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त्रिपुरा में हिंसा,लेनिन की मूर्ति गिराई गयी,धारा 144 लागू

त्रिपुरा के विधानसभा चुनाव में भाजपा की ऐतिहासिक जीत के बाद वहां हिंसा ने उग्र रुप ले लिया है. कई जगहों पर तोड़फोड़ और घरों को भी आग के हवाले कर दिया गया है. वामपंथी स्मारकों पर बुलडोजर चलाए गये हैं. खबरों की मानें तो भाजपा समर्थकों ने साउथ त्रिपुरा जिले के बेलोनिया सबडिविज़न में रूसी क्रांति के नायक व्लादिमीर लेनिन की मूर्ति पर बुलडोजर चला कर उसे ध्वस्त कर दिया है. ये मूर्ती पिछले पांच साल से यहां लगी थी. इस घटना के बाद त्रिपुरा में धारा 144 लगा दी गयी है.

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जानिए कौन थे लेनिन-

व्लादिमीर इलीइच लेनिन (1870-1924) रूस में बोल्शेविक क्रांति के नेता एवं रूस के साम्यवादी शासन के संस्थापक थे, जिनका जन्म सिंविर्स्क नामक स्थान में हुआ था और उनका वास्तविक नाम ‘उल्यानोव था. ये शुरु से ही क्रांतिकारी के रूप में जाने जाते थे. कहा जाता है कि उच्च योग्यता के साथ स्नातक बनने पर लेनिन ने 1887 में कज़ान विश्वविद्यालय के विधि विभाग में प्रवेश  लिया था. लेकिन शीघ्र ही विद्यार्थियों के क्रांतिकारी प्रदर्शन में हिस्सा लेने के कारण विश्वविद्यालय ने निष्कासित कर दिया गया.

साल 1889 में उन्होंने स्थानीय मार्क्सवादियों का संगठन बनाया था और उसके बाद वो मार्क्सवादियों के एक बड़े नेता के रूप में उभरे, जिसके चलते उन्हें रूसी क्रांति के दौरान जेल भी जाना पड़ा था. उन्होंने रूसी क्रांति पर तीस से ज्यादा किताबें भी लिखी हैं. मार्क्सवादी विचारक लेनिन के नेतृत्व में 1917 में रूस की क्रांति हुई थी लेनिन की अध्यक्षता में सोवियत सरकार की स्थापना की गई थी. जर्मनी के साथ उसने संधि कर ली जमींदारों से भूमि छीनकर सारी भूसंपत्ति पर राष्ट्र का स्वामित्व स्थापित कर दिया गया, व्यवसायों तथा कारखानों पर श्रमिकों का नियंत्रण हो गया और बैकों तथा परिवहन साधनों का राष्ट्रीकरण कर दिया गया.
जिससे श्रमिकों और किसानों को पूंजीपतियों और जमींदारों से छुटकारा मिला और समस्त देश के निवासियों में पूर्ण समता स्थापित कर दी गई। लेनिन ने इस दौरान “दि इमीडिएट टास्क्स ऑफ दि सोवियत गवर्नमेंट” तथा “दि प्रोले टेरियन रिवाल्यूशन ऐंड दि रेनीगेड कौत्स्की” नामक पुस्तकें लिखीं (1918)। लेनिन ने बतलाया कि मजदूर भी एक इंसान होते हैं और उन्हें भी सम्मान के साथ जीने का हक है. रूसी कम्युनिस्ट पार्टी (बोल्शेविक पार्टी) के संस्थापक लेनिन के मार्क्सवादी विचारों को ‘लेनिनवाद’ के नाम से जाना जाता है. ये रूसी क्रांति थी, जिसने रूस का भविष्य बदल दिया. फिलहाल त्रिपुरा में लेनिन की मूर्ति को ढहा दिया गया है और धारा 144 लगा दी गयी है.

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