LIVE TVउत्तर प्रदेशबड़ी खबर

शिक्षक समाज की चेतना और युग निर्माता, शिक्षक विद्यार्थियों को शिक्षा, नई पीढ़ीको संस्कार, दिशा और राष्ट्र के प्रति समर्पण का भाव प्रदान करता: मुख्यमंत्री

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी ने कहा कि शिक्षक समाज की चेतना और युग निर्माता होता है। शिक्षक केवल विद्यार्थियों को शिक्षा देने का कार्य नहीं करता, बल्कि वह नई पीढ़ी को संस्कार, दिशा और राष्ट्र के प्रति समर्पण का भाव प्रदान करता है। जब भारत का शिक्षक जागृत होकर अपने दायित्वों का ईमानदारी से निर्वहन करता है, तो भारत को विश्वगुरु बनने में देर नहीं लगेगी।
मुख्यमंत्री जी आज यहां अखिल विश्व गायत्री परिवार शान्तिकुंज, हरिद्वार के तत्वावधान में आयोजित प्रान्तीय शिक्षक गरिमा कार्यशाला में अपने विचार व्यक्त कर रहे थे। मुख्यमंत्री जी ने संस्था के संस्थापक पं0 श्रीराम शर्मा आचार्य जी तथा उनकी साधना की अभिन्न सहयोगी माता भगवती देवी जी की स्मृतियों को नमन करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की तथा दीप प्रज्वलित कर कार्यशाला का शुभारम्भ किया। उन्होंने भारतीय संस्कृति ज्ञान परीक्षा में उत्तर प्रदेश में टॉप-10 रहे विद्यालयों के शिक्षकों का सम्मान तथा ‘युग निर्माताओं से युग ऋषि का आह्वान’ स्मारिका का विमोचन किया।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि आज का कार्यक्रम अत्यन्त प्रेरणादायी है। लगभग 100 वर्ष पूर्व पं0 श्रीराम शर्मा आचार्य जी ने अपनी साधना के माध्यम से भारतीय संस्कृति, सनातन मूल्यों और भारतीय परम्पराओं के प्रति आस्था रखने वाले एक ऋषि के रूप में अपना जीवन समर्पित किया। उन्होंने मथुरा से अपनी साधना प्रारम्भ की और हरिद्वार में इस पवित्र संस्था की स्थापना कर देश की सांस्कृतिक चेतना को जागृत करने का अभियान आगे बढ़ाया। आज उसी अभियान का नेतृत्व डॉ0 प्रणव पण्ड्या जी के मार्गदर्शन में किया जा रहा है। अखिल विश्व गायत्री परिवार ने यज्ञों के माध्यम से सर्वसमाज को एक मंच, एक वेदी पर बैठाकर सामाजिक एकता का आदर्श उदाहरण प्रस्तुत करने का अभिनन्दनीय कार्य किया है।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि वर्ष 1923 में गोरखपुर गीता प्रेस, वर्ष 1925 में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और वर्ष 1926 में अखिल विश्व गायत्री परिवार की स्थापना हुई। तीनों संस्थाओं के रास्ते और कार्यक्षेत्र अलग-अलग रहे, लेकिन तीनों ने जनचेतना को जागृत करने, समाज को सनातन मूल्यों से जोड़ने तथा भारत और भारतीयता का एहसास कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इन संस्थाओं ने युवाओं को देश की स्वतंत्रता और राष्ट्र के प्रति समर्पित भाव से कार्य करने के लिए प्रेरित किया। गायत्री परिवार के संस्थापक पं0 श्रीराम शर्मा आचार्य जी स्वयं स्वतंत्रता संग्राम सेनानी भी रहे।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि अनेक ऋषियों ने भौतिक शक्ति के साथ आध्यात्मिक शक्ति की आवश्यकता को समझा और अपनी साधना के माध्यम से समाज में नई चेतना का संचार किया। सृष्टि के प्रथम मंत्र के रूप में गायत्री मंत्र का विशेष महत्व है। महर्षि विश्वामित्र द्वारा रचित यह मंत्र परमपिता परमेश्वर के तेज से जुड़ने का आह्वान करता है। इसी पवित्र मंत्र की शक्ति को समाज तक पहुंचाने के उद्देश्य से गायत्री परिवार का विस्तार हुआ।


