गुजरातप्रदेश

गुजरात में बढ़ रहा बर्ड फ्लू का कहर, पक्षियों को बचाने की मुहिम में सावधानी बरतने के लिए जारी हुए निर्देश

कोरोना महामारी से अभी उबरे नहीं और बर्ड फ्लू का आगमन सभी के लिए चिंता का विषय बन चुका है। गुजरात में भी बर्ड फ्लू का कहर बढ़ता ही जा रहा है। अब तक फ्लू सात राज्यों में अपना पैर पसार चुका है। राजस्थान, मध्य प्रदेश, हिमाचल प्रदेश सहित 5 राज्यों में बर्ड-फ्लू का प्रकोप होने के चलते काफी तादाद में पक्षी मृत पाए जा रहे हैं। गुजरात में भी बर्ड-फ्लू की पुष्टि हो चुकी है।

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गुजरात में सबसे पहले जनवरी के पहले हफ्ते में ही जूनागढ़ के माणावदर में कई पक्षियों के मृत पाए जाने के बाद बर्ड फ्लू की पुष्टि  हुई जिसके बाद वड़ोदरा वलसाड़ और सूरत में भी मृत पाए गए पक्षियों में बर्ड फ्लू के लक्षण दिखे। वड़ोदरा और सूरत में इन पक्षियों में बर्ड फ्लू की पुष्टि हुई तो सरकार सकते में आ गई। वहीं राज्य के कई इलाकों से आ रही पक्षियों के मरने की खबर ने चिंता और बढ़ा दी है।

गुजरात के मुख्यमंत्री विजय रूपाणी ने राज्य में दस्तक दे चुके बर्ड फ्लू संक्रमण को लेकर सोमवार को वन और पशुपालन विभागों के शीर्ष अधिकारियों के साथ बैठक की। इस मीटिंग में आगामी करुणा अभियान के लिए एसओपी को अपनाने की घोषणा की। आपको बता दें कि हर साल पतंगबाजी में घायल होने वाले पक्षियों को बचाने और उनका इलाज कराने के लिए राज्य सरकार एक अभियान चलाती है। राज्य सरकार ने इस अभियान का नाम ही करुणा अभियान रखा है। एक आधिकारिक बयान में बर्ड फ्लू संक्रमण को देखते हुए पक्षियों को बचाने के लिए अपनाई जाने वाली विशिष्ट सावधानियां जारी की गई हैं।

ये सावधानियां पक्षियों को बचाने के दौरान किसी व्यक्ति के बर्ड फ्लू संक्रमित पक्षी के संपर्क में आने को लेकर जारी की गई हैं। आपको बता दें कि हाल ही में राज्य के जूनागढ़, वडोदरा, सूरत और वलसाड में बर्ड फ्लू संक्रमण के मामले देखने को मिले हैं। इसी को देखते हुए मुख्यमंत्री ने इस साल करुणा अभियान-2021 के अंतर्गत पक्षियों को बचाने और उनके उपचार करने संबंधी विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए हैं। एवियन इंफ्लूएंजा के डर के बीच गुजरात के अलग-अलग इलाको में पक्षियों की मौत के बाद पशु पालन विभाग के कर्मचारी जांच के लिए नमूने इकट्ठा कर रहे हैं।

राज्य में बर्ड फ्लू की पुष्टि के बाद प्रभावित इलाको में पोल्ट्री फार्म बंद करवा दिए गए हैं। कुछ दिनों पहले बारडोली के मढ़ी गांव मे जो मृत कौए पाए गए थे उनकी मौत भी बर्ड-फ्लू के कारण हुई है। जिसकी पुष्टि जिला चिकित्सालय ने कर दी है। वहीं गोंडल तालुका के गांव शिवराजगढ़ में भादर डेम के पास 8 से 10 टिटहरी मृत हालात में पाई गई हैं। वन विभाग ने मृत टिटहरी को पोस्ट मार्टम के लिए गोंडल वेटर्निटी अस्पताल भेज दिया है। वडोदरा जिले के एक गांव में 10 से ज्यादा कबूतरों की मौत हुई है। वन विभाग के अधिकारी अभी जांच में लगे हुए है कि कबूतरों की मौत पेस्टिसाइड के कारण हुई है या बर्ड फ्लू से।

सरकार की एसओपी में कहा गया है कि पक्षियों के उपचार व उन्हें बचाने के दौरान सोशल डिस्टेंसिंग और मास्क का इस्तेमाल अनिवार्य किया गया है। साबुन से हाथ धोना और सैनिटाइजर का इस्तेमाल भी करने को कहा गया है। साथ ही कोरोना प्रोटोकोल में फॉलो किए जाने वाले हर नियम का पालन करने को कहा गया है। करुणा अभियान में हिस्सा लेने वाले सभी अधिकारी व कार्यकर्ताओं को पीपीई किट और हाथ में दस्ताने पहनकर पक्षियों का इलाज करना होगा। घायल या मृत पक्षियों को संभालने के लिए भी निर्देश जारी किए गए हैं। यदि एक पक्षी का शव पाया जाता है, तो उसे प्लास्टिक की थैली में जिप-लॉक के साथ रखना होगा और पशुपालन विभाग के नजदीकी पशु चिकित्सालय को अलग से सौंपना होगा।

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