मुख्यमंत्री ने टी0ओ0आई0 यूथ आइकॉन्स समिट एण्ड अवॉर्ड्स-2026 में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले 37 यूथ आइकॉन्स को सम्मानित किया

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी ने कहा कि सरकार की जिम्मेदारी अवसर उपलब्ध कराना है, लेकिन उन अवसरों का उपयोग कर सफलता हासिल करने के लिए युवाओं को स्वयं मेहनत करनी होगी। युवा अपना लक्ष्य तय करें, कौशल विकसित करें और प्रदेश की सम्भावनाओं का लाभ उठाते हुए आगे बढ़ें। मुख्यमंत्री जी आज यहां टाइम्स ऑफ इण्डिया द्वारा आयोजित टी0ओ0आई0 यूथ आइकॉन्स समिट एण्ड अवॉर्ड्स-2026 यू0पी0 चैप्टर में अपने विचार व्यक्त कर रहे थे। इस अवसर पर उन्होंने विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले 37 यूथ आइकॉन्स को सम्मानित किया। इनमें खेल, उद्यमिता, कला-संस्कृति, सामाजिक कार्य तथा डिजिटल क्रिएशन सहित विभिन्न सेक्टरों से जुड़े युवा शामिल रहे। मुख्यमंत्री जी ने उत्तर प्रदेश सकारात्मक बदलाव के 09 वर्ष पुस्तक का विमोचन भी किया।
मुख्यमंत्री जी ने सम्मानित युवाओं को बधाई देते हुए कहा कि इनकी उपलब्धियां लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा हैं। ऐसे आयोजन युवाओं की प्रतिभा को पहचान देने के साथ ही उनके सामने भविष्य की नई सम्भावनाओं के द्वार खोलते हैं। ऐसे मंच युवाओं की उपलब्धियों को पहचान देने और नई पीढ़ी को प्रेरित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। यूथ आइकॉन्स को दिया जा रहा सम्मान केवल औपचारिकता नहीं है। यह लाखों युवाओं को प्रेरित करने का माध्यम है। खेल, स्टार्टअप, उद्यमिता, कला, संस्कृति, सामाजिक कार्य और डिजिटल क्रिएशन जैसे क्षेत्रों में काम करने वाले युवा अपनी मेहनत और नवाचार से समाज में बदलाव ला सकते हैं। सरकार का प्रयास है कि युवाओं के मन में निराशा और हताशा के स्थान पर आत्मविश्वास और भविष्य के प्रति आशा हो। जब किसी खिलाड़ी को पदक जीतने पर सरकारी सेवा में अवसर तथा उद्यमी को स्टार्टअप के लिए सहायता मिलती है, तो इससे अन्य युवाओं के सामने भी नए रास्ते खुलते हैं।

मुख्यमंत्री जी ने सोशल मीडिया पर प्रचलित बिफोर एण्ड आफ्टर रील का उदाहरण देते हुए साढ़े नौ वर्ष में बदले उत्तर प्रदेश की कहानी आठ प्रतीकात्मक फ्रेम्स के जरिये बताई। पहले फ्रेम में उन्होंने प्रदेशवासियों के समक्ष उत्पन्न पहचान का संकट और यहां की सुरक्षा व्यवस्था, दूसरे में सरकारी भर्तियों में सिफारिश के स्थान पर योग्यता को अवसर, तीसरे में देश के लिए पदक लाओ और पद पाओ के आधार पर खिलाड़ियों को सरकारी नौकरियां में भर्ती और चौथे में युवाओं के जॉब-सीकर के स्थान पर जॉब-गिवर बनने की बात रखी। पांचवें फ्रेम में टेक्नोलॉजी और आर्टिफिशियल इण्टेलीजेन्स, छठे में लगातार बढ़ती अर्थव्यवस्था तथा विमेन वर्कफोर्स की भागीदारी, निवेश और बुनियादी ढांचे, सातवें में आस्था और पर्यटन से बढ़ता रोजगार तथा आठवें फ्रेम में विकसित भारत के निर्माण में युवाओं की भूमिका को सामने रखा।