मुख्यमंत्री जी ने कहा कि पं0 श्रीराम शर्मा आचार्य जी संगठन का नाम अपने नाम पर रख सकते थे, लेकिन उन्होंने व्यक्ति से बड़ा परिवार और विचार को महत्व दिया। व्यक्ति समाप्त हो सकता है, लेकिन विचार समाप्त नहीं होता। शब्द ब्रह्म है और अखिल विश्व गायत्री परिवार उस विचार का प्रतीक है। यज्ञ की वेदी पर पूरे समाज को एक साथ जोड़कर ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ की भावना को आगे बढ़ाने का कार्य अत्यन्त पवित्र है।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि आज परिवार व्यवस्था के सामने अनेक चुनौतियां हैं। पहले संयुक्त परिवार हमारी सबसे बड़ी ताकत थे। सुख-दुःख और संकट के समय पूरा परिवार एक साथ खड़ा होता था, लेकिन आज परिवार सीमित और विभाजित होते जा रहे हैं। ऐसी स्थिति में समाज को जोड़ने वाली संस्थाओं की भूमिका और अधिक महत्वपूर्ण हो जाती है। गायत्री परिवार ने इस दिशा में भी सराहनीय कार्य किया है। आज छोटे बच्चे भी गायत्री मंत्र का उच्चारण करते दिखाई देते हैं। नई पीढ़ी को संस्कारों से जोड़ने और सामाजिक बिखराव को रोकने की जिम्मेदारी भी गायत्री परिवार को उठानी होगी।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि पं0 श्रीराम शर्मा आचार्य उन महापुरुषों में थे, जिन्होंने धर्म को विज्ञान के साथ जोड़कर देखा। उन्होंने दोनों को अलग-अलग मार्ग नहीं माना, बल्कि धर्म और विज्ञान को एक-दूसरे का सहयोगी माना। आज डॉ0 चिन्मय पण्ड्या जी स्वयं मॉडर्न मेडिसिन के चिकित्सक होने के साथ अखिल विश्व गायत्री परिवार के संचालन और उसके अभियान को आगे बढ़ा रहे हैं।
भारत की प्राचीन गुरुकुल एवं ऋषि परम्परा का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री जी ने कहा कि भारत के श्रेष्ठ आचार्यों की परम्परा ने तक्षशिला और नालन्दा जैसे विश्वविख्यात विश्वविद्यालय दिए। चाणक्य और चन्द्रगुप्त की जोड़ी, महर्षि वशिष्ठ और श्रीराम, महर्षि संदीपन तथा श्रीकृष्ण-सुदामा की परम्परा भारत की गुरु-शिष्य परम्परा की महानता को दर्शाती है। इस परम्परा को जीवन्त बनाए रखने की आवश्यकता है।
मुख्यमंत्री जी ने गायत्री परिवार द्वारा युवाओं के लिए चलाए जा रहे अभियान का उल्लेख करते हुए कहा कि संस्था ने युवाओं की प्रतियोगिता आयोजित की और शिक्षक समाज भी उससे जुड़ा। 11 लाख से अधिक छात्र-छात्राएं इससे जुड़े हैं। हमें अपनी युवा पीढ़ी को आगे बढ़ाना, उसका मार्गदर्शन करना और उसे प्रतियोगिता के योग्य बनाना है। आज का युवा ही भारत के भाग्य का विधाता बनने वाला है।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि हमें तय करना होगा कि हम कैसा भारत चाहते हैं। क्या ऐसा भारत जो बिखरा हुआ, जातीय खेमों में विभाजित और आपस में लड़ता रहे। अथवा ऐसा भारत जो एक हो और श्रेष्ठ भारत हो। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने एक भारत, श्रेष्ठ भारत का जो संकल्प दिया है, उसे साकार करने के लिए हम सभी को मिलकर कार्य करना होगा।