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केजरीवाल सरकार फिर मुश्किल में, विवादों में घिरी 1000 इलेक्टिक बसें खरीदने की योजना

एक हजार इलेक्टिक बसें खरीदने की दिल्ली सरकार की परियोजना विवादों में आ गई है। जिस दिल्ली इंटीग्रेटेड मल्टी मॉडल ट्रांजिट सिस्टम लिमिटेड (डिम्ट्स) को इलेक्टिक बसों के परिचालन का अनुभव नहीं है सरकार ने उसे परियोजना के लिए सलाहकार नियुक्त करने के साथ ही टेंडर करने का भी अधिकार दे दिया है। बगैर डीपीआर (डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट) या प्रारंभिक परियोजना रिपोर्ट बनाए जिस तरह से सरकार ने डिम्ट्स पर मेहरबानी दिखाई है उससे सवाल खड़े हो गए हैं।

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सचिवालय से जुड़े सूत्रों का कहना है कि डिम्ट्स सरकारी कंपनी नहीं है। डिम्ट्स में 50 फीसद शेयर सरकार का और 50 फीसद कंपनी का है। कंपनी के बोर्ड में जरूर सरकार के लोग हैं, मगर डिम्ट्स का संचालन प्राइवेट हाथों में है। ऐसे में इसे टेंडर के आधार पर ही सलाहकार बनाया जा सकता है।

इसके अलावा जिस कंपनी को सलाहकार बनाया जाता है, उसे ही टेंडर का काम देना गलत है, क्योंकि टेंडर प्रक्रिया में कंपनी का हित जुड़ेगा, जबकि इस परियोजना में सरकार का पैसा लगेगा। ऐसे में टेंडर आदि की प्रक्रिया का काम सरकार के पास होना चाहिए था। सूत्रों की मानें तो इस समय केवल चीन में 90 के करीब इलेक्टिक बसें चल रही हैं, जबकि हमारे देश में करीब 30 इलेक्टिक बसें चल रही हैं। पूरे देश में 440 इलेक्टिक बसें खरीदने के लिए टेंडर किए गए हैं, जबकि दिल्ली सरकार ने एक हजार बसें खरीदने के लिए कैबिनेट से मंजूरी दे दी है।

कैबिनेट बैठक में महिला अफसरों से किया गया दुर्व्यवहारः भाजपा

सीसीटीवी कैमरे बंद करके कैबिनेट की बैठक करने पर भाजपा ने दिल्ली सरकार को आड़े हाथों लिया है। उसका कहना है कि दस जुलाई को हुई कैबिनेट की बैठक में महिला अधिकारियों के साथ दुर्व्यवहार किया गया। इसके बाद यह फैसला किया गया कि आगे से कैबिनेट बैठक की रिकार्डिंग नहीं होगी। दिल्ली विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष विजेंद्र गुप्ता का कहना है कि दिल्ली सरकार स्कूलों के क्लास रूम में सीसीटीवी कैमरे लगाकर पारदर्शिता लाने की बात कर रही है।

वहीं, दूसरी ओर मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कैबिनेट की पिछली दो बैठकों में सीसीटीवी कैमरों की रिकॉर्डिग बंद करवा दी। विजेंद्र गुप्ता ने कहा कि मुख्यमंत्री को स्पष्ट करना चाहिए कि आखिर कैबिनेट बैठक में उन्हें सीसीटीवी कैमरों की रिकार्डिग बंद क्यों करानी पड़ी?

मुख्यमंत्री आवास पर 19 फरवरी की रात दिल्ली के मुख्य सचिव से मारपीट होने के बाद केजरीवाल ने 26 फरवरी को कैबिनेट बैठक की रिकार्डिंग कराने की घोषणा की थी, लेकिन मात्र चार महीने में ही सरकार ने अपने निर्णय को बदल दिया। 

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