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अच्छी पैरेंटिंग के लिए फॉलो करें ये आसान तरीका बच्चा रहेगा खुश

यह सच है कि आज के जमाने में पैरेंटिंग किसी चुनौती से कम नहीं. लेकिन यह भी सच है कि जीवन में खुशियां बेहतर पैरेंटिंग से ही मिलती है. इसी कोशिश में कई पैरेन्‍ट्स हैं जो खुद और बच्‍चों पर परफेक्शन का बोझ डाल देते हैं और सारा मामला खराब हो जाता है.

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ऐसे में हर पैरेंट को यह जानना जरूरी है कि कोई भी इंसान हर चीज में परफेक्ट नहीं हो सकता. हम जैसे ही परफेक्शन की दौड़ में शामिल होते हैं तो खुशियां दूर होने गलती हैं. यह बात पैरेंटिंग को लेकर भी है.

यदि आप हर जगह परफेक्ट बनने की कोशिश करेंगे तो आप फिजिकली और इमोशनली थक जाएंगे और दुखी, चिड़चिड़े और असंतुष्ट इंसान में बदल जाएंगे. यहां हम आपको बताते हैं कि आप किन गोल्डन रूल्स को अपने जीवन में अपनाकर खुशहाल पैरेंट बन सकते हैं.

जब आप पैरेंट बनते हैं तो मल्टी-टास्कर बनना अनिवार्य ही हो जाता है. आपको पहले की जिम्मेदारियों के साथ-साथ बच्चे के लालन-पालन की जिम्मेदारी भी उठानी पड़ती है. ऐसे में कम समय में कई काम निपटाने की कला सीखें.

इसके लिए हो सकता है कि आपको अधिक मेहनत करनी पड़े और आपको हर चीज के लिए प्‍लान करना पड़े लेकिन यकीन मानिए, आपको इससे पैरेंटिंग में काफी फायदा मिलेगा.

पैरेंटिंग समझदारी का काम है जिसमें जिद के लिए कोई जगह नहीं है. आत्मनिर्भर दिखाने की कोशिश में आपका और बच्‍चों के बीच रिश्‍ता खराब हो सकता है. अगर आप पैरेंटिंग को बोझ नहीं एन्जॉयमेंट की तरह लेना चाहते हैं तो आपको मदद लेने से हिचकिचाना नहीं चाहिए.

आप भले ही बच्चे को तमाम व्यस्तताओं के बीच कम समय दे पाते हों लेकिन जितना भी समय दे क्‍वालिटी वाला समय हो. आप उस समय पूरे ध्‍यान से बच्‍चों की बातों, उनके सवालों, उनकी हरकतों और शरारतों को देखें. उनके साथ खेलें, खाएं, हंसे, बोलें और उन्हें कहानियां सुनाएं.

अगर आप संवेदनशील रहेंगे तो बच्‍चे भी आपके प्रति संवेदनशील बनेंगे. वे आपसे ही काम के प्रति समर्पण, लोगों के साथ बातचीत का तरीका, मदद करने की आदत आदि सीखते हैं. ऐसे में खुद के व्यवहार में बदलाव लाएं.

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