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि स्वतंत्रता के कालखण्ड में भी एक वर्ग समाज को बांटने का कार्य कर रहा था, जबकि दूसरा वर्ग समाज को जोड़ते हुए उसी एकता की ताकत पर स्वतंत्रता की हुंकार को मजबूत कर रहा था। आज भी हमारे समाज में जाति, क्षेत्र, भाषा तथा विभिन्न प्रकार के वादों के आधार पर समाज की एकता को छिन्न-भिन्न करने का प्रयास करने वाली शक्तियां मौजूद हैं। इन शक्तियों द्वारा किया गया यह कार्य भारत माता, अपने पूर्वजों और देश की स्वतंत्रता के प्रति एक गम्भीर अपराध एवं शरारतपूर्ण चेष्टा है। जब राष्ट्र के सामने इस प्रकार का संकट दिखाई देता है, तब शिक्षक समाज की जिम्मेदारी और बड़ी हो जाती है कि वह विभाजनकारी ताकतों को किसी भी स्थिति में सफल न होने दे।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि यज्ञ की वेदी हमें ‘इदम् न मम्’ के भाव के साथ जोड़ती है। यज्ञ की भावना यह है कि यह मेरा नहीं है। यह सभी प्रकृति का है। प्रकृति के प्रति इस समाज का जो माहौल है वह हम सभी को जोड़ने की नई प्रेरणा दे रहा है। प्रकृति किसी के साथ भेदभाव नहीं करती। सूर्य अपनी रोशनी एवं वृक्ष फल देने में भेदभाव नहीं करता। वृक्ष निरन्तर ऑक्सीजन का उत्सर्जन कर रहा है। गंगा मैया भी किसी के साथ भेदभाव नहीं करतीं।
मुख्यमंत्री जी नेे कहा कि हमारी संस्कृति हमें सिखाती है कि प्रकृति से जितना लेते हैं, उससे अधिक उसके संरक्षण के लिए समर्पित करें। यज्ञ के माध्यम से मिलने वाला यही भाव समाज को जोड़ने, सामाजिक एकता के माध्यम से राष्ट्रीय एकता को मजबूत करने की प्रेरणा देता है। इसमें शिक्षक समाज की बड़ी भूमिका हो सकती है।
मुख्यमंत्री जी ने पर्यावरण संरक्षण के प्रति प्रदेश सरकार की प्रतिबद्धता का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री जी ने ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान को आगे बढ़ाया है। इसी भावना के साथ उत्तर प्रदेश सरकार ने वर्ष 2017 से वर्ष 2026 तक प्रदेश में अब तक 275 करोड़ पौधरोपण का कार्य किया है। इस वर्ष भी 35 करोड़ पौधे लगाए गए हैं। सरकार केवल पौधरोपण तक सीमित नहीं है, बल्कि उनके संरक्षण और सुरक्षा की व्यवस्था भी सुनिश्चित कर रही है। इसके लिए दो संस्थाओं फॉरेस्ट रिसर्च इन्स्टीट्यूट, देहरादून और गुरु घासीदास विश्वविद्यालिय, छत्तीसगढ़ को थर्ड पार्टी के रूप में लगाया गया है, जो पौधरोपण एवं संरक्षण की स्थिति की रिपोर्ट देती हैं।
आज नदियों का प्रदूषण एक बड़ी चुनौती है। अपने स्वार्थ के लिए नदी संस्कृति को नुकसान पहुंचाया गया है। यदि जीवनदायिनी नदियां नहीं रहेंगी तो जीवन सृष्टि के सामने नया संकट खड़ा हो जाएगा। नदियों की भूमिका उसी प्रकार है, जैसे हमारे शरीर में धमनियों की होती है। इसलिए इन्हें बचाना और अविरल एवं निर्मल बनाना आवश्यक है।
मुख्यमंत्री जी ने एक जनपद में वर्षों पूर्व सूख चुकी नदी के पुनर्जीवन का उदाहरण देते हुए कहा कि सेटेलाइट मैपिंग से नदी की पुरानी तस्वीरें निकाली गईं और उसके अनुरूप खुदाई का कार्य कराया गया। कार्य पूर्ण होने के बाद वर्षा हुई और वहां फिर से जलधारा प्रवाहित हुई। उन्होंने इसे पूर्वजों की तपस्या और उनके आशीर्वाद का परिणाम बताते हुए कहा कि कृतज्ञता का भाव हमारी सबसे बड़ी ताकत है।