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि उत्तर प्रदेश की यह यात्रा युवाओं के विश्वास और अवसरों में आए बदलाव की कहानी भी है। आज के डिजिटल युग में सोशल मीडिया पर रील और ट्रेण्ड का प्रभाव बढ़ा है। लेकिन युवाओं को रील लाइफ से रियल लाइफ की ओर बढ़ने, अपनी प्रतिभा को वास्तविक उपलब्धियों में बदलने और समाज व देश के लिए योगदान देने का संकल्प लेना होगा। आज का उत्तर प्रदेश युवाओं को अवसर, सुरक्षा, सम्मान और आगे बढ़ने के लिए अनुकूल वातावरण उपलब्ध कराने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि वह विगत लगभग साढ़े नौ वर्षों में उत्तर प्रदेश में आए बदलावों की एक ऐसी तस्वीर प्रस्तुत करना चाहते हैं, जिसमें राज्य की पुरानी चुनौतियों और वर्तमान सम्भावनाओं के बीच बिफोर एण्ड आफ्टर का अंतर स्पष्ट दिखाई दे। 2017 से पहले उत्तर प्रदेश के सामने दो बड़ी चुनौतियां थीं-पहचान का संकट और सुरक्षा का संकट। उस समय प्रदेश के बाहर उत्तर प्रदेश के लोगों को अपनी पहचान छिपाने की मजबूरी महसूस होती थी और प्रदेश के भीतर भी सुरक्षा को लेकर आशंकाएं रहती थीं। बेटियों की शिक्षा, निवेश, उद्योग, रोजगार और बुनियादी सुविधाओं को लेकर अनेक चुनौतियां थीं। उस समय प्रदेश के कई क्षेत्रों में बिजली की उपलब्धता सीमित थी। कई गांवों में बिजली आने का इंतजार करना पड़ता था और लोगों को मोबाइल फोन चार्ज करने के लिए दूसरे गांव तक जाना पड़ता था।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि वर्ष 2017 के बाद राज्य सरकार ने कानून-व्यवस्था को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए ‘जीरो टॉलरेंस पॉलिसी’ लागू की। इस नीति से अपराध और माफिया के विरुद्ध कार्रवाई को गति मिली। आज उत्तर प्रदेश में पहले की तरह माफिया और अपराधियों के प्रभाव को स्वीकार करने की स्थिति नहीं है। उन्होंने इसे प्रदेश की बदली हुई कार्य-संस्कृति और कानून-व्यवस्था के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता का परिणाम बताया।

उत्तर प्रदेश की पहचान अब केवल उसकी पुरानी समस्याओं से नहीं, बल्कि उसके उत्पादों, प्रतिभाओं, उद्योगों, टेक्नोलॉजी और विकास की सम्भावनाओं से हो रही है। उन्होंने लखनऊ की चिकनकारी का उदाहरण देते हुए कहा कि राज्य के प्रत्येक जनपद के पास कोई न कोई विशिष्ट उत्पाद और परम्परागत कौशल है। एक जनपद, एक उत्पाद योजना के माध्यम से इन उत्पादों को पहचान और बेहतर बाजार उपलब्ध कराने का प्रयास किया गया है। इससे परंपरागत कारीगरों, हस्तशिल्पियों और स्थानीय उद्यमियों को नए अवसर मिले हैं।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि उत्तर प्रदेश में लगभग 96 लाख एम0एस0एम0ई0 इकाइयां हैं। राज्य सरकार इन इकाइयों को पांच लाख रुपये तक के सुरक्षा बीमा कवर की सुविधा उपलब्ध करा रही है। एम0एस0एम0ई0 सेक्टर के माध्यम से प्रदेश में 3.25 करोड़ से अधिक लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार मिला है। यह स्थानीय उत्पादन, आत्मनिर्भरता और रोजगार सृजन की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान है।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि प्रदेश में सरकारी नियुक्तियों की प्रक्रिया में पारदर्शिता और मेरिट को प्राथमिकता दी गई है। वर्ष 2017 से पहले नियुक्तियों में सिफारिश और लेन-देन की शिकायतें सामने आती थीं। उनकी सरकार ने इस स्थिति को बदलने का प्रयास किया और पिछले लगभग साढ़े नौ वर्षों में करीब 9.5 लाख युवाओं को सरकारी नियुक्तियां प्रदान कीं।
