मध्य प्रदेश

इंदौर 311 एप से कोरोना मरीजों की कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग हुई आसान अब PMO ने इसकी जानकारी मांगी

कोरोना वायरस का संक्रमण पूरे देश में फैला हुआ है। कुछ राज्यों व शहरों को इसने बुरी तरह चपेट में लिया है। लेकिन कुछ जिले या शहर ऐसे हैं जहां कोरोना वायरस के संक्रमण को रोकने में सफलता हासिल हुई है।

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ऐसा ही एक शहर है मध्य प्रदेश का इंदौर। यहां प्रशासन ने तकनीक का सहारा लेकर संक्रमण के बढ़ते मामलों को काबू करने में कामयाबी हासिल की है।

इंदौर में प्रशासन ने तकनीक और टीम वर्क की सहायता से इंदौर 311 एप विकसित किया जिसके माध्यम से इंदौर में कोरोना वायरस मरीजों की कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग और संदिग्ध मरीजों पर निगरानी रखने में मदद मिली। इंदौर 311 एप के काम से प्रभावित होकर प्रधानमंत्री कार्यालय ने नगर निगम से इसकी जानकारी मांगी है।

इंदौर की निगमायुक्त प्रतिभा पाल ने इस बात की पुष्टि करते हुए बताया कि इस बार मन की बात में प्रधानमंत्री इंदौर 311 एप के नवाचार का उल्लेख कर सकते हैं। इस एप की विशेषता बताते हुए निगमायुक्त ने बताया कि इंदौर 311 एप की सहायता से कोरोना संक्रमित और संदिग्ध मरीजों की पहचान करने में आसानी हुई।

इससे कोरोना संक्रमिक मरीजों की संख्या में कमी आई और उचित इलाज के साथ मृत्यु दर भी कम हुई। इंदौर 311 एप के जरिए होम आइसोलेट किए गए मरीजों की भी निगरानी की जा रही है।

जिला पंचायत सीईओ और सर्वे और निगरानी के प्रभारी रोहन सक्सेना के मुताबिक, इंदौर में रहने वाले (शहरी और ग्रामीण) 7.50 लाख घरों के 40 लाख लोगों का सर्वे किया गया। शहर के करीब 5.50 लाख घरों का सर्वे किया गया, जिसमें 29 लाख लोगों तक पहुंच बनी।

इंदौर एप पहले से ही चल रही थी। इसके सफल संचालन के बाद इसे कोरोना से लड़ने के लिए तैयार किया गया। आइए यहां समझते हैं कि इंदौर 311 एप की शुरुआत कब हुई थी और ये कैसे काम करती है।

दो अक्तूबर 2016 में इंदौर नगर निगम ने इस एप की शुरुआत की थी। इसका उद्देश्य सरकार में बैठे सामुदायिक नेताओं से सीधे बात करना था। ये अमेरिका और कनाडा के गैर-आपातकालीन नंबर 311 की तर्ज पर आधारित है, जिसका काम सूचना और सेवाएं देना है।

दरअसल, इंदौर 311 एप शहर के नागरिकों को सरकारी सेवाओं के बारे में सूचना देने का काम करती है। इन सेवाओं में बस, ट्रैफिक, हेल्पलाइन, शिकायत, निकटतम बैंक, ब्लड बैंक, बस स्टैंड, कम्यूनिटी सेंटर, कॉलेज, जिम, अस्पताल, पुस्तकालत, एलपीजी गैस पंप, बाजार, ऐतिहासिक भवन, पार्किंग की जगह, पेट्रोल पंप, पुलिस स्टेशन, पोस्ट ऑफिस, सार्वजनिक शौचालय, स्टेडियम, टैक्सी स्टैंड, स्कूल और घूमने की जगहों की जानकारी देना शामिल है।

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