मुख्यमंत्री जी ने गायत्री परिवार के स्वयंसेवकों तथा प्रदेशभर से आए शिक्षकों से आह्वान किया कि गायत्री परिवार ने पिछले 100 वर्षों में यज्ञ की वेदी के माध्यम से समाज की चेतना को जागृत करने में बड़ी भूमिका निभाई है, लेकिन पं0 श्रीराम शर्मा आचार्य जी और माता भगवती देवी जी के आगामी 100 वर्षों के लक्ष्य को अभी से निर्धारित करना होगा। डॉ0 चिन्मय पण्ड्या जी जैसे सहज, सरल और दूरदर्शी नेतृत्व तथा डॉ0 प्रणव पण्ड्या जी के मार्गदर्शन में संस्था को अभी से अपने लक्ष्य निर्धारित करने होंगे। 100 वर्षों में गायत्री परिवार भारत में प्रत्येक जगह पहुंचा है और बड़े आयोजनों के माध्यम से समाज को जोड़ा है। अब अगले 100 वर्षों में पूरी दुनिया में तनाव और संघर्ष से जूझ रही मानवता के जीवन में नई रोशनी लाने के लिए वर्ष 1926 में पं0 श्रीराम शर्मा आचार्य द्वारा प्रज्वलित किए गए दीप को और व्यापक रूप से प्रज्वलित करना होगा।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि प्रदेश के शिक्षक इस कार्यशाला में प्राप्त संदेशों और विचारों को निश्चित समय-सीमा में धरातल पर उतारकर युवा पीढ़ी को सही दिशा देने का कार्य करेंगे। गायत्री परिवार के संस्थापकों की भावनाओं के अनुरूप इस पवित्र अभियान में शिक्षकों की सहभागिता नई पीढ़ी के निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान दे सकती है। योग इसका एक उदाहरण है। प्रधानमंत्री जी के प्रयासों से योग को वैश्विक स्तर पर मान्यता मिली। आज 21 जून को विश्व के लगभग 190 देशों के लोग अन्तरराष्ट्रीय योग दिवस के आयोजन से जुड़ते हैं और भारत की ऋषि परम्परा के प्रति कृतज्ञता ज्ञापित करते हैं। यह सभी भारत की धरोहर है और भारत को अपनी इस धरोहर पर गौरव की अनुभूति कराने तथा दुनिया का नेतृत्व करने की दिशा में अपनी तैयारी करनी होगी।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि प्रधानमंत्री जी ने देश को स्वतंत्रता के शताब्दी महोत्सव का संकल्प दिया है। इसके लिए गुलामी की मानसिकता को त्यागना, अपनी विरासत पर गौरव की अनुभूति करना, सामाजिक समता के लिए कार्य करना, विकसित भारत के संकल्प को आगे बढ़ाना तथा नागरिक कर्तव्यों का एहसास करना आवश्यक है। प्रत्येक व्यक्ति अधिकारों से अधिक अपने कर्तव्यों को महत्व दे। यदि प्रत्येक व्यक्ति अपने कर्तव्यों के प्रति ईमानदार हो जाए, तो दुनिया की कोई ताकत भारत की ओर आंख उठाकर नहीं देख सकती। भारत तब दुनिया का नेतृत्व करता हुआ दिखाई देगा।
इसके लिए यज्ञ के पवित्र भाव को ‘इदम् न मम’ से ऊपर उठाकर ‘इदम् राष्ट्राय स्वाहा’ के भाव के साथ राष्ट्र के प्रति समर्पण में परिवर्तित करना होगा। हमारे पास जो कुछ भी है, वह राष्ट्र के नाम समर्पित करने की भावना के साथ कार्य करने पर ही सफलता प्राप्त होगी। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि वर्ष 2047 में जब भारत की स्वतंत्रता के 100 वर्ष पूरे होंगे, तो उस समय का भारत हम सभी के लिए गौरव और अभिभूत करने वाला भारत होगा।
कार्यक्रम को विधायक डॉ0 राजेश्वर सिंह तथा देव संस्कृति विश्वविद्यालय शान्तिकुंज हरिद्वार के प्रति कुलपति डॉ0 चिन्मय पण्ड्या ने भी सम्बोधित किया।
इस अवसर पर जल शक्ति मंत्री श्री स्वतंत्र देव सिंह, विधान परिषद सदस्य डॉ0 महेन्द्र सिंह सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।

Related Articles

Back to top button