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अरविन्द केजरीवाल ने साधा 2019 के लोकसभा चुनाव पर निशाना

राजनिवास में धरना देकर मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की मंशा जन समस्याएं सुलझाना नहीं, 2019 के लोकसभा चुनाव के लिए आधार तैयार करना है। यही वजह है कि उनके धरने की वजह बना जो मुद्दा हल्का पड़ता जाता है, वह उसे छोड़ नई मांग रखना शुरू कर देते हैं। उनका प्रयास धरने के जरिये विपक्षी पार्टियों का समर्थन पाना और अपनी राजनीतिक आकांक्षाओं को खुला आकाश देना था।

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बीते सोमवार शाम तकरीबन छह बजे जब केजरीवाल ने तीन अन्य सहयोगी मंत्रियों के साथ उपराज्यपाल अनिल बैजल से बातचीत के बहाने राजनिवास में घुसकर वहां डेरा डाला तो तीन मांगें रखी थीं। पहली, अधिकारियों की चार माह से चल रही हड़ताल खत्म कराई जाए, हड़ताली अधिकारियों पर एक्शन लिया जाए और राशन की डोर स्टेप डिलीवरी योजना को मंजूरी दी जाए। जबकि आज यह तीनों ही मुद्दे खत्म हो गए हैं।

जब कलई खुली कि राशन की डोर स्टेप डिलीवरी वाली फाइल खुद मंत्री ने ही दबा रखी है तो वह मांग गौण हो गई। अधिकारियों ने पत्रकार वार्ता कर हड़ताल के आरोप नकारे और सरकार की ही पोल खोल दी तो मुख्यमंत्री वहां भी बैकफुट पर आ गए। लेकिन, धरना खत्म नहीं किया।

फिर उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी को पत्र लिखकर वह सारी शक्तियां लौटाने की मांग रख दी जो सन 2015 से पूर्व दिल्ली सरकार के पास हुआ करती थीं। राजनीतिक जानकारों की मानें तो इस धरने का मकसद अपनी साढ़े तीन साल की नाकामियां छिपाने और जनता का ध्यान अपनी ओर आकर्षित करना था।

केजरीवाल जानते हैं कि 2019 का लोकसभा चुनाव नजदीक है। कांग्रेस उससे गठबंधन के नाम पर पहले ही किनारा कर चुकी है, इसीलिए यह तरीका अपनाया गया। आप सरकार इससे भी उत्साहित है कि उन्हें इस धरने के दौरान विभिन्न राजनीतिक पार्टियों का समर्थन मिल चुका है।

नेता प्रतिपक्ष विजेंद्र गुप्ता का कहना है कि आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार ने काम न करके हमेशा ही आरोप- प्रत्यारोप की राजनीति की है। इनका यह धरना भी केवल जनता का ध्यान भटकाने का जरिया था। यह बात हम पहले से भी कहते आ रहे हैं। धीरे-धीरे जनता भी यह सच्चाई मानने लगी है।

वहीं, दिल्ली प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय माकन की मानें तो केजरीवाल पूरी तरह से अवसरवादी नेता हैं। वे कब किसके साथ खड़े हो जाएंगे और क्या बयान दे देंगे, उनको खुद नहीं पता होता। दूसरों के घर में जबरदस्ती घुसकर यह लोग जनता के लिए संघर्ष करने का दंभ भरते हैं।

अचानक धरना खत्म कर घर पहुंचे केजरीवाल
राजनिवास के प्रतीक्षालय में नौ दिन से डेरा जमाए बैठे मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने मंगलवार शाम अपना धरना खत्म कर दिया। धरना समाप्ति का आधार उपराज्यपाल अनिल बैजल द्वारा मुख्यमंत्री के नाम लिखी गई वह चिट्ठी बनी, जिसमें उन्होंने सचिवालय में अफसरों से मिलने का अनुरोध किया था। उधर, केजरीवाल के धरना खत्म करने को भाजपा ने अपनी जीत बताया है। साथ ही भाजपा नेताओं ने मुख्यमंत्री कार्यालय पर चल रहा अपना धरना और अनशन भी खत्म कर दिया।

आइएएस अफसरों के हड़ताल पर होने और राशन की डोर स्टेप डिलीवरी योजना को मंजूरी न मिलने के विरोध में बीते सोमवार शाम छह बजे मुख्यमंत्री राजनिवास के प्रतीक्षालय में धरने पर बैठ गए थे। उनके साथ उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया, स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन और श्रम मंत्री गोपाल राय भी थे। बाद में जैन और सिसोदिया ने अनशन भी शुरू कर दिया था।

रविवार को आइएएस अफसरों ने पत्रकार वार्ता बुलाकर हड़ताल पर न होने की बात कही। साथ ही आरोप लगाया कि सभी अधिकारी काम कर रहे हैं पर सरकार के मंत्री ही पहले से तय बैठकों में नहीं आ रहे। पोल खुलती देख मुख्यमंत्री के तेवर नरम पड़े और उन्होंने ट्वीट कर अफसरों को सुरक्षा व सम्मान के लिए आश्वस्त किया। रविवार रात को ही तबीयत बिगड़ने पर जैन को अस्पताल ले जाया गया। सोमवार को सिसोदिया भी अस्पताल में भर्ती हो गए।

सोमवार को ही हाई कोर्ट ने भी धरनारत मुख्यमंत्री और मंत्रियों को फटकार लगाते हुए कहा कि आप किसी के घर या दफ्तर में धरने पर नहीं बैठ सकते। इसके बाद मंगलवार को सिसोदिया और जैन की अस्पताल से छुट्टी हो गई और दोनों ने सचिवालय में काम संभाल लिया। मंगलवार शाम को उपराज्यपाल बैजल ने केजरीवाल को पत्र लिखकर खुशी जताई कि मुख्यमंत्री ने अफसरों को सुरक्षा के प्रति आश्वस्त किया है।

उन्होंने कहा कि वह तो पहले भी कई बार ऐसा करने की सलाह दे चुके थे। अब मुख्यमंत्री को दिल्ली के हित में सचिवालय जाकर अफसरों संग बैठक करनी चाहिए। एलजी के इस पत्र के बाद शाम करीब छह बजे केजरीवाल ने अपना धरना खत्म कर दिया और राजनिवास से बाहर निकल आए। राजनिवास के बाहर सांसद संजय सिंह ने उनका स्वागत किया। हालांकि मुख्यमंत्री राजनिवास से निकलकर अफसरों से मिलने सचिवालय नहीं, सीधे अपने घर गए।

भाजपा ने भी खत्म किया धरना

दूसरी ओर, सीएम कार्यालय पर भाजपा नेताओं सांसद प्रवेश वर्मा, विधायक मनजिंदर जीत सिंह सिरसा, जगदीश प्रधान और कपिल मिश्र ने भी धरना खत्म कर दिया। केंद्रीय मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने उन्हें जूस पिलाकर अनशन खत्म कराया। नेता प्रतिपक्ष विजेंद्र गुप्ता को तबीयत खराब होने पर दिन में ही अस्पताल में भर्ती कराना पड़ गया था।

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