राज्य सरकार ने अगले 06 महीनों में 01 लाख युवाओं को सरकारी नौकरी उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा है। लगभग 4,500 सब-इंस्पेक्टरों की भर्ती प्रक्रिया पूरी होने के बाद अगले सप्ताह नियुक्ति पत्र वितरित करने की तैयारी है। इसके अतिरिक्त 32,000 से अधिक पुलिस कांस्टेबलों और 42,000 होमगार्ड जवानों की भर्ती प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। इनकी नियुक्ति पत्र शीघ्र जारी करने वाले हैं। उन्होंने उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग के माध्यम से 25,000 से अधिक नियुक्तियों की प्रक्रिया का उल्लेख किया।
मुख्यमंत्री जी शिक्षा आयोग और उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग से सम्बन्धित भर्ती प्रक्रियाओं का जिक्र करते हुए कहा कि विभिन्न आयोगों के माध्यम से नियुक्तियों की प्रक्रिया आगे बढ़ रही है। आज उत्तर प्रदेश में प्रतिभा और मेरिट को सम्मान मिल रहा है। युवाओं को यह विश्वास होना चाहिए कि परिश्रम और योग्यता के आधार पर वे अपना भविष्य बना सकते हैं।
मुख्यमंत्री जी ने अग्निवीर योजना का उल्लेख करते हुए कहा कि चार वर्ष तक देश की सीमाओं की सुरक्षा करने के बाद लौटने वाले युवाओं के लिए उत्तर प्रदेश पुलिस, फायर सर्विस, वन विभाग और शासन के अन्य विभागों में नियुक्ति के अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में व्यवस्था की गई है। इससे देश की सेवा कर चुके युवाओं के कौशल और अनुभव का उपयोग किया जाएगा।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि खेलों में प्रतिभा रखने वाले युवाओं को पहले अनेक बार अपने भविष्य को लेकर अनिश्चितता का सामना करना पड़ता था। अब राज्य सरकार ने खिलाड़ियों को प्रोत्साहित करने के लिए नीति अपनाई है-‘देश के लिए पदक लाओ और उत्तर प्रदेश में पद पाओ।’ एथलीट सुश्री पारुल चौधरी को देश के लिए पदक जीतने के बाद उन्हें उत्तर प्रदेश में डिप्टी एसपी का पद उपलब्ध कराया गया। सुश्री पारुल चौधरी ने वर्ष 2023 में देश के लिए मेडल जीता और वर्ष 2024 में उन्हें डिप्टी एसपी का पद प्रदान किया गया। इस प्रकार के अवसर खिलाड़ियों को भरोसा देते हैं कि देश के लिए उत्कृष्ट प्रदर्शन करने पर उनके सामने सम्मानजनक भविष्य के रास्ते खुल सकते हैं।
मुख्यमंत्री जी ने हॉकी खिलाड़ी श्री राजकुमार पाल का उल्लेख करते हुए कहा कि गाजीपुर के एक साधारण परिवार से आने वाले श्री पाल ने निजी अकादमी में हॉकी का प्रशिक्षण लिया और देश के लिए पदक जीतने तक का सफर तय किया। राज्य सरकार ने उन्हें भी डिप्टी एसपी का पद उपलब्ध कराया। इसी प्रकार, ओलम्पिक में भारत के लिए पदक जीतने वाले हॉकी खिलाड़ी श्री ललित उपाध्याय को भी पद प्रदान किया गया।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि सरकार अब तक लगभग 1,400 खिलाड़ियों को नियुक्ति पत्र दे चुकी है। इन खिलाड़ियों को किसी सामान्य आयोग या बोर्ड की प्रक्रिया के बजाय उनके खेल प्रदर्शन और पदक के आधार पर अवसर उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई है, ताकि वे भविष्य की चिंता से मुक्त होकर अभ्यास और प्रदर्शन पर ध्यान केन्द्रित कर सकें। उन्होंने कॉमनवेल्थ गेम्स में स्वर्ण पदक जीतने वाली सुश्री अस्मिता डे का भी उल्लेख किया। ऐसी प्रतिभाएं, जिन्हें पहले पर्याप्त पहचान नहीं मिल पाती थी, आज सम्मान प्राप्त कर रही हैं और आगे बढ़ रही हैं। मुख्यमंत्री जी ने सभी खिलाड़ियों से अपनी मेहनत जारी रखने तथा नई पीढ़ी को प्रेरित करने का आह्वान किया।