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पूर्व वायुसेना प्रमुख बीएस धनोआ बोले- बालाकोट एयरस्ट्राइक सफलता का निर्णायक प्रमाण है

बालाकोट एयर स्ट्राइक का नेतृत्व करने वाले पूर्व वायुसेना प्रमुख बीएस धनोआ ने कहा कि बालाकोट एयरस्ट्राइक सफलता का निर्णायक प्रमाण है।

बालाकोट एयर स्ट्राइक का नेतृत्व करने वाले पूर्व वायुसेना प्रमुख बीएस धनोआ ने कहा कि बालाकोट एयरस्ट्राइक सफलता का निर्णायक प्रमाण है। इस ऑपरेशन के दौरान मैं अपने घर में बैठकर इसकी निगरानी की थी। धनोआ ने कहा कि सैन्य जीत इस बात से मापा जाता है कि क्या आपने कथित राजनीतिक उद्देश्य को हासिल किया है, मैं दावे के साथ कहता हूं कि बालाकोट ऑपरेशन में यह उद्देश्य सफलतापूर्वक हासिल किया गया था।

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बीएस धनोआ ने कहा है कि जैश-ए-मोहम्मद के शिविर पर 2019 बालाकोट हवाई हमला हमारी बड़ी सफलता थी। साथ ही इसके जरिए चेतावनी दी गई कि अगर आतंकी 14 फरवरी 2019 में पुलवामा में की गई घटना को दोबारा अंजाम देने की कोशिश करेंगे तो भारत सरकार बॉर्डर क्रॉस कर आतंकवादियों को मारने का आदेश दे सकती है।

पाकिस्तानी क्षेत्र में भारतीय वायुसेना द्वारा 26 फरवरी को किए गए एयर स्ट्राइक के लगभग एक साल बाद बीएस धनोआ वे हिंदुस्तान टाइम्स से बातचीत में बताया कि मुझे लगता है कि सरकार उनपर फिर हमला करेगी। इस बार हमला और जोरदार हो सकता है और इस बार आतंकियों को उनके घरों से बाहर भी लाना चाहिए ताकि किसी के मन में कोई शक न पैदा हो। धनोआ से पूछा गया कि पुलवामा जैसे संभावित हमले के लिए भविष्य में भारत की क्या प्रतिक्रिया हो सकती है।

धनोआ ने आगे कहा कि हमने लक्ष्य पर निशाना साधन के लिए पांच हथियारों को शामिल किया था। लक्ष्य को साधा गया या नहीं इसकी सूचना आने में देरी हुई क्योंकि वीडियो रिकॉर्डिग के लिए जो उपकरण हमने इस्तेमाल किया था वह फेल हो गया था। और 8.30 बजे सुबह ज्यादा बादल होने की वजह से उपग्रह भी सही तस्वीर नहीं ले सका। पहली पुष्टि सिंथेटिक एपर्चर कैमरे के माध्यम से हुई, जो बालाकोट की इमारतों की छतों पर लगे थे। हमने तीन इमारतों हमला किया और एक को जानबूझकर छोड़ दिया। धनोआ ने बताया कि हथियार को इस तरह से डिजाइन किया गया है कि हमला करने पर इमारत बच जाती है, लेकिन उसमें रहने वाले नहीं बच सकते हैं।

भारतीय वायुसेना की प्रतिक्रिया क्षमताओं के भविष्य पर धनोआ ने कहा कि एस -400 मिसाइल प्रणाली और राफेल के शामिल होने के साथ, हम इस स्थिति में आ जाएंगे की पाकिस्तान के अंदर मौजूद आतंकी संगठनों को अपने व्यवहार में परिवर्तन लाने के लिए मजबूर होना होगा। यदि हमारे पास 27 फरवरी को ये दोनों हथियार या सिर्फ राफेल होता तो हम उनके चार या पांच एयरक्राफ्ट को मार गिराते और इस घटना के बाद उनके व्यववहार में तुरंत परिवर्तन आ जाता।

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