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30 साल बाद खुला इराक-सऊदी बॉर्डर :-

कुवैत पर हमले के वक्त बंद किया गया इराक-सऊदी बॉर्डर अब फिर खुल गया है. दोनों देशों की बढ़ती दोस्ती से ईरान परेशान हो रहा है इराक और सऊदी अरब के संबंधों में 18 नवंबर 2020 को एक ऐतिहासिक मोड़ आया. इराक के गृह मंत्री राजधानी बगदाद से अरार गए. अरार में उनके सामने सऊदी अरब के वरिष्ठ अधिकारी थे. दोनों देशों के अधिकारियों ने लाल रंग का रिब्बन काट 30 साल बंद पड़े बॉर्डर को खोल दिया. इसके बाद तालियों की गड़गड़ाहट के बीच दोनों तरफ खड़े ट्रकों ने सीमा पार की |

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दोनों देशों ने अरार बॉर्डर को लोगों और सामान के लिए खुला रखने का एलान किया है. इराकी शासक सद्दाम हुसैन के कुवैत पर हमला करने के बाद सऊदी अरब ने 1990 में बगदाद से हर तरह के रिश्ते तोड़ लिए थे. अरार बॉर्डर भी उसी समय से बंद पड़ा था |

कुवैत हमले के बाद भी कई दशकों तक दोनों देशों के रिश्ते बेहद कड़वे रहे. लेकिन सऊदी अरब में क्राउनप्रिंस मोहम्मद बिन सलमान और इराक में मुस्तफा अल कादहेमी के प्रधानमंत्री बनने से हालात बदल गए. दोनों नेताओं की निजी दोस्ती इसकी वजह है |

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मई 2020 में प्रधानमंत्री बनने के बाद कादहेमी ने अपनी पहली विदेश यात्रा के लिए सऊदी अरब को चुना. हालांकि किंग सलमान के अस्पताल में भर्ती होने के कारण यह दौरा टल गया. लेकिन इसके बावजूद इराक सरकार के बड़े अधिकारी रियाद आते जाते रहे. वहीं नवंबर में सऊदी अरब के प्रतिनिधिमंडल ने भी इराक का दौरा किया. अब दोनों देश अल जुमायमा के दूसरे बॉर्डर प्वाइंट को भी खोलने की तैयारी कर रहे हैं |

इराक और सऊदी अरब की नजदीकी से बेचैन ईरान समर्थक

इस बीच इराक में ईरान के समर्थक सऊदी अरब के साथ बढ़ती नजदीकी का विरोध कर रहे हैं. ईरान के ये समर्थक खुद को “इस्लामिक रेजिस्टेंस” कहते हैं. अरार बॉर्डर के खुलने से पहले भी ईरान समर्थक एक ग्रुप असहाब अल काहफ ने इराक में सऊदी प्रोजेक्ट्स को खारिज करने का एलान किया था |

असहाब अल काहफ ने चेतावनी देते हुए कहा, “इस्लामिक रेजिस्टेंस के खुफिया काडर इराकी बॉर्डर पर सऊदी अरब की शत्रुतापूर्ण गतिविधियों पर बारीकी से नजर रख रहे हैं.” इसके साथ ही दोस्ती की इन कोशिशों को सऊदी उपनिवेशवाद का विस्तार बताया गया |

ईरान समर्थकों की ऐसी धमकियों को खारिज करते हुए मंगलवार को इराकी पीएम कादहेमी ने कहा, “ये झूठ है. यह शर्मनाक है.” आगे पीएम ने कहा, “उन्हें निवेश करने दीजिए. इराक में उनका स्वागत है.” कादहेमी ने आशा जताई कि सऊदी निवेश से इराक में नई नौकरियां पैदा होंगी. इराक की एक तिहाई युवा आबादी बेरोजगार है |

2003 में अमेरिकी की अगुवाई वाले सैन्य अभियान में सद्दाम हुसैन को सत्ता से बेदखल कर दिया गया. लेकिन इसके बाद भी इराक और सऊदी अरब के रिश्ते नहीं सुधरे. सुन्नी बहुल सऊदी अरब को इराक में शिया बहुल राजनीतिक शक्तियां परेशान करती रहीं. ओपेक तेल उत्पादक देशों में सऊदी अरब के बाद इराक दूसरा बड़ा तेल उत्पादक है. इराक का तेल, गैस और बिजली उत्पादन ढांचा बहुत ही पुराना है. अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल के गिरे दाम के कारण बगदाद को इतना पैसा नहीं मिल पा रहा है कि वह अपने इंफ्रास्ट्रक्चर को मॉर्डन कर सके. ऐसे में इराक को उम्मीद है कि सऊदी अरब का साथ उसकी अर्थव्यवस्था में जान फूंक सकेगा प्रधानमंत्री कादहेमी की सरकार ऊर्जा और कृषि क्षेत्र में सऊदी अरब के निवेश के लिए फास्ट ट्रैक प्रोसेस बना चुकी है. सऊदी अरब की फंडिंग के चलने वाले कम से कम छह प्रोजेक्टों को अमेरिकी ऊर्जा कंपनियों को दिए जाने पर भी सहमति बन चुकी है. मई में वॉशिंगटन के दौरे पर कादहेमी ने इस पर सहमति जताई थी |

ईरान अब तक खुलकर इराक में सऊदी अरब के इन कदमों की आलोचना नहीं कर रहा है. लेकिन इराक में मौजूद ईरान समर्थक ऐसे प्रोजेक्ट को किसी हाल में बर्दाश्त न करने की चेतावनी देते जा रहे हैं |

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