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि उत्तर प्रदेश में युवाओं की भूमिका बदल रही है। अब युवा केवल नौकरी पाने की प्रतीक्षा नहीं कर रहे, बल्कि अपने स्टार्टअप स्थापित कर दूसरे लोगों के लिए रोजगार के अवसर भी तैयार कर रहे हैं। वर्ष 2017 से पहले प्रदेश में लगभग 120 स्टार्टअप थे, जबकि आज इनकी संख्या बढ़कर लगभग 25,000 हो गई है। राज्य सरकार ने नए स्टार्टअप को सहायता देने के लिए 1,000 करोड़ रुपये का फण्ड ऑफ फण्ड्स बनाया है। इसके माध्यम से नए उद्यमों को प्रोत्साहन देने, उन्हें आगे बढ़ाने और उनके लिए वित्तीय सहायता की सम्भावनाएं विकसित करने का प्रयास किया जा रहा है।
‘मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास अभियान’ का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री जी ने कहा कि इसके अन्तर्गत प्रत्येक वर्ष एक लाख युवाओं को उद्यम स्थापित करने के लिए ऋण सुविधा उपलब्ध कराने का लक्ष्य है। इस योजना में ब्याज और गारण्टी से जुड़ी राहत के साथ सरकार की ओर से सब्सिडी का प्रावधान भी है। सरकार को युवाओं के सपनों पर भरोसा है और इसी भरोसे के आधार पर उद्यमिता को आगे बढ़ाया जा रहा है। इस योजना का उद्देश्य युवाओं को अपने पैरों पर खड़ा करना और उन्हें रोजगार देने वाला बनाना है।
मुख्यमंत्री जी ने श्री अमन गुप्ता का उल्लेख करते हुए कहा कि उद्यमिता और ब्रॉण्ड निर्माण के क्षेत्र में काम कर रहे युवाओं के लिए ऐसे अनुभव उपयोगी हैं। स्टार्टअप केवल किसी एक व्यक्ति का व्यवसाय नहीं होता, बल्कि उससे नए विचार, नए उत्पाद, नई तकनीक और रोजगार के अवसर विकसित होते हैं। कानपुर में ड्रोन टेक्नोलॉजी तथा नोएडा में रोबोटिक्स के सेण्टर ऑफ एक्सीलेन्स विकसित करने की दिशा में कार्य किये जा रहे हैं। मेडटेक और डीपटेक के क्षेत्र में भी नए अवसर विकसित किये जा रहे हैं। मुख्यमंत्री जी ने युवाओं से इन उभरते क्षेत्रों में कौशल हासिल कर प्रदेश के विकास में भागीदारी करने का आह्वान किया।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि आज का समय ए0आई0, रोबोटिक्स, ड्रोन टेक्नोलॉजी, सेमीकण्डक्टर और डेटा सेण्टर्स जैसी उभरती टेक्नोलॉजी का है। उत्तर प्रदेश को इन क्षेत्रों में आगे बढ़ाने के लिए आधारभूत सुविधाओं और उद्योगों के विकास पर काम किया जा रहा है। उन्होंने एच0सी0एल0 की उपस्थिति का उल्लेख करते हुए कहा कि वर्ष 2017 में जब वह वहां गए थे, तब लगभग 100 लोग काम कर रहे थे। अब वहां लगभग 12,500 लोग कार्यरत हैं और 6,000 नए युवा प्रोफेशनल्स की भर्ती के लिए विज्ञापन जारी किया गया है। इसके बाद वहां कार्यरत लोगों की संख्या लगभग 18,500 तक पहुंचने की सम्भावना है।
