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NCLAT ने खारिज कर दी आयकर विभाग की याचिका Reliance Jio के मामले में.

रिलायंस ने अप्रैल में फाइबर और मोबाइल टॉवर बिजनेस को अलग करने की बात कही थी। इस दौरान कंपनी ने बताया था कि फाइबर और टॉवर बिजनेस का नियंत्रण दो अलग-अलग इन्फ्रास्ट्रक्चर इंवेस्टमेंट ट्रस्ट करेंगे। कंपनी ने फाइबर यूनिट को 500 करोड़ रुपये और मोबाइल टॉवर यूनिट को 200 करोड़ रुपये मूल्य की शेयरधारिता देने की बात कही थी।

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यह दोनों ट्रस्ट रिलायंस इंडस्टियल इंवेस्टमेंट एंड होल्डिंग्स लिमिटेड द्वारा गठित किए गए हैं और इन पर पूरी तरह से रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड का मालिकाना हक होगा। इस पुर्नगठन को सेबी की ओर से भी हरी झंडी मिल चुकी है।

केबल बिजनेस को अलग करने के लिए दी गई मंजूरी को रद्द करने की मांग की गई थी। एनसीएलटी की अहमदाबाद बेंच ने रिलायंस जियो को कारोबार पुनर्गठन की मंजूरी दी थी। कंपनी की इस योजना में जियो डिजिटल फाइबर प्राइवेट लिमिटेड और रिलायंस जियो इन्फ्राटेल प्राइवेट लिमिटेड को अलग करने का प्रस्ताव है।

इस याचिका में जियो के टॉवर और फाइबर केबल बिजनेस को अलग करने के लिए दी गई मंजूरी को रद्द करने की मांग की गई थी। एनसीएलटी की अहमदाबाद बेंच ने रिलायंस जियो को कारोबार पुनर्गठन की मंजूरी दी थी। कंपनी की इस योजना में जियो डिजिटल फाइबर प्राइवेट लिमिटेड और रिलायंस जियो इन्फ्राटेल प्राइवेट लिमिटेड को अलग करने का प्रस्ताव है।

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