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14 फरवरी, 2020 को राष्ट्र ने पुलवामा आतंकी हमले की पहली बरसी मनाई

आज पुलवामा की पहली बरसी है ये वो हमला था जिसने पूरे देश को झनझोड़ के रख दिया था अपने जवानो के शहादत पर जितने दुखी हुए थे बाला कोर्ट मेंकिये हमले में उतनी ही हमें ख़ुशी हुई थी बात करे अगर एक साल की तो बहुत कुछ बदल गया पूरा भारत देश बदल गया लेकिन जिन जवानो ने देश के लिए अपना बलिदान दिया था उनके परिवारों की जिंदगी भी बदल गई बस वीरान हुई है शहीदों के परिवारों की जिंदगी।

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आज शुक्रवार यानि 14 फरवरी, 2020 को राष्ट्र ने पुलवामा आतंकी हमले की पहली बरसी मनाई और 40 केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल के जवानों को श्रद्धांजलि दी, जिन्होंने अपनी जान गंवा दी, हम एक बार फिर देखते हैं ठीक उसी दिन जो हुआ था आपको बतादे की पिछले साल इसी दिन दोपहर के करीब 3:00 बजे थे, जब एक विस्फोट ने CRPF कर्मियों के एक काफिले को हिला डाला था जिनमें से कई जम्मू और कश्मीर में छुट्टी के बाद ड्यूटी पर लौटे थे बतादे एक विस्फोट में CRPF की बस में एक साथ 40 जवान मारे गए।

यह हमला श्रीनगर-जम्मू राजमार्ग पर हुआ था जब जम्मू से श्रीनगर के लिए लगभग 2500 कर्मियों के साथ 78 बसों का काफिला चल रहा था इस आतंकी हमले ने देश भर में कई हिस्सों में इसके खिलाफ विरोध प्रदर्शन के साथ सदमे की लहरें भी चली पार्टी लाइनों और नागरिक समाज के नेताओं ने हमले की खुले तौर पर निंदा की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हमला होने के 17 दिन बाद घोषणा की और कहा मेरे दिल में वही आग है जो आपके अंदर व्याप्त है।

साथ ही उन्होंने यह भी कहा था कि आप सभी के आँसू का बदला लिया जाएगा ,वही उन्होंने कहा की सशस्त्र बलों को दुश्मन के खिलाफ प्रतिशोध की जगह, समय, तीव्रता और प्रकृति को तय करने की पूर्ण स्वतंत्रता दे दी गई है संयुक्त राष्ट्र और दुनिया भर के कई देशों ने पुलवामा आतंकी हमले की निंदा की और आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में भारत को अपना समर्थन भी दिया हमले के बाद, भारत ने जेईएम JEM प्रमुख मसूद अजहर को वैश्विक आतंकवादी के रूप में नामित करने के लिए व्यापक प्रयास शुरू कर दिए थे वही आतंकी हमले के करीब 12 दिन बाद, 26 फरवरी की रात में, भारतीय वायु सेना के जेट विमानों ने पाकिस्तान के बालाकोट में जेएम शिविर पर बमबारी की।

पुलवामा हमले का एक साल पूरा हो चूका है भारत ने भी पाकिस्तान को इसका जवाब जबरदस्त तरह से दिया लेकिन इस के बाद भी देश के शहादत देने वाले परिवारों के दर्द की कोई दवा नहीं मिल पाई जो उन्होंने पिछले एक साल से झेला है देश के लिए शहीदों को अलग अलग तरह से श्रद्धांजलि दी गई और आज भी दी जा रही है

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