इस प्रकार के निवेश से युवाओं को आधुनिक टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में रोजगार के अवसर मिलते हैं। प्रदेश के युवाओं को नई तकनीक के अनुरूप अपनी क्षमता विकसित करनी होगी, ताकि वे केवल तकनीक का उपयोग करने वाले न रहें, बल्कि उसका निर्माण करने, उसमें नवाचार करने और उसके भविष्य की दिशा तय करने में भी सक्षम बनें। ए0आई0 के दौर में केवल निर्णय लेने वाला बनना पर्याप्त नहीं है; युवाओं को उन निर्णयों की दिशा निर्धारित करने वाला भी बनना होगा। इसके लिए तकनीक की समझ, प्रशिक्षण, नवाचार और लगातार सीखने की आवश्यकता है।
मुख्यमंत्री जी ने लखनऊ में अत्याधुनिक रक्षा तकनीक से जुड़े प्रोजेक्ट के विकास का उदाहरण देते हुए बताया कि कोविड काल के दौरान वर्ष 2020-21 में डी0आर0डी0ओ0 के अधिकारियों ने उत्तर प्रदेश में हाइपरसोनिक मिसाइल के निर्माण से सम्बन्धित प्रस्ताव रखा था। उस समय कोविड के कारण राजकोष पर दबाव था, लेकिन देश की सुरक्षा और युवाओं के भविष्य को ध्यान में रखते हुए इस प्रस्ताव को आगे बढ़ाने का निर्णय लिया गया। परियोजना के लिए भूमि खरीदने पर लगभग 200 करोड़ रुपये का खर्च अनुमानित था। राज्य सरकार ने भूमि उपलब्ध कराने और आवश्यक सुविधाएं देने का निर्णय लिया। इसके साथ यह व्यवस्था भी रखी गई कि परियोजना के लिए मैनपावर के चयन में उत्तर प्रदेश के तकनीकी संस्थानों के युवाओं को अवसर दिया जाए। डी0आर0डी0ओ0 ने बाद में चयन प्रक्रिया आगे बढ़ाने के लिए सम्पर्क किया तो मुख्यमंत्री जी ने कहा कि मेरे लिए पूरा प्रदेश ही परिवार है। उत्तर प्रदेश और भारत में जो भी योग्य टेक्नोक्रेट, यंग प्रोफेशनल्स तथा इंजीनियर्स हों, उन्हें सेलेक्ट करिये और कार्य आगे बढ़ाइए। उत्तर प्रदेश के ए0के0टी0यू0 जैसे तकनीकी संस्थानों से योग्य युवाओं का चयन किया गया। लगभग 500 युवा इंजीनियरों को इस परियोजना में काम करने का अवसर मिला। इनमें इंजीनियरिंग, टेक्नोलॉजी, पॉलिटेक्निक और अन्य तकनीकी पृष्ठभूमि से आए युवा शामिल थे।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि यह उदाहरण दिखाता है कि यदि उद्योग और रक्षा परियोजनाओं को राज्य के तकनीकी संस्थानों तथा स्थानीय प्रतिभाओं से जोड़ा जाए, तो युवाओं को रोजगार मिलने के साथ प्रदेश की अर्थव्यवस्था को भी लाभ होता है। उन्होंने परियोजना से सम्बन्धित मिसाइलों की बिक्री पर उत्तर प्रदेश सरकार को लगभग 35 करोड़ रुपये जी0एस0टी0 प्राप्त होने का भी उल्लेख किया।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि प्रदेश में उद्योग और टेक्नोलॉजी के विकास के लिए पर्याप्त बिजली, सुरक्षा और बेहतर आधारभूत सुविधाएं जरूरी हैं। पहले बिजली की कमी के कारण उद्योगों और तकनीकी गतिविधियों के विकास को लेकर सवाल उठते थे, लेकिन आज प्रदेश में बिजली की उपलब्धता और वितरण व्यवस्था में सुधार हुआ है।
मुख्यमंत्री जी ने एच0सी0एल0 परिसर में महिला कर्मचारियों की नाइट शिफ्ट का उदाहरण साझा करते हुए बताया कि जब कम्पनी ने महिलाओं को रात की शिफ्ट में काम करने की अनुमति देने का प्रस्ताव रखा, तो राज्य सरकार ने नीति में संशोधन कर इसकी अनुमति दी। उन्होंने इस सम्बन्ध में महिला कर्मचारियों से सीधे बातचीत कर उनकी सुरक्षा और कामकाज के अनुभव के बारे में जानकारी ली। कुछ महिलाएं बाराबंकी, उन्नाव, सीतापुर और लखनऊ से आती थीं तथा रात 02 बजे तक काम करने के बाद भी