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होगा शिवरात्रि के अवसर पर कुंभ मेला 2021 का पहला शाही स्नान

गत 14 जनवरी 2021 यानी मकर संक्रांति के पर्व से कुंभ मेले का आयोजन शुरू हो चुका है. हरिद्वार में मां गंगा के किनारे श्रद्धा से लाखों लोग सिर झुकाने आ रहे हैं. आस्था और आध्यात्म का यह विश्व का सबसे बड़ा जमघट है जिसे कुंभ मेले के तौर पर जाना जाता है.

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शास्त्रों के अनुसार नक्षत्र और राशियां यह निर्धारित करती हैं कि चार निश्चित स्थानों में से किस स्थान पर कुंभ का आयोजन होना है. यह चार स्थान हैं हरिद्वार में गंगा तट, प्रयागराज में गंगा-यमुना-सरस्वती का संगम तट, नासिक में गोदावरी तट और उज्जैन में शिप्रा नदी का तट.

हालांकि ग्रहों के अद्भूत चाल और कोरोना के कारण इस बार हरिद्वार का कुंभ मेला प्रभावित हो रहा है. यह इस वर्ष 11वें साल बाद पड़ा है. आमतौर पर इसे हर 12वें वर्ष में मनाने की परंपरा है. ज्योतिष शास्त्रों के अनुसार बृहस्पति के कुंभ राशि और सूर्य के मेष राशि में आने से ऐसा संयोग बनता है.

इस बार 11 मार्च शिवरात्रि के अवसर पर कुंभ मेला 2021 का पहला शाही स्नान होगा. वहीं, तीसरा मुख्य शाही स्नान 14 अप्रैल को मेष संक्रांति के अवसर पर होगा. कोरोना के कारण इस बार कुछ पाबंदियां लगाई गई हैं.

आपको बता दें कि इस बार कुंभ मेला महज 48 दिनों का ही होगा. आमतौर पर इसे 120 दिनों के लिए मनाया जाता था. यह इस शताब्दी का दूसरा मेला है. इसमें कुंभ स्नान समेत अन्य धार्मिक कार्यों को किया जाता है.

आपको बता दें कि हर साल सूर्य का मेष राशि में आगमन 14 अप्रैल को होता है. जबकि, हर 12 साल बाद ब्रहस्पति का कुंभ राशि में आगमन होता है. लेकिन, इस बार 11वें साल में ही 5 अप्रैल को ये आगमन हो रहा है.

कुंभ मेला 2021 में पहला शाही स्नान: 11 मार्च शिवरात्रि
कुंभ मेला 2021 में दूसरा शाही स्नान: 12 अप्रैल सोमवती अमावस्या
कुंभ मेला 2021 में तीसरा मुख्य शाही स्नान: 14 अप्रैल मेष संक्रांति
कुंभ मेला 2021 में चौथा शाही स्नान: 27 अप्रैल बैसाख पूर्णिमा

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार हरिद्वार कुंभ मेले के दौरान पवित्र गंगा नदी में स्‍नान करना शुभ होता है. ऐसी मान्यता है कि इस दौरान गंगा में तीन डुबकी लगाने से सभी पाप नष्ट हो जाते हैं और लोगों को मोक्ष की प्राप्‍ति होती है.

कुंभ का ज्योतिषीय महत्व भी बताया गया है. जिन लोगों पर शनि की साढ़ेसाती और शनि की ढैय्या चल रही है उन लोगों को कुंभ स्नान करने से लाभ मिलता है. वहीं जो लोग शनि देव की अशुभता से पीड़ित हैं उन्हें भी शुभ तिथि में विधि पूर्वक स्नान करना चाहिए.

मिथुन, तुला राशि पर शनि की ढैय्या और धनु, मकर और कुंभ राशि पर शनि की साढे़साती चल रही है. इसके साथ ही जिन लोगों को राहु-केतु से संबंधित परेशानियां बनी हुई हैं, उन्हें भी कुंभ स्नान करने से लाभ मिलता है.

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