किन्नर अखाड़े को मिला जूना अखाड़े का साथ, लिखा सनातन धर्म का नया अध्याय

किन्नर अखाड़े को मिला जूना अखाड़े का साथ, लिखा सनातन धर्म का नया अध्याय

संगम नगरी प्रयाग में श्याम यमुना तट पर 12 जनवरी की रात सनातन धर्म में नया अध्याय लिखा गया। वह अध्याय था किन्नर संन्यासियों को श्रीपंच दशनाम जूना अखाड़ा द्वारा अपनाना। सामाजिक व धार्मिक क्षेत्र में उपेक्षित चल रहे किन्नर संन्यासियों को जूना अखाड़ा ने ससम्मान अपने साथ लेकर चलने का निर्णय लिया। जूना ने किन्नर अखाड़ा को अग्नि व आवाहन अखाड़ा की भांति रखने का निर्णय लिया। इससे किन्नर अखाड़ा की प्रतिष्ठा स्थापित हुई।

किया शाही स्नान :

कुंभ शुरू होने से पहले जिस किन्नर अखाड़ा के विरोध का स्वर मुखर था, वह अब बंद हो गया। महात्माओं के बीच किन्नर संन्यासियों का मान-सम्मान एवं स्वीकार्यता बढ़ने लगी है। मकर संक्रांति पर पहली बार किन्नर संन्यासियों ने 13 अखाड़ों की भांति बिना किसी रोक-टोक के शाही स्नान किया।

विरोध में था संत समाज :

किन्नर अखाड़ा की स्थापना उज्जैन कुंभ के दौरान 2016 में हुई थी। लेकिन अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद ने उन्हें 14वें अखाड़ा के रूप में मान्यता देने से मना कर दिया था। अखाड़ा परिषद के विरोध के चलते किन्नर अखाड़ा शाही स्नान एवं पेशवाई निकालने से वंचित था। कुंभ में सारे अखाड़ों के शाही स्नान करने के बाद वह शाम को अमृत स्नान करते थे। पेशवाई की जगह किन्नर संन्यासी देवत्व यात्रा निकालते थे। किन्नर संन्यासियों की दिक्कत को समझते हुए जूना अखाड़ा ने उन्हें साथ लेकर चलने का निर्णय लिया।

महंत हरि गिरि का प्रयास :

जूना अखाड़ा के मुख्य संरक्षक महंत हरि गिरि ने इसमें अग्रणी भूमिका निभाई। उन्होंने विरोध की चिंता किए बगैर किन्नर अखाड़ा को साथ लेने का निर्णय लिया। जूना का साथ मिलते ही किन्नर संन्यासियों का महत्व बढ़ गया।

दिखने लगा ऐतिहासिक बदलाव :

संत-महात्माओं से मिलना-जुलना आरंभ हो गया। वह जूना अखाड़ा की हर गतिविधियों का हिस्सा बनने लगे हैं। जूना का साथ मिलने से अखाड़ा परिषद या कोई अखाड़ा उनका विरोध नहीं कर रहा है। जूना से जुड़े महात्मा व संन्यासिनी किन्नर संन्यासियों के साथ उनका उठना बैठना हो गया।

हर स्तर पर सहयोग करेगा जूना

स्वामी अवधेशानंद, आचार्य महामंडलेश्वर जूना अखाड़ा और महंत हरि गिरि, मुख्य संरक्षक जूना अखाड़ा ने दैनिक जागरण से इस विषय पर विशेष चर्चा में कहा कि किन्नर अखाड़ा को अपनाने के बाद जूना उनका हर स्तर पर सहयोग करेगा। आगे जहां कुंभ लगेगा वहां किन्नर अखाड़ा को शिविर लगाने के लिए जूना अखाड़ा जमीन मुहैया कराएगा। इनकी पेशवाई निकलवाने के साथ शाही स्नान कराने का प्रबंध भी जूना अखाड़ा करेगा। यही नहीं, कुंभ क्षेत्र प्रयाग, हरिद्वार, नासिक व उज्जैन में किन्नर अखाड़ा का आश्रम बने उसके लिए जूना अखाड़ा मदद करेगा। समाज में नाच-गाकर जीवन व्यतीत करने वाले किन्नर भी सनातन धर्म से जुड़ें, उसके लिए जूना अखाड़ा किन्नर संन्यासियों की धार्मिक गतिविधियों को बढ़वाएगा।

‘कन्नर अखाड़ा व उनके संन्यासियों का हम स्वागत करते हैं। जूना अखाड़ा समाज के सभी वर्गों का सम्मान करता है। किन्नर समाज का अभिन्न अंग हैं। किन्नर संन्यासी सामाजिक व धार्मिक सम्मान के हकदार थे। उन्हें उपेक्षित करना सनातन धर्म का अनादर करना है। इसके चलते जूना अखाड़ा ने उन्हें अपने साथ लेकर चलने का निर्णय लिया है।’

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