सुरक्षित घर लौटने की बात कह रही थीं। महिलाओं के लिए सुरक्षित वातावरण और निर्बाध कार्य-अवसर उपलब्ध कराना आवश्यक है। महिला सुरक्षा का आकलन इस बात से भी किया जा सकता है कि महिलाएं बिना भय के अपनी शिक्षा और रोजगार जारी रख पा रही हैं। जब बेटियां सुरक्षित वातावरण में काम कर सकती हैं, तब परिवारों का भरोसा मजबूत होता है और रोजगार में महिलाओं की भागीदारी बढ़ती है। यह प्रदेश में सुरक्षा और कार्य-संस्कृति में आए बदलाव का परिणाम है।
उत्तर प्रदेश में लगभग 57,000 ग्राम पंचायतों में बिजली उपलब्ध है और सभी जिला मुख्यालयों पर 24 घण्टे बिजली आपूर्ति की व्यवस्था है। पहले लगभग 1.53 लाख छोटे मजरे और पुरवे ऐसे थें, जहां पहले बिजली नहीं पहुंची थी। राज्य में विद्युत इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करने, नए सब-स्टेशन बनाने, जनरेशन क्षमता बढ़ाने और डिस्ट्रीब्यूशन लाइनें बिछाने के प्रयास किए गए हैं।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि पर्याप्त बिजली की उपलब्धता के कारण प्रदेश में डेटा सेण्टर्स और बड़े डेटा क्लस्टर विकसित करने की सम्भावनाएं बढ़ी हैं। उन्होंने लखनऊ को ए0आई0 सिटी के रूप में विकसित करने की दिशा में चल रहे प्रयासों का उल्लेख करते हुए कहा कि आने वाले समय में डेटा और ए0आई0 से जुड़े क्षेत्र रोजगार और आर्थिक विकास के महत्वपूर्ण आधार बनेंगे। ए0आई0 के क्षेत्र में केवल तकनीक के निर्णयों को लागू करने तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि तकनीक के सामाजिक उपयोग, उसकी दिशा और उसके प्रभाव को समझने की क्षमता भी विकसित करनी चाहिए। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में ए0आई0 और आधुनिक तकनीक से सम्बन्धित क्षेत्रों में देश आगे बढ़ रहा है और उत्तर प्रदेश भी इसमें अपनी भूमिका मजबूत कर रहा है।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि उत्तर प्रदेश में ग्लोबल कैपेबिलिटी सेण्टर्स की स्थापना के लिए अनुकूल वातावरण तैयार किया जा रहा है। लखनऊ में आयोजित जी0सी0सी0 कॉनक्लेव में देश और दुनिया के उद्योग जगत से जुड़े प्रतिनिधियों ने भाग लिया। इस कार्यक्रम में उद्योगों के साथ मिलकर काम करने और निवेश को आगे बढ़ाने के लिए लेटर ऑफ कम्फर्ट जारी किए गए। प्रदेश में 250 से अधिक जी0सी0सी0 स्थापित हो चुके हैं और इनमें बड़ी संख्या में युवा काम कर रहे हैं। इससे उत्तर प्रदेश के युवाओं को आधुनिक तकनीक, वैश्विक व्यवसाय और उच्च कौशल आधारित रोजगार के अवसर मिल रहे हैं।
मुख्यमंत्री जी ने साइबर सिक्योरिटी के महत्व पर बल देते हुए कहा कि डिजिटल अर्थव्यवस्था में नागरिकों के डेटा और वित्तीय सुरक्षा की रक्षा अत्यन्त आवश्यक है। साइबर अपराध और ऑनलाइन धोखाधड़ी को रोकने के उद्देश्य से साइबर सिक्योरिटी से जुड़े नए संस्थागत ढांचे पर काम किया जा रहा है। इस दिशा में आज कैबिनेट की बैठक में एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव पर साइबर सिक्योरिटी के एक नये मुख्यालय के लिए कैबिनेट द्वारा सहमति प्रदान की गयी है। प्रयास यह होना चाहिए कि धोखाधड़ी होने के बाद ही कार्रवाई न की जाए, बल्कि ऐसी गतिविधियों को पहले ही रोकने की क्षमता विकसित हो।
