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विश्व जल दिवस आज:जानें पानी की एक-एक बूंद का महत्व

1993 में पहली बार विश्व जल दिवस मनाया गया था और संयुक्त राष्ट्र संघ ने 1992 में अपने एजेंडा 21′में रियो डी जेनेरियो में इसका प्रस्ताव दिया था!

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कैसे शुरुआत हुई विश्व जल दिवस की

दुनिया में विश्व जल दिवस मनाये जाने की पहल सबसे पहले ब्राजील ने की थी. ब्राजील के रियो डी जेनेरियो शहर में वर्ष 1992 में आयोजित पर्यावरण तथा विकास का संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन द्वारा आयोजित कार्यक्रम में विश्व जल दिवस मनाने की पहल की गई तथा वर्ष 1993 में संयुक्त राष्ट्र ने अपने सामान्य सभा के द्वारा निर्णय लेकर इस दिन को वार्षिक कार्यक्रम के रूप में मनाने का निर्णय लिया. इस कार्यक्रम का उद्देश्य लोगों के बीच में जल संरक्षण का महत्व साफ पीने योग्य पानी का महत्व आदि बताना था.

विश्व जल दिवस का उद्देश्य

विश्व जल दिवस का एकमात्र उद्देश्य विश्व के सभी देशों में में स्वच्छ एवं सुरक्षित जल की उपलब्धता सुनिश्चित करवाना है साथ ही यह जल संरक्षण के महत्व पर भी ध्यान केंद्रित करता है. युएन राज्य और एजेंसी सहित, जल के सभी जटिल मुद्दों पर लोगों का ध्यान आकर्षित करन् के लिए स्वच्छ जल संरक्षण के प्रोत्साहन में विभिन्न एनजीओ और गेर सरकारी संगठन भी शामिल होते हैं. इस कार्यक्रम को मनाने के दौरान, जल से संबंधित सभी मुद्दो को जनता के सामने उजागर किया जाता है.

 

पानी को लेकर आज की दिक्कत”-

आज दुनिया की प्रमुक समस्या पानी बन चुकी है, प्राकृतिक संसाधनो के बेहिसाब दोहन से हमारा भविष्य खतरे में आ गया है. धरती पर सबसे ज्यादा मात्रा पानी की है तदोपरान्त हम दिन-ब-दिन पानी की समस्या से जूझ रहें हैं. आज हम बोतल बंद पानी पीने के आदी हो रहें है जो हमारे लिए नासूर बनता जा रहा है.

दुनिया के बड़े शहरों की बात करें तो पानी का स्तर जमीन के बहुत नीचे पहुंच चुका है. भूगर्भशास्त्री प्रो. पीके पटनायक के मुताबिक पानी की कमी के साथ एक बड़ा कारण पानी का प्रदूषण भी बढ़ता जा रहा है. इसकी वजह से भूगर्भ में पानी की पहली लेयर जिसे फ‌र्स्ट स्टेटा भी कहते हैं वह 100 से 150 मीटर के बीच में होती है, जिसमें पीने योग्य पानी होता है, यह प्रदूषित होती जा रही है. इस वजह से पानी की क्वालिटी गिरने से चर्म रोग और अन्य रोग भी बढ़ते जा रहे हैं. सेकेंड स्टेटा 160 से 250 मीटर के बीच है, जिसमें खारा पानी है, जो पीने योग्य नहीं है. इसके बाद थर्ड और फोर्थ स्टेटा में पानी पीने योग्य है, लेकिन इस प्राप्त करने के लिए पाताल तक (450 मीटर) अंदर तक जाना होगा. बताते चले कि भूगर्भ जल विभाग 450 मीटर तक ही सर्वे कर पाया है.

पानी की किल्लत को समझ कर ही रहिमन ने लिखा था-

रहिमन पानी राखिए, बिन पानी सब सून.

पानी गये ना उबरे, मोती मानस चून.

 

जानें अभी तक के विश्व जल दिवस के विषय

-वर्ष 1993 का विषय था “शहर के लिए जल”

-वर्ष 1994 का विषय था “हमारे जल संसाधनों का ध्यान रखना हर एक का कार्य है”

-वर्ष 1995 का विषय था “महिला और जल”

-वर्ष 1996 का विषय था “प्यासे शहर के लिए पानी”

-वर्ष 1997 का विषय था “विश्व का जल क्या पर्याप्त है”

-वर्ष 1998 का विषय था “भूमी जल-अद्श्य संसाधन”

-वर्ष 1999 का विषय था “हर कोई प्रवाह की ओर जी रहा है”

-वर्ष 2000 का विषय था “21वीं सदी के लिए पानी”

-वर्ष 2001 का विषय था “स्वास्थ के लिए जल”

-वर्ष 2002 का विषय था “विकास के ले जल”

-वर्ष 2003 का विषय था “भविष्य कते लिए जल”

-वर्ष 2004 का विषय था “जल और आपदा”

-वर्ष 2005 का विषय था “2005-2015 जीवन के लिए पानी”

-वर्ष 2006 का विषय था “जल और संस्कृति”

-वर्ष 2007 का विषय था “जल दुर्लभता के साथ मुंडेर”

-वर्ष 2008 का विषय था “स्वच्छता”

-वर्ष 2009 का विषय था “जल के पार”

-वर्ष 2010 का विषय था “स्वस्थ विश्व के लिए स्वच्छ जल”

-वर्ष 2011 का विषय था “शहर के लिए जल:शहरी चुनौती के लिए प्रतिक्रिया”

-वर्ष 2012 का विषय था “जल और खाद्य सुरक्षा”

-वर्ष 2013 का विषय था “जल सहयोग”

-वर्ष 2014 का विषय था “जल और ऊर्जा”

-वर्ष 2015 का विषय था “जल और दीर्घकालिक विकास”

-वर्ष 2016 का विषय था “जल और नौकरियां”

-वर्ष 2017 का विषय था “अपशिष्ट जल”

-वर्ष 2018 का विषय होगा “जल के लिए प्रकृति के आधार पर समाधान”

 

 

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