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वाजयेपी अकसर पूछते थे कि जम्मू वाले राजमां-चावल ही क्यों खिलाते हैं

 अपने प्रभावशाली व्यक्तित्व से हर दिल में जगह बनाने वाले अटल बिहारी वाजपेयी के साथ जम्मू कश्मीर में बिताए दिन याद कर भाजपा नेता व कार्यकर्ता भावुक हो गए। वह हर याद ताजा हो आई जो उनके साथ जुड़ी थी। जम्मू कश्मीर में एक विधान, एक निशान, एक प्रधान को लेकर वर्ष 1953 के प्रजा परिषद के आंदोलन में युवा अटल बिहारी वाजपेयी श्यामा प्रयाद मुखर्जी के साथ उनके पीए के रूप में परमिट तोड़कर जम्मू कश्मीर में आए थे। श्यामा को तो पकड़ लिया गया, लेकिन अटल हाथ नहीं आए थे।

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अटल पुलिस से बचने के लिए नमक के ट्रक में छिपकर जम्मू से भद्रवाह पहुंचे और वहां साथ लगते हिमाचल प्रदेश में प्रवेश कर गए। संत अकाली मेहर सिंह उन्हें नमक से लदे अपने ट्रक में छिपा ले गए थे। यह यादें वीरवार को स्वतंत्रता सैनानी संत अकाली मेहर सिंह के पुत्र सरदार सुखदेव सिंह ने ताजा की।

उन्होंने कहा, मेरे पिता वर्ष 1953 में 28 साल के थे। श्यामा प्रसाद मुखर्जी की गिरफ्तारी के बाद उन्हें पंडित प्रेमनाथ डोगरा ने यह जिम्मेदारी दी थी कि मुखर्जी के साथ आए अटल, बलरोज मधोक व पंडित दीन दयाल उपाध्याय को यहां से सुरक्षित निकालना है। सरदार सुखदेव सिंह ने जागरण को बताया कि मेरे पिता ने तीन नेताओं को नमक से लदे ट्रक में तिरपाल में छिपाकर पत्नीटाप के निकट बटोत तक पहुंचाया था।

रास्ते में कई जगह पर ट्रक की तलाशी भी हुई। तीन दिन तक उन्हें बटोत में हमारे घर में छिपाकर रखा गया। बाद में मौका देखकर उन्हें भद्रवाह तक पहुंचाया गया यहां से रातों रात उन्हें जंगल से साथ सटे चंबा क्षेत्र के रास्ते हिमाचल प्रदेश पहुंचाया गया। उन्होंने कहा कि अटल के निधन की सूचना मिलने के बाद से घर में मातम का माहौल है। उन्होंने कहा कि मैंने भी उनके साथ गिरफ्तारी दी थी।

उन्होंने बताया कि नब्बे के दशक में जब अटल जम्मू में आए थे तो मैं भी उनके साथ स्टेज पर था। जब मैंने जम्मू में अकेली भाजपा सरकार होने का हवाला दिया तो उनका कहना था कि एक सिख सवा लाख के बराबर।

जम्मू के लजीज डोगरा व्यंजनों से था विशेष लगाव

जम्मू कश्मीर में राष्ट्रवादी तत्वों को मजबूत बनाने की मुहिम में बढ़ चढ़कर हिस्सा लेने वाले अटल बिहारी वाजपेयी डोगरा व्यंजनों में विशेष दिलचस्पी रखते थे। उन्हें जब भी जम्मू आने का मौका मिलता था तो वह एक आम आदमी की तरह प्रमुख बाजारों में खाने-पीने के लिए मशहूर दुकानों में जरूरत जाते थे। उनके साथ काफी समय बिताने वाले भाजपा के वरिष्ठ नेता स. विरेंद्र जीत सिंह का कहना है कि कई दशक बीत गए, लेकिन आज भी लगता है जैसे यह कल की बात है।

मैं उन्हें कार में घुमाने के लिए ले जाता था। विरेंद्र जीत ने बताया कि भाजपा के गठन के बाद हीरानगर में विधानसभा उपचुनाव में वाजपेयी जम्मू आए तो मैं ही उन्हें अंबेसेडर कार में हीरानगर ले जाता था। वे हंसी मजाक करने के साथ शहर की मशहूर दुकानों में लजीज व्यंजन खाने में दिलचस्पी दिखाते थे। मैं उस समय 24 साल का था। भाजपा के वरिष्ठ नेता मोहनसिंह चौहान ने बताया कि वाजयेपी अकसर पूछते थे कि जम्मू वाले राजमां-चावल ही क्यों खिलाते हैं। एक शाम को अपना पेट दिखाते हुए वाजयेपी ने कहा था कि राजमा चावल खाने के बाद मेरे पेट में कुछ-कुछ होता है।