मुख्यमंत्री जी ने क्वॉण्टम कम्प्यूटिंग का उल्लेख करते हुए कहा कि भविष्य में डेटा सुरक्षा और तकनीकी क्षमताओं को मजबूत करने में इसका महत्वपूर्ण योगदान हो सकता है। उन्होंने युवाओं से इन क्षेत्रों में ज्ञान और कौशल विकसित करने का आह्वान किया।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि बेहतर कनेक्टिविटी किसी भी राज्य में उद्योग, निवेश, रोजगार और पर्यटन के विकास का महत्वपूर्ण आधार होती है। पहले यहां केवल डेढ़ एक्सप्रेस-वे थे, लेकिन आज भारत के एक्सप्रेस-वे नेटवर्क का लगभग 60 प्रतिशत हिस्सा है। पहले प्रदेश में केवल 02 इण्टरनेशनल एयरपोर्ट था, जबकि आज पांच अन्तरराष्ट्रीय एयरपोर्ट सहित कुल 17 एयरपोर्ट हैं।
मुख्यमंत्री जी ने गोरखपुर एयरपोर्ट का उदाहरण देते हुए कहा कि पहले वहां एयर कनेक्टिविटी सीमित था, लेकिन अब लगभग 14 उड़ानें संचालित हो रही हैं और अनेक उड़ानें पूरी क्षमता के साथ चल रही हैं। यात्रियों की बढ़ती संख्या और सीटों की उपलब्धता में कमी बेहतर एयर कनेक्टिविटी की बढ़ती मांग को दर्शाती है।
प्रदेश के सात शहरों में मेट्रो की सुविधा उपलब्ध है। भारत की पहली रैपिड रेल भी उत्तर प्रदेश में संचालित हो रही है। वाराणसी से हल्दिया के बीच इनलैण्ड वॉटर-वे के संचालन तथा ईस्टर्न और वेस्टर्न फ्रेट कॉरिडोर के उत्तर प्रदेश से होकर गुजरने का उल्लेख करते हुए कहा कि यह सुविधाएं प्रदेश को लॉजिस्टिक्स और परिवहन के प्रमुख केन्द्र के रूप में विकसित करने में सहायक हैं।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि सड़क, रेल, हवाई और जलमार्ग से बेहतर कनेक्टिविटी के कारण उद्योगों को अपने उत्पादों के परिवहन में सुविधा मिलती है। इससे निवेश आकर्षित करने, रोजगार पैदा करने और राज्य की अर्थव्यवस्था को गति देने में मदद मिलती है।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि उत्तर प्रदेश के पास विभिन्न क्षेत्रों के लिए 36 सेक्टोरल पॉलिसीज हैं। राज्य सरकार निवेशकों को प्रोत्साहन देने के साथ उन्हें अपनी परियोजनाओं को स्थापित करने और आगे बढ़ाने के लिए आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराने का प्रयास कर रही है। उत्तर प्रदेश को लगभग 50 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। इनमें से लगभग 15 लाख करोड़ रुपये की परियोजनाओं की ग्राउण्ड ब्रेकिंग हो चुकी है, जबकि लगभग 7.5 लाख करोड़ रुपये की परियोजनाएं आगे बढ़ाने के लिए तैयार हैं। राज्य सरकार निवेशकों को अपनी प्रतिबद्धताओं के अनुरूप काम करने और परियोजनाओं को धरातल पर उतारने के लिए प्रोत्साहित कर रही है।
उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था लगभग 12 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 36 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचने की दिशा में आगे बढ़ी है। इस अवधि में प्रति व्यक्ति आय में भी लगभग तीन गुना वृद्धि हुई है और राज्य का बजट तीन गुने से अधिक बढ़ा है। प्रदेश में विमेन वर्क फोर्स की भागीदारी भी तीन गुने से अधिक बढ़ी है। उत्तर प्रदेश को कभी बीमारू राज्य के रूप में देखा जाता था, लेकिन आज राज्य देश की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान देने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। उत्तर प्रदेश ने बॉटम थ्री से टॉप-थ्री इकोनॉमी के रूप में अपनी विकास यात्रा को आगे बढ़ाया है। इकोनॉमी रोजगार, उद्योग, निवेश और कनेक्टिविटी में हुए बदलावों से युवाओं के सामने अपने ही प्रदेश में भविष्य बनाने की सम्भावनाएं बढ़ी हैं।