पूर्व मंत्री शिवकुमार राठौर की तेल कंपनी के 26 ठिकानों पर आयकर छापा

देश के जाने माने सरसों तेल निर्माता सलोनी ग्रुप पर बुधवार सुबह आयकर की जांच शाखा ने छापा मारा। विभाग के 200 से ज्यादा कर्मचारी और अफसरों की टीम ने ग्रुप के आगरा सहित अन्य शहरों के 26 ठिकानों पर एक साथ कार्रवाई को अंजाम दिया। सुबह पौने नौ बजे शुरू हुई यह कार्रवाई देर रात तक जारी थी। विभाग को अंदेशा है कि विभिन्न मदों से हासिल की गई अकूत संपत्ति में कई बाहरी निवेशकों का भी पैसा लगा हुआ है। इस कार्रवाई से विभाग को 100 करोड़ से भी ज्यादा की अघोषित आय का पता लगने का अनुमान लगाया जा रहा है।

प्रधान निदेशक (आयकर) जांच अमरेन्द्र कुमार के निर्देशन में उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के अफसरों की टीम ने ग्रुप के आगरा में 19, राजस्थान के अलवर, कोटा और जोधपुर में तीन, कोलकाता में एक, दिल्ली में दो, मथुरा में दो और लखनऊ में एक ठिकाने पर कार्रवाई की। लखनऊ में विभागीय टीमों को एक परिसर में खड़े वाहन से पांच करोड़ रुपये की नगदी मिली है। इसके साथ तमाम तरह के निवेशों के कागजात, कंपनियों से जुड़े दस्तावेज सहित अन्य कागजात मिले हैं। लेकिन इसका मालिकाना हक अभी तक किसी ने नहीं लिया है।

विभाग इस ग्रुप के प्रमुख एवं पूर्व सीएम अखिलेश के निकटस्थ और सपा सरकार में पूर्व मंत्री रहे शिव कुमार राठौर, पीएल शर्मा (बुलंद हाउसिंग के एमडी और इस ग्रुप के सहयोगी) एवं सरकारी ठेकेदार संतोष कुमार शर्मा सहित अन्य से भी पूछताछ कर रहा है। आरोप है कि ग्रुप ने अपने कामकाज में बोगस खर्चे दर्शाए हैं। ऐसी तमाम प्राप्तियां हैं जिनको खाते में दर्शाया ही नहीं गया है। ऐसे निवेश किए गए हैं जिनको विभाग के समक्ष दर्शाए जाने वाले आयकर रिटर्न में शामिल ही नहीं किया गया है। इस कार्रवाई का समन्वय संयुक्त निदेशक जांच तरुण कुमार कुशवाह ने किया। जांच में विभाग के उप निदेशक राजेश कुमार गुप्ता एवं सहायक निदेशक योगेन्द्र कुमार मिश्रा भी शामिल हैं।

इन बिन्दुओं पर भी हो रही जांच
-सरसों तेल में बड़े पैमाने पर मिलावट
-इकाई स्थापना में बोगस एंट्री प्रयोग

सपा नेता का है सलोनी ग्रुप
महेश एडिबिल ऑयल इंडस्ट्रीज के एमडी शिव कुमार सपा नेता हैं। पार्टी की सरकार के दौरान वह लघु उद्योग निगम के चेयरमैन (दर्जा प्राप्त राज्यमंत्री) रहे। कंपनी के चेयरमैन उनके पिता रामबाबू राठौर हैं। एवं उनके भाई बृजमोहन, दिनेश एवं महेश निदेशक हैं।  शुरुआत सन 1990 में हुई पार्टनरशिप फर्म के तौर पर की गई थी। सन 2000 में इसको लिमिटेड कंपनी बनाया गया। सलोनी इसका फ्लैगशिप ब्रांड है।

आखिर कैसे मिले बड़े ठेके
सपा से नजदीकी रखने वाले इस ग्रुप को मिले बड़े सरकारी ठेकों को लेकर भी आयकर टीमें जांच कर रही है। सवाल उठ रहे हैं कि पात्रता न होते हुए भी इस ग्रुप की कंपनियों को बड़े सरकारी ठेके किस आधार पर दे दिए गए। आरोप है कि ग्रुप ने बेनामी कंपनियां खड़ी कर इन परियोजनाओं के कॉन्ट्रेक्ट हासिल किए और बड़ी रकम अंदर की।

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