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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में शुरू हुई स्ट्रॉबेरी की खेती

आपदा में अवसर को कैसे प्राप्त किया जाता है इसका ताजा उदाहरण पीएम नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में देखने को मिल रहा है, जहां दो युवाओं ने वह कर दिखाया जो बनारस में अब तक किसी किसान ने नहीं किया था.

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खास बात यह है कि दोनों युवा कॉर्पोरेट कंपनी में नौकरी किया करते थे, जिसे छोड़कर अब यह किसान बन गए और उन्होंने बनारस में पहली बार स्ट्रॉबेरी की खेती शुरू की है. अब वे दूसरों को रोजगार देने के साथ-साथ खुद भी अच्छा खासा कमा रहे हैं.

वाराणसी में इन दिनों दो युवा युवाओं के लिए रोल मॉडल बन रहे हैं. ये युवा हैं वाराणसी के डाफी में रहने वाले रमेश मिश्रा और उनके मित्र मदन मोहन. यह दोनों युवा बीएचयू से पास आउट होकर अच्छा खासा कॉर्पोरेट कंपनी में नौकरी कर रहे थे,

लेकिन कोरोना काल में इन्होंने अपनी नौकरी गंवा दी. नौकरी गंवाने के बाद ये हताश नहीं हुए बल्कि इन्होंने आपदा में भी अवसर तलाश लिए. दोनों ने डाफी स्थित ही गांव में एक एकड़ की जमीन लीज पर लेकर उन्होंने स्ट्रॉबेरी की खेती शुरू की. आज इस खेत से उपजे हुए स्ट्रॉबेरी बनारस के बाजारों में 300 रुपए किलो में बिक रहे हैं.

रमेश मिश्रा बताते हैं कि जब लॉकडाउन के दौरान नौकरी गई तो उन्होंने स्ट्रॉबेरी की खेती करने की सोची. इसके बारे में उन्होंने सुना था, लेकिन इसकी जानकारी उन्हें नहीं थी.

वाराणसी में पहली बार स्ट्रॉबेरी की खेती शुरू हुई, लाखों की कमाई हो रही है -  i7 News

उनके जानने वाले पुणे में रहते थे, जहां स्ट्रॉबेरी की खेती के बारे में वह अच्छे से जानते थे. उन्होंने फोन पर बात कर पूरी जानकारी ली और खेती के गुर सीखे. उसके बाद उन्होंने बनारस में डाफी स्थित खेत को लीज पर लिया और स्ट्रॉबेरी की खेती शुरू कर दी.

आज इस खेती के जरिए यह दोनों युवा अच्छी कमाई कर रहे हैं. साथ ही लगभग 10 से 12 लोगों को इन्होंने अपने खेत में रोजगार भी दिया है. अपने खेतों की उपजे हुए स्ट्रॉबेरी को यह वाराणसी के बाजारों में ही बेचते हैं.

आगे का प्लान यह है कि यह स्ट्रॉबेरी पूर्वांचल के बाजारों में भी जाए. हालांकि उनका कहना है कि इसमें कुछ दिन लगेगा, लेकिन उन्होंने दावा किया है कि अगर स्ट्रॉबेरी की खेती अच्छे से की जाए और युवा इसे ठीक से समझे तो वह कामयाबी हासिल कर सकते हैं.

इन दो युवाओं के इस नए प्रयास ने वाराणसी के रहने वाले युवाओं को भी खासा संदेश दिया है. संदेश इस बात का कि यदि आपदा आती है तो उससे घबराए नहीं, बल्कि एक वैकल्पिक रास्ता तैयार रखें ताकि आपको गिरने का मौका ना मिले और आप उस वैकल्पिक रास्ते के माध्यम से जीवन में एक नए मार्ग पर कामयाब हो सकें.

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