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अनंत चतुर्दशी पर भगवान विष्णु के अनंत स्वरूप होती है पूजा-अर्चना

अनंत चतुर्दशी का पर्व भादो मास की शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को मनाया जाता है. श्री गणेश महोत्सव के समापन यानी विसर्जन के दिन ये पर्व मनाया जाता है. इस पर्व को अनंत चौदस के नाम से भी जाना जाता है.

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अनंत चतुर्दशी पर भगवान विष्णु के अनंत स्वरूप की पूजा-अर्चना की जाती है और उनका आशीर्वाद प्राप्त किया जाता है. कहते हैं कि इस दिन अनंत देव यानी भगवान विष्णु की पूजा अनेकों गुना अधिक फल देने वाली होती है.

पूजा के बाद अनंत सूत्र बांधने की परंपरा है. इस सूत्र में 14 गांठ लगी होती हैं और ये रेशम या फिर सूत का बना होता है. मान्यता के अनुसार इस दिन अनंत सूत्र बांधने, पूजन और व्रत करने से कई तरह की बाधाएं और घर से नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है.

इस वर्ष अनंत चतुर्दशी पूजा का शुभ मुहूर्त 19 सितंबर 2021 को सुबह 6 बजकर 07 मिनट से शुरू हो कर अगले दिन यानि 20 सितंबर 2021 को सुबह 5 बजकर 30 मिनट तक रहेगा. यानी शुभ मुहूर्त की कुल अवधि 23 घंटे और 22 मिनट की होगी.

अनंत चतुर्दशी व्रत करने वाले व्यक्ति सुबह स्नान करने के बाद साफ कपड़े पहनें और पूजा की तैयारी करें. पूजा स्थान को साफ करें फिर एक चौकी पर पीला कपड़ा बिछाएं और चौकी पर भगवान विष्णु की प्रतिमा या चित्र स्थापित करके व्रत का संकल्प लें.

फिर एक सूत्र लेकर उसे हल्दी में रंगे और उसमें 14 गांठें बांधे. पूजा में भगवान विष्णु की प्रिय वस्तुएं, जिसमें पीले रंग के फूल और पीले रंग की मिठाई शामिल हों, उनको भगवान के चरणों में अर्पित करें. साथ ही तुलसी के पत्ते भी अर्पित करें.

पूजन, भोग और आरती करने के बाद भगवान विष्णु के चरणों में अनंत सूत्र समर्पित करें. विष्णु चालीसा, विष्णु स्तुति व आरती के साथ पूजा संपन्न करें.इसके बाद इस सूत्र को खुद धारण करें और घर के अन्य सदस्यों को भी पहनाएं. इस सूत्र को पुरुष अपने दाएं हाथ और महिलाएं बाएं हाथ में धारण करें.

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