वर्ष 1953 से जम्मू में हर आंदोलन में लिया हिस्सा

अटल बिहारी वाजयेपी ने वर्ष 1953 व उसके बाद जम्मू में हुए आंदोलन में लगातार शामिल होकर क्षेत्र से भेदभाव का मुद्दा लगातार उठाया। वर्ष 1991 के डोडा बचाओ आंदोलन में हिस्सा लेने आए अटल बिहारी वाजपेयी ने जम्मू सचिवालय की ओर कूच करते हुए गिरफ्तारी भी दी थी। क्षेत्र में आतंकवाद प्रभावित परिवारों की सुरक्षा के लिए हुए इस आंदोलन के दौरान वाजपेयी ने जम्मू के गीता भवन से शहरों के बाजारों से होते हुए सचिवालय तक गए थे। बाद में केंद्र में भाजपा की सरकार बनने के बाद डोडा की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए ग्रामीणों को हथियार देकर क्षेत्र में ग्राम सुरक्षा समितियों को मजबूत किया गया था। इन समितियों ने क्षेत्र में आतंकवाद पर करारा आघात किया था।

अटल किश्ती में बैठकर गए थे अखनूर :

वर्ष 1992 में अटल अखनूर में चिनाब नदी पर टूटे पुल को बनाने की मांग कर रहे लोगों से मिलने किश्ती में बैठक अखनूर गए थे। चिनाब के इस पार पहुंचे अटल से लोगों ने आग्रह किया कि वह नदी पार कर हालात जानें। अटल उस समय लोकसभा में विपक्ष के नेता थे। उन्होंने लोगों की मांग पर किश्ती से नदी पार कर लोगों को विश्वास दिलाया कि इस अहम पुल को बनाने का मुद्दा संसद में उठाया जाएगा। बाद में दिल्ली जाकर उन्होंने उस समय के रक्षामंत्री शरद पवार से यह मुद्दा उठाया था कि अखनूर का पुल सुरक्षा ²ष्टि से अहम है, लिहाजा इसे जल्द से जल्द बनाया जाए।

जीवन का स्वणिम काल है अटल के मंत्रिमंडल में बिताया समय :

अटल बिहारी वाजयेपी के साथ उनके मंत्रिमंडल में काम करना मेरे जीवन का स्वर्णिम काल था। वह एक बहुत अनुभवी व प्रभावशाली इंसान थे। यह कहना है पूर्व केंद्रीय रक्षा राज्यमंत्री प्रो. चमन लाल गुप्ता का। उन्होंने बताया कि वाजपेयी जी को जम्मू कश्मीर से विशेष लगाव रहा है। प्रधानमंत्री के अपने कार्यकाल के दौरान वह राज्य संबंधी मामलों में विशेष दिलचस्पी रखते थे। एक बार मुझसे बातचीत करते हुए उन्होंने कहा था कि जम्मू तो अपना है ही, कश्मीर को भी हमने संभालकर रखना है। उनका कहना है कि कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है व यह हमारे लिए बहुत अहमियत रखता है। प्रो. गुप्ता ने बताया कि वाजपेयी ने जम्मू कश्मीर में खासा समय बिताया है। ऐसे में प्रधानमंत्री के रूप में उन्होंने राज्य में हालात बेहतरी के साथ राज्य के विकास को बढ़ावा देने के लिए भी लगातार कोशिशें की थी।

 हमारे दिल में जिंदा रहेंगे अटल:

प्रदेश भाजपा अध्यक्ष रविंद्र रैना ने कहा कि अटल बिहारी वाजपेयी हमारे दिल में हमेशा जिंदा रहेंगे। वह हमेश प्रेरणास्त्रोत बनकर मुझे व मेरे जैसे अन्य कार्यकर्ताओं का हौंसला बढ़ाते रहेंगे। उन्होंने बताया कि जब मैं 1994 में राजौरी- पुंछ जिलों के आतंकवाद प्रभावित परिवारों के बच्चों को लेकर अटल जी से मिलने गया तो उन्होंने कविताओं से बच्चों की हिम्मत बढ़ाई थी। बच्चों ने अटल जी से आग्रह किया था कि वह उन्हें कोई कविता सुनाएं। इसे मानकर उन्होंने कविताएं सुनाई थी। उस समय मैं 24 साल का था। एक कविता थी गगन में लहराता है भगवा हमारा, दूसरी कविता थी, हार नहीं मानूंगा रार नहीं ठानुंगा काल के कपाट पर, लिखता मिटाता हूं गीत नया गाता हूं। कविताएं सुनकर बच्चों का हौंसला देखने वाला था। उस समय मैं राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ का प्रचारक था। 

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