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि आस्था भी अर्थव्यवस्था का आधार बन सकती है। पर्यटन के विकास के लिए सुरक्षा, सुविधाएं और बेहतर कनेक्टिविटी आवश्यक हैं। प्रदेश सरकार इन क्षेत्रों में काम कर रही है, जिससे उत्तर प्रदेश धार्मिक पर्यटन के साथ-साथ निवेश और पर्यटन के प्रमुख गंतव्य के रूप में भी अपनी पहचान मजबूत कर रहा है।
उत्तर प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत और आध्यात्मिक परम्परा उसकी शक्ति हैं। काशी की जीवंतता, अयोध्या की मर्यादा, मथुरा-वृंदावन की भक्ति, प्रयागराज की समरसता तथा मां विंध्यवासिनी की आस्था प्रदेश की पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। पिछले वर्ष प्रदेश में लगभग 156 करोड़ पर्यटकों का आगमन हुआ। इससे हमें यह समझना चाहिए कि पर्यटन केवल धार्मिक स्थलों के दर्शन तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे स्थानीय अर्थव्यवस्था और रोजगार के अनेक अवसर भी पैदा होते हैं। जब श्रद्धालु और पर्यटक किसी स्थान पर पहुंचते हैं, तो रिक्शा चालक, टैक्सी चालक, नाविक, होटल, रेस्टोरेंट और फूल-पत्ती बेचने वाले छोटे कारोबारियों को भी आय प्राप्त होती है।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि प्रधानमंत्री जी ने स्वतंत्रता के अमृत महोत्सव के दौरान वर्ष 2047 तक विकसित भारत का लक्ष्य देश के सामने रखा। आज मंच पर सम्मानित हो रही युवा प्रतिभाएं उस समय तक अपने-अपने क्षेत्रों में नेतृत्वकारी भूमिका निभा रही होंगी। आज के युवाओं को यह तय करना होगा कि वे कैसा भारत और कैसा उत्तर प्रदेश बनाना चाहते हैं।
मुख्यमंत्री जी ने लोकतंत्र और नागरिक जिम्मेदारी का उल्लेख करते हुए कहा कि लोकतंत्र नागरिकों को अपनी बात रखने और अपने विचार व्यक्त करने का अधिकार देता है। अभिव्यक्ति की स्वतन्त्रता लोकतंत्र की महत्वपूर्ण विशेषता है, जिसका उपयोग मर्यादा और जिम्मेदारी के साथ किया जाना चाहिए। उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे मतदाता सूची में अपना नाम अवश्य दर्ज कराएं और चुनाव के दिन अपने मताधिकार का प्रयोग करें। उन्होंने कहा कि मतदान केवल अधिकार नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक कर्तव्य भी है। मतदाता सूची में नाम दर्ज कराने और मतदान में भागीदारी से ही नागरिक लोकतांत्रिक व्यवस्था को मजबूत बनाने में योगदान दे सकते हैं। युवाओं को यह समझना चाहिए कि उनके निर्णय प्रदेश और देश के भविष्य को प्रभावित करते हैं। इसलिए युवा वर्ष 2047 के विकसित भारत के लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए अपने जीवन और कार्यशैली में सकारात्मक बदलाव लाएं।
क्रार्यक्रम को टाइम्स ऑफ इण्डिया, लखनऊ संस्करण के रेजीडेण्ट एडिटर श्री प्रवीण कुमार ने भी सम्बोधित किया।
इस अवसर पर सांसद श्री रवि किशन शुक्ल सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।



