IIT छात्रों ने बनाई कौन-सी नई तकनीक, जिससे प्रदूषण घर में नहीं कर पाएगा प्रवेश

IIT छात्रों ने बनाई कौन-सी नई तकनीक, जिससे प्रदूषण घर में नहीं कर पाएगा प्रवेश

आइआइटी दिल्ली के पूर्व तीन छात्रों ने संस्थान के प्रोफेसरों के साथ मिलकर ऐसा प्रदूषण रहित जाल तैयार किया है, जो जहरीली हवा को घर के अंदर घुसने से रोकेगा। इसकी मदद से पार्टिकुलेट मैटर (पीएम) 2.5 और पीएम 10 जैसे प्रदूषण तत्व घर के अंदर प्रवेश नहीं कर सकेंगे। इसे पॉल्यूशन नेट नाम दिया गया है। आइआइटी दिल्ली के पूर्व छात्र प्रतीक शर्मा, तुषार व्यास और जतिन केवलानी ने टेक्सटाइल विभाग के प्रोफेसर अश्विनी अग्रवाल और मंजीत जप्पल के साथ मिलकर इनक्यूबेशन सेटर की मदद से तैयार किया है।

इनक्यूबेशन सेटर में कई स्टार्टअप कंपनियों को काम करने के लिए जगह दी गई है। यहीं पर पूर्व छात्र अपने-अपने स्टार्टअप के प्रोडक्ट तैयार कर रहे हैं। पॉल्यूशन नेट भी इनमें से एक है। इसे 2 दिसंबर को विश्व प्रदूषण रोकथाम दिवस के अवसर पर संस्थान में लांच किया जाएगा। इन्हीं तीन पूर्व छात्रों ने नैनो टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करते हुए नेजोफिल्टर प्रोडक्ट भी तैयार किया है, जिसे नाक में लगाने से पीएम 2.5 जैसे बेहद महीन प्रदूषित कण सांस के जरिये शरीर के अंदर नहीं जा पाएंगे।

क्या है जाल की विशेषता

प्रतीक के अनुसार जाल को नैनो टेक्नोलॉजी से तैयार किया गया है। यह वातावरण में मौजूद प्रदूषित कणों को छांटने का काम करेगा। इसमें बेहद बारीक छिद्र हैं, जिनसे पीएम 2.5 प्रवेश नहीं कर सकेगा। इससे हवा अंदर-बाहर भी आ और जा सकती है। प्रदूषित कणों के जमा होने के बाद इसे आसानी से कपड़े से साफ किया जा सकता है। इसमें पॉलीमर, नैनोफाइबर का भी इस्तेमाल किया गया है। इसे खिड़की, दरवाजों और पर्दो पर लगा सकते हैं।

घरों के अंदर ज्यादा है प्रदूषण का स्तर

इंडियन पॉल्यूशन कंट्रोल एसोसिएशन की डिप्टी डायरेक्टर राधा गोयल ने बताया कि हमारी तरफ से इंडोर पॉल्यूशन पर कई शोध किए गए हैं। इनमें यह बात सामने आई है कि घरों, इमारतों, ऑफिस के अंदर बाहर के वातावरण की तुलना में प्रदूषण का स्तर अधिक रहता है। इसका मुख्य कारण है कि एसी से प्रदूषित कण कमरे के अंदर आ जाते हैं और कमरा बंद होने से प्रदूषण के कण सघन होते रहते हैं।

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