीक्षक कृष्णानगर प्रदीप कुमार सिंह व सर्विलांस प्रभारी ऐनुद्दीन के मुताबिक, मास्टर माइंड अमित यादव प्रॉपर्टी डीलर है। रेहान बैटरी स्क्रैब का काम करता है। आनंद निजी कंपनी में काम करता है और अनिल मजदूर है। मो. शमीम फाइनेंस कंपनी में काम करता है। कलीमुद्दीन उर्फ ओसामा किसान और विवेक द्विवेदी प्रॉपर्टी डीलिंग का काम करता है। गिरोह के खिलाफ हजरतगंज, ठाकुरगंज और कृष्णानगर थाने में मुकदमा दर्ज है।

खुलासा करने वाली टीम को इनाम
एसएसपी ने गिरोह का पर्दाफाश करने वाली टीम को 20 हजार रुपये का इनाम दिया। साथ ही सम्मानित करने की घोषणा की है। टीम में इंसपेक्टर अंजनी पांडेय, प्रदीप सिंह, एसआई ऐनुद्दीन, तेजप्रताप, अशोक, रणविजय, बृजमोहन, विजय, पंकज सिंह, कांस्टेबल राधेश्याम, सरताज, सुनील, प्रमोद, अनीस, सुनील, दीपक, अभिषेक, आनंद मणि, अंकुर, वसीम व सूरज हैं।

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