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कल मनेगा लालू का 71वां जन्मदिन, जानिए क्‍या-क्‍या है तैयारी

 राजद प्रमुख लालू प्रसाद सोमवार को 71वें वर्ष में प्रवेश कर जाएंगे। इस मौके पर तेजस्वी यादव के आवास पांच देशरत्न मार्ग में समारोह का आयोजन किया जाएगा। राजद के प्रदेश अध्यक्ष रामचंद्र पूर्वे ने बताया कि पार्टी की ओर से लालू प्रसाद की उम्र के बराबर 71 पाउंड का केक तैयार किया गया है, जिसे नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव एवं विधायक तेज प्रताप यादव काटेंगे। समारोह का आयोजन दोपहर 11.30 बजे किया जाएगा।

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बता दें कि चारा घोटाला मामले में सजायाफ्ता लालू यादव अभी चिकित्सकीय आधार पर छह हफ्ते के लिए जमानत पर बाहर हैं। उनका इलाज मुंबई के एशियन हार्ट इंस्टीट्यूट में किया जा रहा है।

रविवार को रक्तदान

लालू के जन्मदिन की पूर्व संध्या पर राजद कार्यालय में दोपहर 12 बजे रक्तदान शिविर का आयोजन किया गया है। इस दौरान राजद के प्रदेश अध्यक्ष रामचंद्र पूर्वे एवं प्रदेश प्रधान महासचिव आलोक मेहता मौजूद रहेंगे।

बता दें कि पिछले साल राजद प्रमुख लालू प्रसाद के 70वें जन्मदिन पर पार्टी कार्यकर्ताओं ने 70 पाउंड का केक बनवाया था। प्रदेश अध्यक्ष डॉ. रामचंद्र पूर्वे के नेतृत्व में केक लेकर नेता-कार्यकर्ता लालू के निवास पर गए। लालू ने पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी एवं कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष की मौजूदगी में केक काटा था।

एक साधारण परिवार में पैदा हुए थे लालू

लालू यादव आज देश की राजनीति में वे अपना खास स्‍थान रखते हैं। लेकिन, बिहार के गोपालगंज स्थित फुलवरिया गांव में बचपन के गरीबी भरे दौर में उन्‍होंने शायद इसकी कल्‍पना नहीं की होगी। तब उनके पास शिक्षा को फीस देने के लिए पैसे नहीं होते थे। कुछ बड़े हुए तो रोटी के जुगाड़ में उन्‍हाेंने रिक्‍शा भी चलाया था।

फीस देने के लिए नहीं थे पैसे

लालू का जन्‍म गोपालगंज जिले के फुलवरिया गांव में हुआ था। उन्‍होंने माड़ीपुर गांव के स्कूल से पढ़ाई शुरू की। तब लालू के पास फीस देने के लिए पैसे नहीं थे। इस कारण वे हर शनिवार को रस्सी-पगहा और गुड़-चावल फीस के रूप में शिक्षक को देते थे।

लालू के भाई मुकुन्द चौधरी पटना में मजदूरी करने आए। वे लालू को भी साथ लेते आए। पटना के शेखपुरा मोड़ के मध्‍य विद्यालय में लालू का नामांकन कराया गया। पूरा परिवार पटना वेटरनरी कॉलेज के एक कमरे के शौचालयविहीन क्वार्टर में रहने लगा। परिवार के पास लालटेन के लिए केरोसिन तेल खरीदने का पैसा नहीं था, इसलिए रूम में अंधेरा पसरा रहता था। ऐसे में लालू वेटरनरी कॉलेज के बरामदे में पढ़ते थे।

स्कूल के पुअर ब्वायज फंड से पैसे मिले तो पढ़ाई में सुविधा हुई। पढ़ाई जारी रहे, इसलिए लालू कभी रिक्शा चलाते थे। वे चाय की दुकान पर मजदूरी भी करते थे।

डॉक्‍टर बनने का था सपना

लालू प्रसाद ने पटना विवि से बीए-एलएलबी किया। हालांकि, वे बचपन में डॉक्टर बनने का सपना देखते थे। यह सपना टूट गया तो दोस्‍तों की सलाह से एलएलबी में एडमिशन ले लिया और वकील बन गए।

 

जेपी आंदोलन में हुए शामिल

लालू छात्र जीवन से ही राजनीति में सक्रिय रहे। 1971 में लालू प्रसाद पटना विवि छात्र संघ के चुनाव में शामिल होकर संघ के महासचिव बने। फिर, जयप्रकाश नारायण की संपूर्ण क्रांति से जुड़े। आपातकाल के दौरान गिरफ्तार होकर जेल भी गए। संपूर्ण क्रांति के दौरान एक बार उनके मरने की अफवाह फैल गई थी।

18 मार्च 1974 को आंदोलन हिंसक हो गया था। छात्र सड़कों पर उतर आए थे। उनमें लालू भी शामिल थे। आंदोलन रोकने के लिए सेना के जवान सड़क पर उतर आए और लालू की पिटाई की। इसी दौरान अफवाह फैल गई कि सेना की गई पिटाई में लालू की मौत हो गई है।

बनाते गए राजनीति में मुकाम

जेपी आंदोलन के दौरान लालू ने अपनी छवि एक जुझारू नेता के रूप में बना ली। आगे1977 में आम चुनाव हुआ तो लालू सांसद चुने गए। फिर,1980-1985 में विधायक रहे। 1990 में लालू बिहार के मुख्‍यमंत्री बन गए। चारा घोटाला में जेल गए। जेल से निकलने के बाद फिर मुख्‍यमंत्री बने। केंद्र में मंत्री रहे और अब उनके दोनों बेटे बिहार की राजनीति में अहम स्‍थान बना चुके हैं

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